नई दिल्ली. विनिर्माण, कृषि और खनन क्षेत्र में सुस्ती के कारण देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर लगातार पाँचवीं तिमाही में घटते हुये चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में पाँच प्रतिशत रह गई जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह वृद्धि दर आठ प्रतिशत रही थी. यह वित्त वर्ष 2012-13 की चौथी तिमाही के बाद जीडीपी में सबसे कमजोर बढ़ोतरी है. वर्ष 2012-13 की अंतिम तिमाही में विकास दर 4.3 प्रतिशत रही थी. वित्त वर्ष 2017-18 की अंतिम तिमाही (8.1 प्रतिशत) के बाद से विकास दर में लगातार गिरावट दर्ज की गयी है.

पिछले वित्त वर्ष की पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी तिमाही में जीडीपी क्रमश: आठ प्रतिशत, सात प्रतिशत, 6.6 प्रतिशत और 5.8 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी थी. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जारी आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून की तिमाही में स्थिर मूल्य पर जीडीपी 35.85 लाख करोड़ रुपये रहा. पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 34.14 लाख करोड़ रुपये रहा था.

इस प्रकार जीडीपी विकास दर पाँच प्रतिशत दर्ज की गई. विनिर्माण क्षेत्र के सकल मूल्य वर्द्धन की विकास दर जो पिछले साल अप्रैल-जून के दौरान 12.1 प्रतिशत रहा था, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में घटकर 0.6 प्रतिशत रह गया. कृषि, वानिकी एवं मात्स्यिकी की विकास दर 5.1 प्रतिशत से घटकर दो प्रतिशत रह गयी. हालाँकि, खनन क्षेत्र की विकास दर 0.4 प्रतिशत से बढ़कर 2.7 प्रतिशत पर पहुँच गई.

बिजली, गैस, जलापूर्ति और यूटिलिटी सेवाओं की विकास दर 8.6 प्रतिशत और लोक प्रशासन, रक्षा एवं अन्य सेवाओं की विकास दर 8.5 प्रतिशत दर्ज की गयी. व्यापार, होटल, परिवहन, संचार एवं प्रसारण से जुड़ी सेवाओं की विकास दर 7.1 प्रतिशत दर्ज की गयी. वित्तीय, रियल इस्टेट एवं पेशेवर सेवाओं की विकास दर 5.9 फीसदी और निर्माण क्षेत्र की विकास दर 5.7 प्रतिशत रही.

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