अक्सर हमारे मन में यह विचार आता है कि "क्या सोना अभी भी एक अच्छा निवेश है?" प्रोपर्टी के बाद स्वर्ण धातु में निवेश करना सबसे अधिक उत्तम और सुरक्षित निवेश माना जाता है क्योंकि यह निवेश मुद्रास्फीति से उत्पन्न होने वाले जोखिमों में अन्तर्गत नहीं आता है.

प्राचीन काल में सोना धातु को वित्तीय लेन-देन की करेंसी के रुप में प्रयोग किया जाता था. स्वर्ण धातु से बने सिक्के उस समय में विशेष रुप से प्रयोग किए जाते थे. सोना धातु को प्राचीन दुनिया की मुद्रा के रुप में आज भी सहेज के रखा जाता है. वैदिक ज्योतिष शास्त्रों में सोना धातु का कारक ग्रह गुरु और सूर्य को माना गया है. सूर्य ग्रह की कारक धातु होने के कारण इसका सीधा संबंध सरकार, राज्य और सत्ता पक्ष और खजाने से भी होता है. सूर्य क्योंकि एक राशि में केवल एक माह ही रहता है इसलिए इसका गोचर में राशि परिवर्तन करना विश्व स्वर्ण बाजार पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं डालता है. गुरु ग्रह को भी स्वर्ण धातु का कारक ग्रह माना जाता है और गुरु एक राशि में लगभग एक साल रहता है.

गुरु और सूर्य - कारक ग्रह

ग्रुरु ग्रह विश्व बाजार में स्वर्ण धातु की कीमतों में उतार-चढ़ाव को प्रभावित करता है तो शनि काल होने के कारण इन घटनाओं के होने के समय का निर्धारण करता है. इस प्रकार गुरु-शनि जब भी एक साथ हो, एक दूसरे से षड़ाष्टक योग, द्विद्वादश योग में स्थित हो तो स्वर्ण धातु की कीमतों में रिकार्ड स्तर के बदलाव देखे गए है. साल 2020 में शनि-गुरु के साथ मकर राशि में गोचर करने वाले है. शनि-गुरु का एक साथ शनि की राशि मे होना स्वर्ण बाजार में रिकार्ड स्तर का उतार-चढ़ाव लेकर आ सकता है. इन दोनों ग्रहों पर शुभ ग्रहों का प्रभाव हो तो सोने की कीमतें बढ़ जाती है. इसके विपरीत, इन ग्रहों पर राहु और केतु जैसे बुरे ग्रहों द्वारा किसी तरह से पीड़ित होने पर सोने में गिरावट की संभावना बनती है. सोने की कीमत बृहस्पति ग्रह से विशेष रुप से जुड़ी होने के कारण जब बृहस्पति मजबूत होता है, तो यह आर्थिक क्षेत्रों को मजबूती देता है. आर्थिक तेजी इस भी गुरु ग्रह के फलस्वरुप विशेष रुप से देखी जा सकती है. अनुभव के अनुसार, हम कह सकते हैं कि बृहस्पति ग्रह भी मुद्रास्फीति की धारणाओं से जुड़ा हुआ है.  

वित्तीय ज्योतिष - क्या है ?

वित्तीय ज्योतिष जिसे व्यावसायिक ज्योतिष और आर्थिक ज्योतिष के रूप में भी जाना जाता है. वित्तीय बाजारों की घटनाओं को समझने के लिए भचक्र में ग्रहों की स्थिति का सूक्ष्मता से अध्ययन किया जाता है. फाइनेंशियल एस्ट्रोलॉजी हमें यह तय करने में मदद करती है कि किसी व्यक्ति को कब शेयर बाजार या कमोडिटी या संबंधित बाजार में शेयर की खरीद या बिक्री कर ट्रेडिंग करनी चाहिए. वास्तव में समय ही हर घटना का सार है. और समय का निर्धारण गोचर में ग्रहों की स्थिति के द्वारा निर्धारित किया जाता है. सही समय पर सही काम करना ही सफलता की कुंजी है.

शेयर बाजार में, सही समय पर प्रवेश और निकास बड़ा लाभ कमाने का अचूक उपाय हो सकता है, इससे अप्रत्याशित लाभ प्राप्ति की कुंजी भी कहा जा सकता है. यदि शेयर बाजार की स्थिति ठीक नहीं है तो यह निश्चित है कि आप बड़ा लाभ नहीं कमा सकते है. लेकिन अगर शेयर बाजार बहुत अच्छा कर रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि शेयर बाजार में निवेश करने वाला हर कोई बड़ा लाभ अर्जित कर लेगा, बाजार में निवेश किसी भी रुप में करें, इससे प्राप्त होने वाले लाभ बहुत कुछ भाग्य पर निर्भर करते हैं. इसलिए शेयर बाजार, मुद्रा बाजार या स्वर्ण बाजार में आप बड़ा लाभ तभी कमाएंगे जब यह आपके भाग्य में लिखा हो. शेयर बाजार में वृद्धि, कच्चा तेल और सोने की कीमतों में अगली बड़ी वृद्धि जानने के लिए गहनता से गुरु और शनि गोचर का विचार किया जाता है. 

आज हम अपने इस आलेख में यह बताने जा रहे हैं कि 2020 में गुरु-शनि का मकर राशि में होना स्वर्ण धातु में निवेश के लिए कैसा रहने वाला है-

मई 1920 को 254:00, अक्तूबर 1970 को 237:00, जून 2001 को 377:00 और अक्तूबर 1976 में 410 मूल्य पर विश्व सोना अपने निम्नतम स्तर पर था. इसके विपरीत दिसम्बर 1933 में 673:00, मार्च 1974 में 967:00, फरवरी 1980 को 1522:00 एवं अक्तूबर 2011 को 1829 मूल्य के साथ रिकार्ड ऊंचाईयों पर था. इन समयावधियों की कुंड्ली निर्माण करने पर निम्न ग्रह स्थितियां थी-

मई 1920 में राहु तुला राशि, शुक्र केतु युति मेष राशि, सूर्य-बुध वॄषभ राशि, गुरु उच्चस्थ कर्क राशि और शनि चंद्र के साथ सिंह राशि में गोचर कर रहे थे. इस समय गुरु और शनि अंशों में निकट्तम थे, और एक दूसरे से द्विद्वादश योग में स्थित थे, गोचर में शनि राहु पर अपनी तीसरी दृष्टि बनाए हुए थे. इस योग में शनि अपनी दशम दृष्टि से सूर्य को प्रभावित कर रहे थे.  

अक्तूबर १९७० में राहु कुम्भ राशि, शनि मेष राशि, चंद्र-केतु युति सिंह राशि, मंगल कन्या राशि, सूर्य, बुध और गुरु तुला राशि एवं शुक्र वॄश्चिक राशि में स्थित थे. गुरु शनि एक दूसरे से समसप्तक योग में होने के कारण एक दूसरे को प्रभावित कर रहे थे. इसके अतिरिक्त राहु का नवम दृष्टि प्रभाव भी गुरु को प्राप्त हो रहा था. इस योग में शनि-सूर्य नीचस्थ थे और दोनों एक दूसरे से दॄष्टि संबंध बनाए हुए थे.

इसके बाद जून 2001 में सोना धातु के मूल्यों में गिरावट रिकार्ड की गई. इस समय मंगल स्वराशि वृश्चिक राशि, केतु धनु राशि, शुक्र मेष राशि, बुध और शनि वृषभ राशि, सूर्य गुरु और राहु मिथुन राशि में गोचर कर रहे थे, इस समय चंद्र स्वराशि कर्क में थे. गुरु-शनि एक दूसरे से द्विद्वादश योग में स्थित थे, शनि गुरु के नक्षत्र में थे, गुरु-सूर्य का राहु के साथ होना और केतु-मंगल के प्रभाव में होना इस स्थिति की वजह बना.

साल 2020 निवेश कहां करें? कहां से बचें ?

गुरु-शनि का मकर राशि में गोचर 2020 में होने वाला है, मार्च 2020 से दिसम्बर 2020 के मध्य की अवधि में सोने में निवेश करने से बचना होगा. इस अवधि में सोने की कीमतों में अप्रत्याशित गिरावट आने के संकेत मिल रहे है. वैसे भी साल 2020 धन विदेश के लिए किसी भी प्रकार से अनुकूल नहीं रहने वाला है, बड़े नुकसान से बचने के लिए इस साल में निवेश से बचना चाहिए. आर्थिक मंदी, सोने के भावों में गिरावट भी इस अवधि में देखने में आ सकती है. यदि बाजार में धन निवेश किया भी हुआ है तो उसे 2020 के शुरुआत के साथ ही वापस निकाल लेना समझदारी होगी. प्रोपर्टी के भाव इस साल में बढ़ सकते है, उसमें निवेश आप कर लाभ कमा सकते है.  

सम्पर्क : श्री मां चिंतपूर्णी ज्योतिष संस्थान
5, महारानी बाग, नई दिल्ली -110014
8178677715, 9811598848  

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