कुछ नया करने की तमन्ना है और प्रेरणा चाहिए तो रघुपति सहाय से बेहतर कौन होगा? जो खूद कहते हैं- नये तराने छेडो़, मेरे नगमों को नींद आती है. वैसे उन्हें इस नाम से नहीं, फिराक गोरखपुरी के नाम से लोग जानते हैं. भारत के प्रसिद्धि उर्दू शायर फिराक गोरखपुरी स्वतंत्रता संग्राम में भी सक्रिय रहे, इसकी जानकारी भी लोगों को नहीं है. उनका जन्म- 28 अगस्त, 1896 को उत्तर प्रदेश में हुआ. फिराक उनका तख़ल्लुस था और गोरखपुर उनका जन्मस्थान! उन्होंने भाषा के नए प्रयोग करते हुए उर्दू को बोलियों से जोड़ कर उसमें नया असर पैदा किया. फिराक गोरखपुरी ने अपने साहित्यिक जीवन का सफर गजल से शुरू किया था.

फारसी, हिन्दी, ब्रजभाषा और भारतीय संस्कृति की गहरी समझ होने के कारण उनकी शायरी में भारत की आत्मा रच-बस गई है. उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, सर्वोच्च ज्ञानपीठ पुरस्कार और सोवियत लैण्ड नेहरू अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था. वर्ष 1970 में उन्हें साहित्य अकादमी का सदस्य भी मनोनीत किया गया था. देश की आजादी के लिए महात्मा गाँधी ने- असहयोग आन्दोलन, छेड़ा तो फिराक गोरखपुरी ने अपनी नौकरी छोड़ दी और आन्दोलन में कूद पड़े.

उन्हें गिरफ्तार किया गया और डेढ़ साल की सजा भी हुई. जेल से छूटने के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अखिल भारतीय कांग्रेस के कार्यालय में- अण्डर सेक्रेटरी की जगह पर उन्हें काम दे दिया. नेहरू के यूरोप चले जाने के बाद उन्होंने यह पद छोड़ दिया. इसके बाद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में सन्1930 से 1959 तक वे अंग्रेजी के शिक्षक रहे. अपने साहित्यिक जीवन की शुरूआत में ही 6 दिसंबर, 1926 को ब्रिटिश सरकार के राजनीतिक बंदी बनाए गए थे. कुछ नया करने की भावना के चलते उन्होंने अपने साहित्य को परंपरागत भावबोध और शब्द-भंडार का उपयोग करते हुए नयी बोलियों, नए अंदाज और नए विषयों से जोड़ा.

प्रतिदिन के कड़वे सच और आने वाले कल के प्रति विश्वास, दोनों को भारतीय संस्कृति और लोकभाषा के प्रतीकों से जोड़कर उन्होंने अपनी शायरी को नया अंदाज दिया. उन्होंने असंख्य रचनाएँ की थीं. वे बड़े निर्भीक शायर थे और उनकी शायरी उच्चकोटि की मानी जाती हैं. उनके कविता संग्रह- गुलेनग्मा पर 1960 में उन्हें साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिला और इसी रचना पर वे 1969 में भारत के सर्वोच्च प्रतिष्ठित सम्मान- ज्ञानपीठ पुरस्कार, से सम्मानित किये गये थे. उन्होंने उपन्यास 'साधु और कुटियाÓ के अलावा अनेक कहानियाँ भी लिखी थीं. उनका विवाह 29 जून, 1914 को प्रसिद्ध जमींदार विन्देश्वरी प्रसाद की बेटी किशोरी देवी से हुआ.

युवावस्था में हुआ विवाह उनको रास नहीं आया और एक छत के नीचे रहते हुए भी उनकी व्यक्तिगत जिंदगी एकाकी ही बीती. अपने आसपास के घटनाक्रम को उन्होंने न केवल दिल से महसूस किया और समझा बल्कि उस अहसास को शब्द देने का बेहतर काम भी उन्होंने किया... सुनते हैं इश्क नाम के गुजरे हैं इक बुजुर्ग हम लोग भी मुरीद इसी सिलसिले के हैं!

फ्लैश बैक-

28 अगस्त, 1904- कलकत्ता से बैरकपुर तक पहली कार रैली का आयोजन.

28 अगस्त, 1972- साधारण बीमा कारोबार राष्ट्रीयकरण बिल पारित किया गया.

28 अगस्त, 1990- ईराक ने कुवैत को अपना 19वाँ प्रान्त घोषित किया.

28 अगस्त, 1999- मेजर समीर कोतवाल आसाम में उग्रवादियों के एक गुट के साथ लडाई में शहीद हो गये.

28 अगस्त, 2000- ताइवान के राष्ट्रपति चुने शुई बियान द्वारा चीन के साथ एकीकरण के विकल्प को स्वीकार करने का संकेत.

28 अगस्त, 2000- संयुक्त राष्ट्र में सहस्त्राब्दि विश्व धार्मिक शिखर सम्मेलन शुरू.

28 अगस्त, 2001- भारत-पाक सीमा पर गोलीबारी, पाकिस्तान के 8 सैनिक मरे.

28 अगस्त, 2006- दुनिया की सबसे बड़ी महिला मारिया एस्टर डी. कापोविला का इक्वेडोर में निधन.

28 अगस्त, 2008- भारतीय रिजर्व बैंक ने 1999 और 2000 के सभी नोटो को प्रचलन से हटाने का निर्णय किया.

28 अगस्त, 2008- प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बिहार में आई बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया.

28 अगस्त, 2008- अन्तराज़्ष्ट्रीय स्तर पर मैगजीन फोब्र्स ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मायावती को दुनिया की 100 सबसे शक्तिशाली महिलाओं में शामिल किया.

जन्म दिन-

28 अगस्त, 1896- फिराक गोरखपुरी, सुप्रसिद्ध उर्दू शायर.

28 अगस्त, 1928- विलायत खान- हिन्दुसतान के प्रसिद्ध सितार वादक.

28 अगस्त, 1928- एमजीके मेनन, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के भूतपूर्व अध्यक्ष.

28 अगस्त,1929- राजेंद्र यादव, जानेमाने आधुनिक साहित्यकार. 28 अगस्त, 1913- आबिदा सुल्तान, भोपाल रियासत की राजकुमारी एवं हिन्दुसतान की पहली महिला पायलट.

28 अगस्त, 1932- सरस्वती प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत की मानस पुत्री और चर्चित लेखिका.

महत्वपूर्ण दिवस-

28 अगस्त, राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा

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