नजरिया. पीएम मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35 ए खत्म करने और इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद यहां की पूरी तस्वीर बदल दी है. अब विधानसभा सीटों के परिसीमन की तैयारी चल रही है, जाहिर है जम्मू-कश्मीर में आए ये बदलाव बीजेपी के लिए लाभदायक रहेंगे.

जम्मू-कश्मीर की सियासी तस्वीर देखें तो जहां जम्मू में बीजेपी का असर लगातार बढ़ता गया है, वहीं घाटी में पुराने राजनीतिक दलों का ही दबदबा है. इसलिए यदि सियासी गणित के हिसाब से विधानसभा सीटों के परिसीमन में जम्मू का संख्यात्मक महत्व बढ़ता है तो जम्मू-कश्मीर का नेतृत्व घाटी के नेताओं के हाथ से निकल जाएगा?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि परिसीमन के बाद जम्मू क्षेत्र की सीटें बढ़कर कश्मीर घाटी की सीटों से अधिक हो सकती हैं. मतलब.... जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाना बीजेपी के लिए आसान हो सकता है.

याद रहे, विधानसभा चुनाव 2014 में जहां जम्मू क्षेत्र की 37 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने 25 सीटों पर जीत दर्ज की थी, वहीं कश्मीर घाटी के 46 विधानसभा चुनाव क्षेत्रों में उसे क्या मिला?

यदि परिसीमन के बाद जम्मू क्षेत्र की सीटें बढ़ी तो जम्मू-कश्मीर का संपूर्ण सियासी समीकरण बदल जाएगा, अर्थात.... जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस सहित वहां के स्थापित क्षेत्रीय दलों पर सियासी संकट के बादल गहरा रहे हैं!

देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस और क्षेत्रीय दल जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के राजनीतिक जाल को कैसे तोड़ पाते हैं?

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