- प्रदीप कुमार द्विवेदी  

जिस तरह एक माता अपने बालक को प्रात: तैयार करती है ठीक वैसे ही सोलह चरणों में भगवान की पूजा की जाती है लेकिन वैदिक मंत्रों के भावार्थ की जानकारी के अभाव में श्रद्धालु भावभक्ति में कम और तनाव में ज्यादा रहते हैं. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के समय की जाने वाली पूजा में विशेषतौर पर भावभक्ति का महत्व हेै लेकिन जो श्रद्धालु षोडशोपचार जन्माष्टमी पूजा करना चाहते हैं उनके लिए संक्षिप्त विधि इस प्रकार है, षोडशोपचार जन्माष्टमी पूजा में वैदिक मंत्रों का सस्वर पाठ किया जाता हेै लेकिन यहां केवल विधि दी जा रही है ताकि पूजा की भावना को समझ सकें...

ध्यानम्- भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान प्रतिष्ठित श्रीकृष्ण की मूर्ति/चित्र में करें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:.. 

आवाहनम्- भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करने के बाद, उनका सपरिवार आवाह्न करें- ओम श्रीबालकृष्णम् आवहयामी..

आसनम्-  भगवान श्रीकृष्ण का आव्हान करने के बाद, उन्हें आसन के लिये पाँच पुष्प अंजलि में लेकर अपने समक्ष छोड़े- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, आसनं समर्पयामि..

पाद्य- भगवान श्रीकृष्ण को आसन प्रदान करने के बाद, चरण धोने हेतु जल, पाद्य अर्पित करें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, पादोयो पाद्यम् समर्पयामि..

अघ्र्य- पाद्य समर्पण के बाद, भगवान श्रीकृष्ण को शिर के अभिषेक हेतु जल, अघ्र्य अर्पित करें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, अध्र्यम् समर्पयामि..

आचमनीयम्- आचमन के लिए श्रीकृष्ण को जल अर्पित करें-  ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, आचमनीयम् समर्पयामि..

स्नानम्- आचमन समर्पण के बाद, भगवान श्रीकृष्ण को जल से स्नान कराएं- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, स्नानम् समर्पयामि..

वस्त्र- स्नान के पश्चात भगवान श्रीकृष्ण को मोली के स्वरूप वस्त्र अर्पित करें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, वस्त्रम् समर्पयामि..

यज्ञोपवीत- वस्त्र समर्पण के पश्चात भगवान श्रीकृष्ण को यज्ञोपवीत अर्पित करें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, यज्ञोपवीतम् समर्पयामि..

गन्ध-भगवान श्रीकृष्ण को सुगन्धित द्रव्य अर्पित करें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, गंधम् समर्पयामि..

आभरणं हस्तभूषण- भगवान श्रीकृष्ण के श्रृंगार के लिये आभूषण अर्पित करें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, आभरणानि समर्पयामि, हस्तभूषणम् समर्पयामि..

नाना परिमल द्रव्य- भगवान श्रीकृष्ण को विविध सुगन्धित द्रव्य अर्पित  करें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, नाना परिमल द्रव्यम् समर्पयामि..

पुष्प- भगवान श्रीकृष्ण को पुष्प समर्पित करें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, पुष्पाणि समर्पयामि..

अथ अंगपूजा- भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न अंगदेवों का पूजन करें, बाएँ हाथ में अक्षत, पुष्प, चन्दन आदि लेकर दाहिने हाथ से भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति के समक्ष छोड़ें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, सर्वांगाणि पूजयामी..

धूपं- श्रीकृष्ण को धूप समर्पित करें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, धूपम् आघ्रापयामी..

दीपं- श्रीकृष्ण को दीप समर्पित करें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, दीपम् दर्शयामी..

नैवेद्य-भगवान श्रीकृष्ण को नैवेद्य अर्पित करें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, नैवेद्यम् समर्पयामी..

तांबूलं-श्रीकृष्ण को ताम्बूल- पान, सुपारी के साथ, अर्पित करें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, पूगीफल ताम्बूलम् समर्पयामी..

दक्षिणा- श्रीकृष्ण को दक्षिणा समर्पित करें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, सुवर्ण पुष्प दक्षिणाम् समर्पयामी..

महानीराजन- श्रीकृष्ण को निराजन- आरती, समर्पित करें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, महानीराजनम् दीपम् समर्पयामी..

प्रदक्षिणा- भगवान श्रीकृष्ण की प्रदक्षिणा, बाएँ से दाईं ओर की परिक्रमा के साथ फूल समर्पित करें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, प्रदक्षिणान् समर्पयामी..

नमस्कार- भगवान श्रीकृष्ण को नमस्कार करें- ओम श्रीबालकृष्णाय नम:, नमस्कारन् समर्पयामी..

क्षमापन- पूजा के दौरान जानी-अनजानी भूल के लिए भगवान श्रीकृष्ण से अपनी भाषा और भावना में क्षमा-प्रार्थना करें.

.. जय श्रीकृष्ण ..

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:
वृषभ, कर्क, सिंह, 
वृश्चिक, धनु, मीन
*तुला राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

*यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

शनिवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा       रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- काल              पहला- लाभ

दूसरा- शुभ              दूसरा- उद्वेग

तीसरा- रोग              तीसरा- शुभ

चौथा- उद्वेग             चौथा- अमृ

पांचवां- चर               पांचवां- चर

छठा- लाभ                छठा- रोग

सातवां- अमृत            सातवां- काल

आठवां- काल             आठवां- लाभ

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ाअपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है! 

पंचांग

शनिवार, 24 अगस्त 2019

कृष्ण जन्माष्टमी
रोहिणी व्रत

शक सम्वत 1941 विकारी
विक्रम सम्वत 2076
काली सम्वत 5121
दिन काल 12:57:15
मास भाद्रपद
तिथि अष्टमी - 08:34:16 तक
नक्षत्र रोहिणी - 28:16:18 तक
करण कौलव - 08:34:16 तक, तैतिल - 20:29:14 तक
पक्ष कृष्ण
योग व्याघात - 15:46:32 तक
सूर्योदय 05:54:46
सूर्यास्त 18:52:02
चन्द्र राशि वृषभ
चन्द्रोदय 24:22:00
चन्द्रास्त 13:26:00
ऋतु शरद
दिशा शूल: पूर्व में
राहु काल वास: पूर्व में
नक्षत्र शूल: पश्चिम में 28:17 तक
चन्द्र वास: दक्षिण में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


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