- प्रदीप कुमार द्विवेदी  

शीतला माता की पूजा सभी क्षेत्रों में होती है, दिन अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन प्रमुख उद्देश्य- तपते जीवन में शीतलता के आशीर्वाद की चाहत है, माता के प्रकोप से राहत है, घर-परिवार की सुख-शांति की मनोकामना है.

शीतला माता का मंदिर अक्सर वटवृक्ष के पास ही होता है. शीतला माता की पूजा के बाद वट का पूजन भी किया जाता है.

माना जाता है कि सच्चे मन से देवी  शीतला की पूजा-व्रत से देवी धन-धान्य से पूर्ण कर प्राकृतिक आपदाओं से दूर रखती हैं. व्रत से एक दिन पहले भोजन तैयार किया जाता है तथा व्रत के दिन शीतला माता की पूजा और प्रसाद के बाद ठंडा भोजन ही ग्रहण किया जाता है, इस दिन घर में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता और न ही चूल्हा जलाया जाता है,

गुडग़ाँव का शीतला माता मंदिर.....

वैसे तो देश के हर क्षेत्र में शीतला माता के मंदिर हैं, लेकिन दिल्ली के पास गुडग़ांव का शीतला माता मंदिर विख्यात है जहां नवरात्रि के अवसर पर तो भक्तों की भारी भीड़ रहती है. देश के कोने-कोन से श्रद्धालु यहाँ मन्नत माँगने आते हैं. शीतला माता का यह मंदिर देश भर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है.

यहाँ प्रतिवर्ष दो बार एक-एक महीने का मेला लगता है. शीतला माता मंदिर महाभारत काल से जुड़ा है. उस समय  से गुडग़ाँव में भारतवंशियों के कुलगुरु कृपाचार्य की पत्नी गुरु मां- शीतला देवी की पूजा आराधना होती है. करीब पांच सौ वर्षों से यह मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहाँ पर देश-विदेश से भक्त पूजा-भक्ति के लिए आते हैं.

ऐसा माना जाता है कि यहाँ पूजा करने से माता के प्रकोप से शांति मिलती है. यहां बच्चों का प्रथम मुंडन भी होता है.

प्रशासन ने मेले की व्यवस्था, सुविधा आदि के लिए- शीतला माता श्राइन बोर्ड बना रखा है जो मेले का संचालन करता है.

गुडग़ाँव का शीतला माता मंदिर मुख्य बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के पास ही है जिससे श्रद्धालु आसानी से मंदिर तक पहुँच सकते हैं. वहां वाहनों के लिए मेला परिसर में पार्किंग आदि की व्यवस्था भी होती है.

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, मिथुन, कर्क, 
तुला, वृश्चिक, कुम्भ

*कन्या राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

गुरुवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा       रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- शुभ              पहला- अमृत

दूसरा- रोग               दूसरा- चर

तीसरा- उद्वेग             तीसरा- रोग

चौथा- चर                चौथा- काल

पांचवां- लाभ              पांचवां- लाभ

छठा- अमृत               छठा- उद्वेग

सातवां- काल              सातवां- शुभ

आठवां- शुभ              आठवां- अमृत

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ाअपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है! 

पंचांग

गुरुवार, 22 अगस्त 2019 

शीतला सातम *गुजरात

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 13:00:22

मास भाद्रपद

तिथि षष्ठी - 07:08:26 तक

नक्षत्र भरणी - 26:36:27 तक

करण वणिज - 07:08:26 तक, विष्टि - 19:44:27 तक

पक्ष कृष्ण

योग वृद्धि - 17:01:47 तक

सूर्योदय 05:53:44

सूर्यास्त 18:54:07

चन्द्र राशि मेष

चन्द्रोदय 22:59:00

चन्द्रास्त 11:31:59

ऋतु वर्षा

दिशा शूल: दक्षिण में

राहु काल वास: दक्षिण में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पूर्व में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


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