- प्रदीप कुमार द्विवेदी  

धर्म कथानुसार राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नामक नाग के काटने से हुई थी. जन्मजेय जो अर्जुन के पौत्र, परीक्षित के पुत्र थे, ने नागों से बदला लेने और नागवंश के विनाश के लिए नाग यज्ञ किया. नागों की रक्षा के लिए इस यज्ञ को ऋषि जरत्कारु के पुत्र आस्तिक मुनि ने रोका था. 

जब इस यज्ञ को रोका गया उस दिन श्रावण मास की पंचमी तिथि थी इसलिए तब से नाग पंचमी पर्व मनाने की परंपरा शुरू हुई. 

वैसे पौराणिक काल से ही नाग को देवता के रूप में पूजा जाता रहा है. धर्मग्रंथों के अनुसार ब्रह्मा के पुत्र ऋषि कश्यप की चार पत्नियाँ थी. ऐसा माना जाता है कि उनकी पहली पत्नी से देवता, दूसरी पत्नी से गरुड़ और चैथी पत्नी से दानव उत्पन्न हुए, लेकिन उनकी तीसरी पत्नी कद्रू थी, जिनका संबंध नागवंश से था, वहीं से नागों की उत्पत्ति हुई.

ऐसे करें नाग पंचमी पूजा-व्रत

स्थानीय धर्मगुरु के निर्देशानुसार नाग पंचमी की पूजा-व्रत करें क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग पंचमियों को नाग पंचमी मनाई जाती है. 

इस पूजा के आठ नागदेव हैं- अनन्त, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट और शंख, इन अष्टनानागों की पूजा होती है.

चतुर्थी के दिन एक समय भोजन करें और पंचमी के दिन पूजा-कथा करके शाम को भोजन करें.

पूजा करने के लिए यदि नागमंदिर न हो तो मिट्टी की नागमूर्ति, चित्र आदि को प्रतिष्ठित कर पूजा करें.

स्थानीय पूजा विधि से हल्दी, रोली, चावल, फूल आदि चढ़ाएं.

पूजा के बाद कच्चा दूध, घी, चीनी मिलाकर नागदेव को अर्पित करें.

पूजा के बाद नागदेव की कथा सुने, आरती करें.

कथा का उद्ेश्य नाग पंचमी के महत्व को दर्शाना है इसलिए स्थानीय प्रचलित कथा सुने-सुनाएं.

जो व्यक्ति कालसर्प योग के कुप्रभाव की गिरफ्त में हैं वे इस अवसर का सद्उपयोग करें, पूजा करें और संभव हो तो सपेरे के बंधन से किसी सांप को मुक्त करवाएं!

धर्मग्रंथों के अनुसार नाग दो तरह के होते हैं- दिव्य और भौम. इनमें से दिव्य सर्प देवकार्य करते हैं जबकि पृथ्वी पर विचरण करनेवाले विषयुक्त शेष सर्प करीब अस्सी प्रकार के होते हैं. 

ऐसा माना जाता है कि नाग पंचमी के दिन पूजा करने वाले व्यक्ति और उसके परिवार को सर्पभय नहीं होता है.

नाग पंचमी के दिन नागदेव को दूध अर्पित करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है.

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, कर्क, कन्या, 
वृश्चिक, धनु, मीन

*कुम्भ राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें. 

सोमवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा    रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- अमृत           पहला- चर

दूसरा- काल            दूसरा- रोग

तीसरा- शुभ           तीसरा- काल

चौथा- रोग            चौथा- लाभ

पांचवां- उद्वेग        पांचवां- उद्वेग

छठा- चर              छठा- शुभ

सातवां- लाभ         सातवां- अमृत

आठवां- अमृत         आठवां- चर

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है. 

* दिन का चौघडिय़ाअपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ाअपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!   

पंचांग

सोमवार, 5 अगस्त 2019

श्रावण सोमवार व्रत

कल्की जयन्ती

स्कन्द षष्ठी

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 13:25:02

मास श्रावण

तिथि पंचमी - 15:55:50 तक

नक्षत्र हस्त - 23:47:39 तक

करण बालव - 15:55:50 तक, कौलव - 26:39:30 तक

पक्ष शुक्ल

योग सिद्ध - 20:15:11 तक

सूर्योदय 05:44:27

सूर्यास्त 19:09:29

चन्द्र राशि कन्या

चन्द्रोदय 10:07:00

चन्द्रास्त 22:30:00

ऋतु वर्षा

दिशा शूल: पूर्व में

राहु काल वास: उत्तर-पश्चिम में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: दक्षिण में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


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