- प्रदीप कुमार द्विवेदी   

* ज्योतिर्लिंग की स्तुति करें, जीवन में निराशा का अंधकार समाप्त होगा... नई दिशा मिलेगी...

- द्वादशज्योतिर्लिंगस्तोत्र -

सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्.

भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ..1..

भावार्थ- भोलेनाथ अपनी भक्ति प्रदान करने के लिए परम रमणीय सौराष्ट्र क्षेत्र गुजरात में कृपा करके अवतरित हुए हैं. मैं उन्हीं ज्योतिर्मयलिंगस्वरूप, चन्द्रकला को आभूषण बनाए हुए श्रीसोमनाथ की शरण में जाता हूं.

श्रीशैलशृंगे विबुधातिसंगे तुलाद्रितुंगेऽपि मुदा वसन्तम्.

तमर्जुनं मल्लिकपूर्वमेकं नमामि संसारसमुद्रसेतुम् ..2..

भावार्थ- अन्य पर्वतों से ऊंचा, जिसमें देवताओं का समागम होता रहता है. ऐसे श्री शैलश्रृंग में जो प्रसन्नतापूर्वक निवास करते हैं. जो संसार सागर को पार करने के लिए सेतु तुल्य हैं, उन्हीं श्रीमल्लिकार्जुन भगवान् को मैं नमस्कार करता हूँ.

अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम्.

अकालमृत्योः परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम् ..3..

भावार्थ- जो भोलेनाथ संतों को मोक्ष प्रदान करने को अवन्तिकापुरी उज्जैन में अवतार धारण किए हैं, अकाल मृत्यु से बचने के लिए उन देवों के भी देव महाकाल नाम से विख्यात महादेव को मैं नमस्कार करता हूं.

कावेरिकानर्मदयोः पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय.

सदैव मान्धातृपुरे वसन्तमोंकारमीशं शिवमेकमीडे ..4..

भावार्थ- जो भोलेनाथ कावेरी-नर्मदा के पवित्र संगम में स्थित मान्धता नगरी में सदा निवास करते हैं, उन्हीं अद्वितीय ओंकारेश्वर नाम से विख्यात भोलेनाथ की मैं स्तुति करता हूं.

पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने सदा वसन्तं गिरिजासमेतम्.

सुरासुराराधितपादपद्मं श्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि ..5..

भावार्थ- जो भोलेनाथ पूर्वोत्तर दिशा में वैद्यनाथ धाम के अन्दर सदा ही पार्वती सहित विराजमान हैं, देव-दानव जिनके चरणकमलों की आराधना करते हैं, उन्हीं श्रीवैद्यनाथ को मैं प्रणाम करता हूं.

याम्ये सदंगे नगरेतिऽरम्ये विभूषितांगम् विविधैश्च भोगैः.

सद्भक्तिमुक्तिप्रदमीशमेकं श्रीनागनाथं शरणं प्रपद्ये ..6..

भावार्थ- जो भोलेनाथ दक्षिण दिशा में स्थित सदंग नामक नगर में विविध आभूषणों से विभूषित हैं, जो भक्ति-मुक्ति को प्रदान करते है, उन्हीं अद्वितीय श्रीनागनाथ की मैं शरण में जाता हूं.

महाद्रिपार्श्वे च तटे रमन्तं सम्पूज्यमानं सततं मुनीन्द्रैः.

सुरासुरैर्यक्षमहोरगाद्यैः केदारमीशं शिवमेकमीडे ..7..

भावार्थ- जो भोलेनाथ मन्दाकिनी के तट पर स्थित केदारखण्ड नामक श्रृंग में निवास करते हैं, मुनीश्वरों द्वारा हमेशा पूजित हैं, उन्हीं केदारनाथ की मैं स्तुति करता हूं.

सह्याद्रिशीर्षे विमले वसन्तं गोदावरीतीरपवित्रदेशे.

यद्दर्शनात् पातकमाशु नाशं प्रयाति तं त्रयम्बकमीशमीडे ..8..

भावार्थ- जो भोलेनाथ गोदावरी नदी के पवित्र तट पर स्थित स्वच्छ सह्याद्रिपर्वत के शिखर पर निवास करते हैं, जिनके दर्शन से शीघ्र सारे पाप नष्ट हो जाते हैं, उन्हीं त्रयम्बकेश्वर की मैं स्तुति करता हूं.

सुताम्रपर्णीजलराशियोगे निबध्य सेतुं विशिखैरसंख्यैः.

श्रीरामचन्द्रेण समर्पितं तं रामेश्वराख्यं नियतं नमामि ..9..

भावार्थ- जो भोलेनाथ सुन्दर ताम्रपर्णी नामक नदी-समुद्र के संगम में श्रीरामचन्द्र के द्वारा अनेक बाणों से और वानरों द्वारा पुल बांधकर स्थापित किये गए हैं, उन्हीं श्रीरामेश्वर को मैं नियम से प्रणाम करता हूं.

यं डाकिनीशाकिनिकासमाजे निषेव्यमाणं पिशिताशनैश्च.

सदैव भीमादिपदप्रसिद्धं तं शंकरं भक्तहितं नमामि ..10..

भावार्थ- जो भोलेनाथ डाकिनी-शाकिनी समूह में प्रेतों के द्वारा सदैव सेवित होते हैं, उन्हीं भक्तहितकारी भीमशंकर शिव को मैं प्रणाम करता हूं.

सानन्दमानन्दवने वसन्तमानन्दकन्दं हतपापवृन्दम्.

वाराणसीनाथमनाथनाथं श्रीविश्वनाथं शरणं प्रपद्ये ..11..

जो भोलेनाथ काशी में आनन्दपूर्वक निवास करते हैं, जो पाप समूह का नाश करने वाले हैं, ऐसे अनाथों के नाथ काशीपति श्री विश्वनाथ की मैं शरण में जाता हूं.

इलापुरे रम्यविशालकेऽस्मिन् समुल्लसन्तं च जगद्वरेण्यम्.

वन्दे महोदारतरं स्वभावं घृष्णेश्वराख्यं शरणं प्रपद्ये ..12..

भावार्थ- जो भोलेनाथ इलापुर के सुरम्य मंदिर में विराजमान होकर समस्त जगत के आराधनीय हो रहे हैं, मैं उन घृष्णेश्वर की शरण में जाता हूं.

ज्योतिर्मयद्वादशलिंगकानां शिवात्मनां प्रोक्तमिदं क्रमेण.

स्तोत्रं पठित्वा मनुजोऽतिभक्त्या फलं तदालोक्य निजं भजेच्च..13..

भावार्थ- जो भक्त क्रमपूर्वक कहे गये इन बारह ज्योतिर्लिंगों के स्तोत्र का भक्तिपूर्वक पाठ करे तो इनके दर्शन से होने वाले फल को प्राप्त कर सकता है! 

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, मिथुन, कर्क, 
तुला, वृश्चिक, कुम्भ

*कन्या राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

गुरुवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा      रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- शुभ              पहला- अमृत

दूसरा- रोग               दूसरा- चर

तीसरा- उद्वेग            तीसरा- रोग

चौथा- चर                चौथा- काल

पांचवां- लाभ              पांचवां- लाभ

छठा- अमृत              छठा- उद्वेग

सातवां- काल              सातवां- शुभ

आठवां- शुभ              आठवां- अमृत

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है! 

पंचांग

गुरुवार, 25 जुलाई 2019

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 13:38:24

मास श्रावण

तिथि अष्टमी - 19:23:10 तक

नक्षत्र अश्विनी - 17:39:27 तक

करण बालव - 06:49:56 तक, कौलव - 19:23:10 तक

पक्ष कृष्ण

योग धृति - 08:59:39 तक

सूर्योदय 05:38:16

सूर्यास्त 19:16:40

चन्द्र राशि मेष

चन्द्रोदय 24:25:00

चन्द्रास्त 12:45:00

ऋतु वर्षा

दिशा शूल: दक्षिण में

राहु काल वास: दक्षिण में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पूर्व में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


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