- प्रदीप कुमार द्विवेदी

शुभ मुहूर्त को लेकर अक्सर लोग तनाव में रहते हैं और इस कारण से कई बार अच्छे काम न केवल देर से होते हैं बल्कि कई बार खराब भी हो जाते हैं. शुभ मुहूर्त किसी कार्य को प्रारंभ करने के लिए शुभ समय-समूह उपलब्ध करवाता है लेकिन इसमें भी अशुभ क्षण होते हैं. इसी तरह शेष समय-समूह में भी शुभ क्षण होते हैं. इसलिए शुभ मुहूर्त मिल जाए तो उत्तम अन्यथा शुभ संकल्प के साथ कार्य आरंभ करें, शुभ परिणाम ही मिलेंगे. वैसे अभिजीत मुहूर्त ऐसा शुभ समय है जो शुभ मुहूर्त के अभाव में कार्यारंभ के लिए उत्तम मुहूर्त माना जाता है.

जब शुभ कार्य, यात्रा, अक्षरारंभ, विवाह आदि संस्कारों के लिए मुहूर्तों में शुद्ध लग्न नहीं मिल रहा हो, तब सभी शुभ कार्य अभिजीत मुहूर्त में किए जा सकते हैं...यह शुभ कार्यों के लिए उत्तम है...यह मध्याह्न में अष्टम मुहूर्त होता है...अभिजीत मुहूर्त ब्रह्मा के वरदान से सर्वसिद्धिदायक है, लेकिन बुधवार और दक्षिण दिशा की यात्रा के लिए वर्जित है... इस मुहूर्त में विवाह सफल होते हैं, परिवार की सुख-समृद्धि-संतान में वृद्धि होती है. कार्य-व्यवसाय और धन संचय के लिए यह श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है. प्रतिदिन इस समय में व्यवसायिक कार्य जैसे आर्डर- माल लेना, भेजना, धन जमा करना- सेविंग आदि किए जा सकते हैं. ईएमआई भरना आदि भी इस समय में करने से जल्दी कार्य सम्पन्न होते हैं, ऋणमुक्ति मिलती है!

किसी भी कार्य को शुभ समय में शुरू करने का इतना ही लाभ होता है उस कार्य के दौरान कम से कम बाधाएं आती हैं और परिणाम शुभ मिलने की उम्मीद रहती है लेकिन वास्तविक परिणाम तो व्यक्तिगत सद्कर्म और भाग्य पर ही निर्भर रहता है. सद्कर्म और प्रयास के बगैर शुभ मुहूर्त और भाग्य अर्थहीन हो जाते हैं जैसे प्रकाश के बगैर छाया का अस्तित्व नहीं रहता है! जब भाग्य कमजोर हो तो पवित्र प्रार्थना के साथ शुभ मुहूर्त में शुभ कर्म आरंभ करें, कामयाबी मिलेगी. 

भाग्य महज कर्म की कामयाबी का प्रतिशत तय करता है इसलिए भाग्य से जीतने के लिए अधिकाधिक शुभ कर्म करें.

अभिजीत मुहूर्त में कार्यारंभ करते समय सफलता के लिए पवित्र मन से ब्रह्मा देव से प्रार्थना करें, संभव हो तो कार्य की सफलता के पश्चात ब्रह्मा देव के दर्शन करें. देश में ब्रह्मा मंदिर बहुत कम हैं. प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिरों में अजमेर के पास पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर है तो राजस्थान में ही बांसवाड़ा के पास छींच में प्राचीन ब्रह्मा मंदिर है. 

पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में वर्षभर भक्त दर्शनार्थी आते हैं तो छींच के ब्रह्मा मंदिर परिसर में वर्षभर विविध धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं.

पुष्कर तीर्थ में देवी सावित्री के श्राप के कारण वहां के सरोवर की तो पूजा होती है लेकिन ब्रह्मा की पूजा नहीं होती. बस! श्रद्धालु दूर से ही दर्शन-प्रार्थना कर लेते हैं. हर साल कार्तिक महीने की एकादशी से पूर्णिमा तक यहां मेले का आयोजन होता है. ब्रह्मा देव ने इस जगत की रचना की, विष्णु देव इस जगत का पालन करते हैं और भगवान शिव, दुनिया के पथभ्रष्ट हो जाने पर नवनिर्माण हेतु विनाश करते हैं. देश-विदेश में भगवान ब्रह्मा के मंदिर के कारण पुष्कर की अलग पहचान है. ब्रह्मा के चार हाथ हैं तथा इन हाथों में चार वेद हैं. 

पुष्कर के इस ब्रह्मा मंदिर का धम्रग्रथों में उल्लेख मिलता है. इनमें कहा गया है कि- ब्रह्मा इस जगह पर दस हजार सालों तक रहे थे. इन दस हजार सालों में यहां रहकर उन्होंने संपूर्ण सृष्टि की रचना की थी! 

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, कर्क, सिंह, 

वृश्चिक, मकर, मीन

*मिथुन राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

गुरुवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा    रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- शुभ           पहला- अमृत

दूसरा- रोग            दूसरा- चर

तीसरा- उद्वेग         तीसरा- रोग

चौथा- चर            चौथा- काल

पांचवां- लाभ          पांचवां- लाभ

छठा- अमृत           छठा- उद्वेग

सातवां- काल          सातवां- शुभ

आठवां- शुभ          आठवां- अमृत

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है! 

पंचांग

गुरुवार, 18 जुलाई 2019

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 13:45:28

मास श्रावण

तिथि द्वितीया - पूर्ण रात्रि तक

नक्षत्र श्रवण - 25:34:19 तक

करण तैतिल - 17:52:45 तक

पक्ष कृष्ण

योग प्रीति - 28:25:35 तक

सूर्योदय 05:34:27

सूर्यास्त 19:19:55

चन्द्र राशि मकर

चन्द्रोदय 20:32:00

चन्द्रास्त 06:35:59

ऋतु वर्षा

दिशा शूल: दक्षिण में

राहु काल वास: दक्षिण में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: दक्षिण में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


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