सियासत. कमाल है, एक राज्य एक चुनाव तो हो नहीं पा रहे हैं और एक देश एक चुनाव की चर्चा हो रही है. एक तरफ तो गुजरात में राज्यसभा की दो सीटों के लिए अलग-अलग उपचुनाव कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा है और दूसरी तरफ पीएम नरेन्द्र मोदी एक देश, एक चुनाव पर सर्वसम्मति बनाने की कवायद कर रहे हैं.

खबर है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की अपील को 25 जून के लिए सूचीबद्ध करते हुए कहा है कि इस मुद्दे को सुने जाने की जरूरत है. अब चुनाव आयोग को 24 जून तक अपना जवाब देना होगा.

उल्लेखनीय है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के गांधीनगर सीट से और स्मृति ईरानी के अमेठी सीट से लोकसभा पहुंचने के बाद गुजरात से राज्यसभा की दो सीटें खाली हो गई हैं. लोकसभा चुनाव के बाद नई बीजेपी सरकार में अमित शाह और स्मृति ईरानी को मंत्री बनाया गया है.

यदि दोनों सीटों के लिए एकसाथ चुनाव होते हैं तो नतीजे कुछ और हो सकते हैं, लिहाजा अमरेली से कांग्रेस विधायक और गुजरात विधानसभा में विपक्ष के नेता परेशभाई धनानी ने कोर्ट में याचिका दायर कर दोनों उपचुनाव साथ कराने का निर्देश चुनाव आयोग को देने का आग्रह किया है.

उधर, चुनाव आयोग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार दोनों सीटों के लिए चुनाव पांच जुलाई को ही होने हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्यसभा सहित दोनों सदनों की सभी रिक्तियों पर उपचुनाव के लिए उन्हें अलग-अलग रिक्तियां माना जाएगा और अधिसूचना भी अलग-अलग जारी की जाएगी. यही नहीं, चुनाव भी अलग-अलग होंगे, अलबत्ता इनका कार्यक्रम समान हो सकता है.

परेशभाई धनानी ने अपनी याचिका में निर्वाचन आयोग के आदेश को असंवैधानिक और गैरकानूनी घोषित करते हुये इसे रद्द करने का आग्रह किया है. उन्होंने निर्वाचन आयोग को उपचुनाव एकसाथ कराने और गुजरात सहित सभी प्रदेशों में सारी रिक्त सीटों के लिये साथ में चुनाव कराने का निर्देश देने का आग्रह किया है. गुजरात विधानसभा के 182 सदस्यों में से बीजेपी के 100 और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष के 75 सदस्य हैं, जबकि सात स्थान रिक्त हैं. यदि चुनाव अलग-अलग होते हैं तो बीजेपी फायदे में रहेगी.

उधर, लोकसभा चुनाव के साथ ही सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव कराने के मुद्दे पर पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा संसद भवन परिसर में सर्वदलीय बैठक बुलायी गयी, जिसमें संसद में प्रतिनिधित्व रखने वाले सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को बुलाया गया था, हालांकि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी आदि ने इसमें हिस्सा नहीं लिया.

एक देश, एक चुनाव, अच्छी सोच है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इसे देशहित के नजरिए से देखा जा रहा है कि दलहित के नजरिए से देखा जा रहा है. जब इधर एक देश, एक चुनाव की बात हो रही है, तो उधर गुजरात में दूसरी तस्वीर क्यों?

दरअसल, दोनों ही सोच दलहित से ज्यादा जुड़ी हैं. यदि गुजरात में राज्यसभा के लिए चुनाव अलग-अलग होते हैं तो बीजेपी को फायदा है और एक देश, एक चुनाव होते हैं, तब भी बीजेपी का ही फायदा है!

एक देश, एक चुनाव में जीत दर्ज कराने के लिए किसी भी दल की आर्थिक स्थिति अच्छी होनी चाहिए और उसके संगठन का जमीनी आधार मजबूत होना चाहिए. इन पैमानों पर इस वक्त देश में केवल बीजेपी ही सक्षम है, लिहाजा गैर-बीजेपी दलों का इसके लिए राजी होना सियासी आत्महत्या जैसा है. देश को मजबूत केन्द्र सरकार चाहिए, परन्तु सशक्त प्रजातंत्र के लिए मजबूत विपक्ष भी जरूरी है!

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