साइनस नाक में होने वाला एक रोग है. इस रोग में नाक की हड्डी भी बढ़ जाती है या तिरछी हो जाती है, जिसकी वजह से सांस लेने में परेशानी होती है. जो व्यक्ति इस रोग से ग्रसित होता है उसे ठंडी हवा, धूल, धुआं आदि में परेशानी महसूस होती है. 

साइनस दरअसल मानव शरीर की खोपड़ी में हवा भरी हुई कैविटी होती है, जो हमारे सिर को हल्कापन व श्वास वाली हवा लाने में मद्द करती है. श्वास लेने में अंदर आने वाली हवा इस थैली से होकर फेफड़ों तक जाती है. यह थैली, हवा के साथ आई गंदगी यानि धूल और दूसरी तरह की गंदगियों को रोकती है. जब व्यक्ति के साइनस का मार्ग रूक जाता है, तो बलगम निकलने का मार्ग भी रूक जाता है, जिससे साइनोसाइटिस नामक बीमारी होती है.

साइनस का संक्रमण होने पर इसकी झिल्ली में सूजन आ जाती है, जिसके कारण झिल्ली में जो हवा भरी होती है उसमें मवाद या बलगम आदि भर जाता है और साइनस बंद हो जाते हैं. ऐसा होने पर मरीज को परेशानी होनी लगती है. 
 
डॉ. विवेक वर्मा ने बताया कि इस बीमारी का मुख्य कारण झिल्ली में सूजन का आना है. यह सूजन निम्न कारणों से आ सकती है - 

1 बैक्टीरिया

2 फंगल संक्रमण

3 या फिर नाक की हड्डी का ढ़ेडा होना. 

साइनस के यह 9 प्रमूख लक्षण - 

1 सिर का दर्द होना

2 बुखार रहना

3 नाक से कफ निकलना और बहना

4  खांसी या कफ जमना

5 दांत में दर्द रहना

6  नाक से सफेद हरा या फिर पीला कफ निकलना

7 चेहरे पर सूजन का आ जाना

8  कोई गंध न आना

9 साइनस की जगह दबाने पर दर्द का होना आदि इसके लक्षण हैं. 

जांच - वैसे तो साइनस की समस्या कोई गंभीर बीमारी नहीं है, लेकिन समय रहते इसका इलाज नही कराया गया तो मरीज को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. डॉ. विवेक वर्मा के अनुसार मरीज को यह बीमारी है या नहीं, यह जानने के लिए सि‍टी स्कैन या एमआरआई के अलावा साइनस के अन्य कारणों को लेकर खून की जांच भी की जाती है, जिससे हमें बीमारी होने का ठोस कारण पता चल सके.  

इलाज - अगर सिटी स्कैन व एलर्जी टेस्ट आदि करवाकर यदि नाक की हड्डी एवं साइनस की बीमारी सामने आती है, तो उस मरीज को घबराने की जरूरत नहीं है. आज कल इसका ऑपरेशन दूरबीन विधि से या फिर नाक की इंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी करा सकते हैं. साइनस से ग्रसित व्यक्तियों को धुंए और धूल से बचना चाहिए. साथ ही साथ आप उबलते हुए पानी की भाप या सिकाई भी कर सकते हैं, इस दौरान पंखा और कूलर भी बंद कर लें.  अगर समय रहते इसका इलाज नहीं कराया गया तो बाद में अस्थमा और दमा जैसे कई गंभीर रोग भी हो सकते है. 

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