अर्थराइटिस जोड़ों में होने वाली एक बहुत ही आम बीमारी है. इस बीमारी में जोड़ों में दर्द होता है और जोड़ों को घुमाने, मोड़ने, हिलाने और हरकत करने में परेशानी होती है. विशेषज्ञों का मानना है कि एक सौ से भी अधिक किस्म के अर्थराइटिस होते हैं. अर्थराइटिस से व्यक्ति की रोज़मर्रा की जीवनशैली बुरी तरह प्रभावित होती है. यह जीवन भर सताने वाली बीमारी होती है. बीमारी अधिक बढ़ने पर मरीज के जोड़ों में असहनीय पीड़ा होती है और हाथ–पांव हरकत करना तक बंद कर देते हैं.

अर्थराइटिस के प्रकार

रूमेटॉयड अर्थराइटिस : यह इस बीमारी का बहुत अधिक पाया जाने वाला गंभीर रूप है. इस अर्थराइटिस का समय पर प्रभावी उपचार करवाना आवश्‍यक होता है वरना बीमारी बढ़ने पर एक साल के अन्दर ही शरीर के जोड़ों को काफी नुकसान हो जाता है.

सोराइटिक अर्थराइटिस : अर्थराइटिस के दर्द का यह रूप सोराइसिस के साथ प्रकट होता है. समय पर और सही इलाज न होने पर यह बीमारी काफी घातक और लाइलाज हो जाती है.

ओस्टियोसोराइसिस : इस तरह का अर्थराइटिस आनुवांशिक हो सकता है. यह उम्र बीतने के साथ प्रकट होता है. यह विशेष रूप से शरीर का भार सहन करने वाले अंगों पीठ, कमर, घुटना और पांव को प्रभावित करता है .

पोलिमायलगिया रूमेटिका : यह 50 साल की आयु पार कर चुके लोगों को होता है. इसमें गर्दन, कंधा और कमर में असहनीय पीड़ा होती है और इन अंगों को घुमाने में कठिनाई होती है. अगर सही समय पर सही इलाज हो तो इस बीमारी का निदान किया जा सकता है. लेकिन कई कारणों से आमतौर पर इसका इलाज संभव नहीं हो पाता है.

एनकायलाजिंग स्पोंडिलाइटिस : यह बीमारी सामान्यत: शरीर के पीठ और शरीर के निचले हिस्से के जोड़ों में होती है. इसमें दर्द हल्‍का होता है लेकिन लगातार बना रहता है. इसका उपचार संभव हैं लेकिन सही समय पर इसकी पहचान कर सही इलाज किया जाए जा सकता है. 

रिएक्टिव अर्थराइटिस : शरीर में किसी तरह के संक्रमण फैलने के बाद रिएक्टिव अर्थराइटिस होने का खतरा रहता है. आंत या जेनिटोरिनैरी संक्रमण होने के बाद इसके होने की संभावना बढ़ जाती है. इसमें सही इलाज काफी कारगर साबित होता है.

गाउट या गांठ : गांठ वाला अर्थराइटिस जोड़ों में मोनोसोडियम युरेट क्रिस्टल के समाप्‍त होने पर होता है. भोजन में बदलाव और कुछ सहायक दवाओं के कुछ दिन तक सेवन करने से यह बीमारी ठीक हो जाती है.

सिडडोगाउट : यह रूमेटायड और गाउट वाले अर्थराइटिस से मिलता जुलता है. सिडडोगाउट में जोडों में दर्द कैल्शियम पाइरोफासफेट या हाइड्रोपेटाइट क्रिस्टल के जोड़ों में जमा होने से होता है.

सिस्टेमिक लयूपस अर्थिमेटोसस : यह एक ऑटो इम्यून बीमारी है जो जोड़ों के अलावा शरीर के त्वचा और अन्य अंगों को प्रभावित करती है. यह बच्चे पैदा करने वाली उम्र में महिलाओं को होती है. वैसे तो यह जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाली बीमारी है लेकिन समय पर इसकी पहचान कर इसे नियंत्रण में रखा जा सकता है

उपचार 

अर्थराइटिस के उपचार का सबसे अच्छा तरीका है कि बीमारी का पता चलते ही चिकित्सा शुरू कर दी जाये.

ऐसे में चिकित्सा के दौरान वज़न बढ़ना आपके स्वास्य्री के लिए नुकसानदायी हो सकता है.

दवाओं और सर्जरी के बाद कुछ लोग आसानी से सामान्य जीपन जीने में सफल होते हैं.

चलने, उठने, बैठने की सही मुद्रा का पालन करें.

अर्थराइटिस के मरीजों के लिए टहलना एक अच्छा व्यायाम हो सकता है.

अधिक देर तक एक ही स्थिति में ना बैठे रहें.

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


1. RBI के खिलाफ आजादी के बाद पहली बार सरकार ने किया विशेष शक्ति का इस्तेमाल

2. CM योगी का राम मंदिर पर बड़ा बयान- धैर्य रखें, दिवाली पर खुशखबरी दूंगा

3. मध्यप्रदेश स्थापना दिवस विशेष...देखें हैं रंग हजार

4. न्यूनतम वेतन पर 'आप' की जीत, दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर SC ने लगाई रोक

5. सार्वजनिक वाहनों में अब जरूरी होगा लोकेशन ट्रेकिंग एवं आपात बटन

6. 50 पैसे का ये दुर्लभ सिक्का आपको दिला सकता है 51 हजार 500 रुपए, जानें कैसे

7. ईज ऑफ डुइंग बिजनेस: भारत 23 पायदान की छलांग लगा 100 से पहुंचा 77 वें स्थान पर

8. दिवाली पर घर जाने के लिए ऐसे कराएं कन्फर्म तत्काल टिकट

9. MeToo:HC ने खारिज की छानबीन के लिए निर्देश की मांग वाली याचिका

10. भारत में आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने एक दशक में 10 करोड़ नए रोजगार की जरूरत

11. मंगलनाथ की भात पूजा सहित इन उपायों से कर्ज संकट कम होता

************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।