तलाक कितने प्रकार के होते हैं

हमारे देश में तलाक दो तरह से लिया जा सकता है. एक तो आपसी सहमति से और दूसरा तरीका संघर्ष पूर्वक होता है .यानी कि इस तलाक में एक पक्ष  तलाक लेना चाहते हैं. और दूसरे पक्ष  नहीं लेना चाहता है. और अगर हम बात करें इन दोनों तलाक में आसान कौन सा है. तो भारत में आपसी सहमति से तलाक लेने मैं बहुत ही आसानी होती है.अगर दोनों पक्ष सहमत है. तो बहुत ही आसानी से तलाक ले सकते हैं इसके लिए दोनों पक्ष जैसे पति और पत्नी दोनों इस बात के लिए सहमत होने चाहिए.

कि हम दोनों अलग हो रहे हैं. और हमें तलाक चाहिए और जब भी तलाक होता है तो उसमें दो चीजें जरूर सामने आती है. गुजारा भत्ता या और बच्चों की देखरेख यह दोनों बातें बहुत ज्यादा देखी जाती है. और आपने किसी भी फिल्म TV सीरियल या किसी दूसरी चीज में देखा भी होगा कि जब कोर्ट में किसी का तलाक होता है. तो सुनवाई के दौरान गुजारे भत्ते और बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी माता पिता में से किसी एक को दी जाती है लेकिन गुजारा भत्ता सिर्फ पति को ही देना पड़ता है.

गुजारा भत्ता

हमारे देश में गुजारे भत्ते की कोई सीमा तय नहीं की गई है और गुजारे भत्ते के लिए दोनों पक्ष पति और पत्नी एक साथ बैठकर फैसला कर सकते हैं कि उनको कितना गुजारा भत्ता चाहिए या उसको कितना गुजारा भत्ता वह पति दे सकता है.लेकिन कोर्ट पति की आर्थिक स्थिति और आए या उसकी कमाई को देखकर गुजारे भत्ते का फैसला करता है.

पति की आर्थिक स्थिति यानी उसकी कमाई जितनी भी ज्यादा होगी उतनी ही ज्यादा उतना ही ज्यादा गुजारा भत्ता उसको अपनी पत्नी को देना होगा.फिल्म या TV सीरियल में भी देखा होगा कि जब कोर्ट में केस चलता है तो जिन लोगों का तलाक होता है उसमें पति को अपनी पत्नी के गुजारे के लिए पैसे देने होते हैं और वह कोर्ट तय करता है. कि कितने पैसे पति को हर महीने पत्नी को देने होंगे लेकिन कोर्ट यह भी ध्यान में रखता है कि पति की मासिक आय कितनी है.

बच्चों की जिम्मेदारी

और दूसरी सबसे बड़ी समस्या यह सामने आती है कि जब आप का तलाक हो रहा है और उसमें आपकी कोई एक या दो बच्चे हैं तो उन बच्चों की जिम्मेदारी कौन लेगा और यह एक गंभीर समस्या होती है. लेकिन यदि दोनों पक्ष माता और पिता दोनों उन बच्चों की देखरेख करना चाहते हैं. तो यह उन दोनों की मानसिक सोच के ऊपर निर्भर होता है. इसके लिए उनको कोर्ट के द्वारा जॉइंट कस्टडी दे दी जाती है. शेयर चाइल्ड कस्टडी चाहते हैं. या फिर उन दोनों में से कोई एक इस जिम्मेदारी को लेना चाहता है.

और वैसे अगर देखा जाए तो 7 साल के कम उम्र के बच्चों की देखरेख कोर्ट मां को सौंपता है. और 7 साल से ऊपर की आयु के बच्चों को उनकी देखरेख के लिए पिता के पास भेजा जाता है. लेकिन कई बार दोनों ही पक्ष इस बात के लिए राजी नहीं होते और दोनों ही पक्ष अपने बच्चों को अपने पास रखना चाहते हैं. लेकिन यदि मां को बच्चे की देखरेख की जिम्मेदारी कोर्ट द्वारा दी गई है. और यदि उन बच्चों का बाप यह साबित कर दे कि मां बच्चों की सही देखरेख नहीं कर रही है. तो 7 साल के कम उम्र के बच्चों की देखरेख के लिए भी कोर्ट बच्चों को उसके पिता को सौंप देगा.

आपसी सहमति से तलाक के लिए कैसे फाइल दाखिल करें

जैसे कि मैंने आपको ऊपर बताया है. हमारे देश में आपसी सहमति से तलाक लेना बहुत ही आसान है. सबसे पहले आप के लिए यह जरूरी होता है कि आप अगर तलाक लेना चाहते हैं. तो उससे पहले 1 साल पहले दोनों अलग रहते हो उसके बाद आप केस दायर कर सकते हैं तो इसके लिए फिर आपको कुछ जरूरी चीजें करनी होती है. जैसे

1.सबसे पहले आप दोनों पक्षों को पति और पत्नी को कोर्ट में एक याचिका दायर करनी पड़ती है. जिसमें लिखना होता है हम दोनों आपसी सहमति से तलाक लेना चाहते हैं.

2.फिर उसके बाद दोनों पक्षों के बयान जैसे पति और पत्नी दोनों के बयान कोर्ट में रिकॉर्ड किए जाते हैं. और पेपर पर साइन भी कराए जाते हैं उसके बाद आप का तलाक मान्य होता है.

3.जब आप कोर्ट में याचिका दायर करते हैं तो उसके बाद आपको कोर्ट 6 महीने का समय देती है. कि आप दोनों के पास अभी समय है और आप आपसी सहमति से अपने साथी के साथ रह सकते हैं. और आप सोच समझकर फैसला करें कि आपको दोनों को अलग होना है. और कोर्ट चाहती है. कि वह अपने रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए समय दें ताकि उनका तलाक ना हो

बिना सहमति के तलाक

अगर तलाक लेने के लिए दोनों पक्ष सहमत ना हो तो क्या होता है. यानी कि अगर दोनों पक्ष में से एक पक्ष तलाक लेना चाहता हो और एक पक्ष तलाक नहीं लेना चाहता हो तो उसके लिए एक पक्ष को दूसरे पक्ष से बहस करनी पड़ेगी और यह तलाक भारत में आप तभी लड़ सकते हैं. जब आपके साथी के साथ आपके साथ झगड़ा करता हो आप को प्रताड़ित करता हो या आपका साथी आपको छोड़ देता है. या आपको किसी तरह की शारीरिक या मानसिक तरह से प्रताड़ित किया जाता है.

या आपके साथी की मानसिक स्थिति खराब हो या नपुंसक जैसी स्थिति फोन तो यानी कि उसके साथ जिस भी बात के कारण साथ रहना मुश्किल हो जाएगा साथ नहीं रह पाना तो उस स्थिति में आप संघर्ष चला कर सकते हैं.इस केस को लड़ने के लिए सबसे पहले जो पक्ष तलाक चाहता हो उसे कोर्ट में एक याचिका दायर करनी होती है. और साथ में यह सबूत भी दिखाने होते हैं. कि वह सच में तलाक का हकदार है. यानी  उसको अपने साथी के द्वारा प्रताड़ित जाने या उसके साथ मारपीट किए जाने या उसके साथ कुछ दूसरी घटनाएं किए जाने का सबूत है उसको कोर्ट में दिखाना होता है.

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