पलपल संवाददाता, जबलपुर. विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार के चले जाने का कष्ठ शायद सबसे ज्यादा विद्युत मंडल के अधिकारियों को ही हुआ है, जिन्होने कमलनाथ सरकार के आने के बाद से ही बिजली की आंख मिचौली शुरु कर दी है. यह चर्चा आम हो चुकी है, आम आदमी यह कहने के लिए मजबूर हो गया है कि कहीं विद्युत मंडल के उच्चाधिकारी कोई साजिश तो नहीं कर रहे है कमलनाथ सरकार के खिलाफ, क्योंकि बिजली गुल होते ही आमआदमी यही कहता है कि आ गई है कांग्रेस की सरकार. बताया जाता है कि प्रदेश में 15 वर्षो तक शिवराज सरकार में अपनी अपनी जगह पर सेट हो चुके विद्युत मंडल के अधिकारियों ने एक तरफ सत्ता का सुख भोगा, शिवराज सरकार के मंत्रियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक को सुविधाएं प्रदान करके अपनी कुर्सी का भरपूर उपयोग कर सुख भोगा, जिन्हे यह उम्मीद कतई नहीं थी कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होगा, विधानसभा चुनाव के वक्त भी शिवराज सरकार को सत्ता में लाने के लिए आमजनता को हर सुविधा दी, इसके बाद भी मतदाता ने शिवराज सरकार को सत्ता से हटा दिया और काबिज हो गई कमलनाथ सरकार, जिसके काबिज होते हुए अधिकारिक स्तर पर तबादलों की बाढ़ सी गई, जिसमें हर विभाग प्रभावित हुआ, यह कोई नई बात नहीं थी, यह तो एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जब भी कोई सरकार आती है तो तबादले होते ही है तो वह हुए.

इन तबादलों से सबसे ज्यादा कष्ठ मध्यप्रदेश विद्युत मंडल के अधिकारियों को ही हुआ है, यह बात आम आदमी इसलिए भी कह रहा है कि  शिवराज सरकार में प्रदेश में आमजनता से लेकर किसानों तक को भरपूर बिजली दी गई लेकिन सरकार के बदलते हुए बिजली की समस्या खड़ी होने लगी, पूरे प्रदेश में बिजली गुल की जाने लगी, जिससे हर तरफ हा-हा कार मचने लगा, कमलनाथ सरकार तक जब इस बात की खबर पहुंची तो बैठकें बुलाई गई, अधिकारियों से चर्चा की गई लेकिन सबकुछ बेमानी सा रहा, बिजली की आंख मिचौली आज भी जारी है जबकि प्रदेश में सरप्लस बिजली है, फिर भी कटौती की बात आमजन के समझ से परे हो गई. जिसे लेकर यही कहा जाने लगा है कि विद्युत मंडल में उच्च पदों पर आसीन अधिकारियों की कमलनाथ सरकार के खिलाफ यह साजिश तो नहीं जिसका असर आने वाले नगरीय निकाय के चुनाव में देखने को मिल सकता है, क्योंकि आने वाले दिनों में नगरीय निकाय के चुनाव है और प्रदेश में ऐसे ही हालात रहे तो निश्चित ही इसका असर कांग्रेस पर पड़ेगा. गौरतलब है कि प्रदेश में जब दिग्विजयसिंह सरकार रही तब परीक्षाओं के मौके पर भी बिजली गुल गई, जिसका असर विधानसभा चुनाव में देखने को मिला और जनता ने सरकार को सत्ता से हटा दिया और वर्तमान में ही ऐसे ही कुछ हालात पैदा किए जा रहे है जिससे इसका सीधा प्रभाव आने वाले नगरीय निकाय के चुनाव में पड़ सकता है.   आज प्रदेश भीषण गर्मी की चपेट में हर तरफ हा-हा कार मचा हुआ है, ऐसे में बिजली का गुल होना, कहीं न कहीं आमजनता की तकलीफों को बढ़ाने में मददगार ही साबित हो रहा है. 

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