पलपल संवाददाता, जबलपुर. पूर्णायु आयुर्वेद चिकित्सालय एवं अनुसंधान विद्यापीठ, श्री दिगम्बर जैन संरक्षिणी सभा, प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ व दयोदय तीर्थ तिलवाराघाट के तत्वावधान में शुक्रवार को दयोदय तीर्थ में आयुर्वेद के विशेषज्ञों की संगोष्ठी सम्पन्न हुई. इस दौरान आयुर्वेद के विशेषज्ञों ने एकस्वर में कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सा के साथ-साथ अनुंसाान का लक्ष्य सराहनीय है. वहीं आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने कहा कि यंत्र से अधिक आयुर्वेद के मंत्रों पर विश्वास ही पूर्णायु का मूलाधार है.

दयोदय तीर्थ से जुड़े संदेश जैन, चक्रेश मोदी, आनंद सिंघई, अमित पडरिया, अशोक जैन, मल्ल कुमार जैन, नीरज जैन व कमलेश कक्का सहित अन्य ने आयुर्वेद के विशेषज्ञों का सम्मान किया. इस दौरान प्रो.करतार सिंह, महानिदेशक अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली, प्रो.एसबी मिश्र, वाराणसी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति, प्रो.एमएस बघेल, पूर्व कुलपति जयपुर विश्वविद्यालय, पद्मश्री वैद्य बालेन्दु प्रकाश, देहरादून, प्रो.यूएस निगम, मुंबई, प्रो.कामिनी धीमान, नईदिल्ली, प्रो.कमलेश शर्मा, जयपुर, प्रो.रवि नारायण प्रजापति, जामनगर, डॉ.संजय झाजड़े, पुणे, डॉ.साधना बावेल, पुणे, प्रो.रवि श्रीवास्तव, जबलपुर, डॉ. बीजी उदयकुमार, केरल, डॉ.नितिन अग्रवाल, नोयडा, डॉ.अनुज जैन, ग्वालियर, प्रो. प्रदीप नरागोलकर पुणे, ब्रह्मचारी रोहित और ब्रह्मचारी आशीष ने अपने उद्बोधन से आयुर्वेद के संबंध में मूलभूत प्रकाश डाला.

किडनी रोगी को मिला आयुर्वेद से लाभ

ब्रह्मचारी रोहित ने संगोष्ठी में मौजूद किडनी रोगी अर्चना जैन से परिचय कराया, जिन्होंने एलोपैथिक इलाज में 4 लाख खर्च करने के बाद आयुर्वेद का सहारा लिया और अब वे स्वस्थ हैं. उन्होंने दयोदय चल-चरखा से निर्मित लपेट के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी, जिसका उपयोग करके शुगुर का स्तर कंट्रोल किया जा सकता है.

जड़ी-बूटियों की शुद्वता पर दिया गया बल- डॉ.नितिन अग्रवाल, नोयडा ने आयुर्वेद में प्रमाणिकता के अधिकाधिक समावेश पर जोर दिया. उन्होंने पंचकर्म केन्द्रों में साफ-सफाई की आवश्यकता भी निरूपित की.

विशेषज्ञता को शामिल करने का सुझाव- डॉ.अनुज जैन, ग्वालियर ने आयुर्वेद की चिकित्सा में विशेषज्ञता को शामिल करने का महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में न्यूरो, किडनी, कार्डियो आदि के पृथक विभाग होने चाहिए.

कैंसर की ग्रंथी निकालने में आयुर्वेद समर्थ- प्रो.प्रदीप नरागोलकर, पुणे ने संगोष्ठी में अपना निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए बताया कि कैंसर की ग्रंथी तक आयुर्वेद से निकालने में उन्होंने महारत हासिल कर ली है.

आचार्यश्री ने नीबू को नेत्रों के लिए अमृत बताया- आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने कहा कि नीबू का रस बिना लौह के संपर्क में आए यदि नेत्रों में चंद बूंद डाला जाए तो आंखों को बहुत फायदा होता है. अन्त में नवविवाहित विनोद सिसोदिया व अलका सिसोदिया को आशीष दिया गया आज देश भर से पधारे राजवैद्य ने प्रात: राजवैद्य की पोशाक धारण कर आचर्य श्री से आशीष प्राप्त किया.

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