एंटी कैंसर ड्रग्स बहुत से अलग–अलग सम्मिलन के साथ आते हैं और आनकोलाजिस्ट नामक विशेषज्ञ इनसे अलग–अलग तरीके से चिकित्सा करते हैं. कैंसर के सेल्स अलग–अलग तरीके से बढ़ते हैं, इसलिए कीमोथेरेपी के अलग–अलग सम्मेलन कैंसर के सेल्स को बढ़ने से रोकने में प्रभावी होते हैं. हर व्यक्ति में कैंसर ठीक होने व फैलना मरीज के स्थिति पर निर्भर करता है.

कीमोथेरेपी सामान्यत: वेन्स के द्वारा दिये गये ड्रग्स के लिए की जाती है क्योंकि अधिकतर लोग इन्ट्रावेनस इन्फ्यूजन की प्रक्रिया के द्वारा एंटी कैंसर ड्रग्स लेते हैं. एक बैग जिसमें कि तरल ड्रग्स /दवा भरी होती है उसे एक ट्यूब से जोड़ देते हैं जिसे फिर वेन्स से जोड़ा जाता है. यह ड्रग्स धीरे–धीरे मरीज के शरीर में फैल जाता है. एंटी  कैंसर ड्रग्स को इंजेक्शन या दवाइयों के रूप में भी लिया जा सकता है. कीमोथेरेपी के ड्रग्स शरीर के सभी भाग में फैल जाते हैं. इस प्रक्रिया को सिस्टमिक थेरेपी कहते हैं, क्योंकि कीमोथेरेपी से सूक्ष्म कैंसर के सेल्स भी निकल जाते हैं जो कि एक्स–रे या दूसरे प्रकार की जांच से भी नहीं दिखते.
कीमोथेरेपी को वेन्स के द्वारा दिये जाने पर कैंसर के उन सेल्स को खत्म करने में आसानी होती है जो कि कैंसर के मूल स्थान से फैल चुके होते हैं. दिमाग की बनावट के कारण और जांच के दौरान ऐसा जरूरी नहीं है कि कीमोथेरेपी सभी टिश्यूज तक पहुंच जाये. जल्दी इस्तेमाल किये गये चिकित्सा के कार्यक्रम के लिए कैंसर के सेल्स को खत्म करने की प्रक्रिया में दो जगह का खास ख्याल रखना होता है, टेस्टिस और दिमाग क्योंकि इन पर कीमोथेरेपी ड्रग्स बहुत कम स्तर पर प्रभावित होता है. इन जगहों पर कैंसर की चिकित्सा के लिए दूसरी तकनीक के इस्तेमाल की जरूरत होती है.

दुर्भाग्यवश कैंसर कीमोथेरेपी के एजेंट्स कैंसर के सेल्स के लिए निश्चित नहीं होते हैं. इसका अर्थ है कि एण्टी कैंसर ड्रग्स एक कैंसर सेल्स से ज्यादा सेल्स को प्रभावित करते हैं. इससे सामान्य स्वस्थ सेल्स की भी क्षति होती है. मुख्यत: वो सेल्स‍ जो कि मुंह की लाइनिंग बनाते हैं, पाचन तंत्र के किनारे बनाते हैं, बोन मैरो के अंदर रक्त के सेल्स बनाते हैं और बालों के फालिकल्स को भी प्रभावित करते हैं.

इसी कारण से जिन मरीजों की कीमोथेरेपी की जाती है उनके मुंह में घाव, पेट में परेशानी, बालों का झड़ना और कमज़ोरी जैसी समस्या होती है. कीमोथेरेपी का एक सामान्य अतिरिक्त प्रभाव है किसी भी प्रकार के संक्रमण से जल्दी प्रभावित होना क्योंकि कीमोथेरेपी से बोन मैरो में रक्ते के सेल्सी का बनना कम हो जाता है. जब व्हाइट ब्‍लड सेल्स की गिनती कम हो जाती है तो शरीर बैक्टीरिया, वायरस और दूसरे कीटाणुओं से लड़ने की क्षमता खो देता है. यह संक्रमण बहुत गंभीर भी हो सकते हैं. संक्रमण का खतरा तब कम होता है जब व्हाइट ब्लड सेल्स की मात्रा सामान्य हो जाती है.

हमारे शरीर का बोन मैरो (ब्लड क्लाटिंग) रक्त के जमने के लिए भी विशेष सेल बनाता है. कीमोथेरेपी इन सेल्स को भी प्रभावित कर सकता है जिससे रक्त के बहने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में इस्तेमाल किये जाने वाले सेल्स को प्लेटलेट्स कहते हैं. जैसे–जैसे कीमोथेरेपी का प्रभाव बोन मैरो पर कम होता जाता है रक्त के बहने का खतरा भी कम होता जाता है.

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