नजरिया. जैसी कि सियासी आशंका थी, लोकसभा चुनाव में नाकामयाबी के बाद मायावती ने अपनी राह अलग करने के संकेत दिए हैं, जाहिर है आने वाले विधानसभा चुनाव में केन्द्र की तरह यूपी भी सपा-बसपा में से किसी के हाथ नहीं आएगा!

यूपी में बीजेपी को सत्ता से दूर रखने की सीधी-सी गणित है... सपा, बसपा और कांग्रेस का गठबंधन. लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा ने कांग्रेस को अलग रख कर गठबंधन कर लिया, जिसका परिणाम यह रहा कि गैर-भाजपाई वोटों का बिखराव हुआ और गैर-भाजपाइयों को अपेक्षित कामयाबी नहीं मिली.

दरअसल, यूपी में बीजेपी के पास चालीस प्रतिशत के करीब पक्के वोट हैं, लेकिन गैर-भाजपाई वोटों के बिखराव के कारण कई सीटें जीतने में बीजेपी आसानी से सफल रही. आगे विधानसभा चुनाव में भी यदि वोटों का बिखराव ऐसा ही रहा तो गैर-भाजपाइयों की लोकसभा चुनाव से भी ज्यादा खराब स्थिति रह सकती है.

खबर है कि लोकसभा चुनाव से पहले बने सपा-बसपा गठबंधन के फिलहाल खत्म होने के संकेत देते हुए दोनों दलों ने यूपी में विधानसभा की कुछ सीटों पर होने वाले उपचुनाव को अपने बलबूते लड़ने की घोषणा कर दी है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव का कहना है कि... कभी-कभी आप परीक्षणों में सफल नहीं होते हैं, लेकिन आपको कमजोरियों के बारे में पता चलता है. मायावती जी के लिए मैंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि मेरे सम्मान उनका सम्मान होगा. मैं अब भी वही कहता हूं. जहां तक गठबंधन या अकेले चुनाव लड़ने की बात है, राजनीतिक रास्ते सभी के लिए खुले हैं. अगर हम अकेले उपचुनाव लड़ रहे हैं तो मैं पार्टी के सभी नेताओं के साथ चर्चा करूंगा कि हमारी भावी रणनीति क्या होनी चाहिए और इसके लिए क्या करना चाहिए?

यह बात अलग है कि बसपा प्रमुख ने भविष्य में सपा के साथ फिर से गठबंधन का विकल्प अभी खुला रखा है, मायावती का कहना है कि- अभी हमारा कोई ब्रेकअप नहीं हुआ है. अलबत्ता, अखिलेश यादव ने अपनी राह अलग करने का संकेत देते हुए कहा कि अगर रास्ते अलग-अलग हैं, तो उसका स्वागत है और उनकी पार्टी भी यूपी की 11 विधानसभा सीटों पर अकेले उपचुनाव लड़ेगी.

याद रहे, ताजा संपन्न हुये लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से भाजपा के नौ विधायकों और सपा, बसपा के एक-एक विधायक के सांसद बनने के बाद रिक्त हुई 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं.

लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 सीटों में से बीजेपी को 62, जबकि सपा-बसपा-रालोद गठबंधन को 15 सीट मिली, जिनमें से 10 सीट बसपा को जबकि पांच सीट सपा को मिली. कांग्रेस को कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली, लेकिन उसने दिखा दिया कि उसकी छोटी गणित को नजरअंदाज किया गया तो गैर-भाजपाइयों को बड़ी कामयाबी नहीं मिल पाएगी!

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