खबरंदाजी. लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान चुपके-चुपके आने वाला नमो टीवी चुनाव होत ही मिस्टर इंडिया काहे हो गया? अरे भाई, जब कई चैनल नमो टीवी से बेहतर भूमिका निभा रहे हैं तो पार्टी का पैसा काहे खर्च करना?

अब बीसवीं सदी का मीडिया तो है नहीं, यह तो एडवोएंकर और मिरर इंटरव्यू की सदी है, जब रेफरी भी किसी एक टीम की ओर से सियासी खेल खेलने लग जाता है! परिणाम पहले आ जाता है, खेल बाद में चलता रहता है?

मिरर इंटरव्यू, बोले तो... सवाल भी तुम्हारे, जवाब भी तुम्हारे... गवाही भी तुम्हारी, फैसला भी तुम्हारा!

एडवोएंकर और मिरर इंटरव्यू की एक्कीसवीं सदी की पत्रकारिता शायद कांग्रेस को लोकसभा चुनाव हारने के बाद समझ में आई है? लेकिन, सियासी सयानों का कहना है कि... सबकुछ लुटा के होंश में आए तो क्या किया?

टीवी स्क्रीन से नमो टीवी अब गायब हो गया है, 26 मार्च 2019 को लोकसभा चुनाव शुरु होने से कुछ दिन पहले ही प्रकट हुआ था, जिस पर पीएम नरेंद्र मोदी के भाषणों, इंटरव्यू और कार्यक्रमों को एक ही जगह देखा जा सकता था! अब तो अगले पांच साल वे यत्र, तत्र और सर्वत्र उपलब्ध रहेंगे, फिर नमो टीवी का क्या काम?

उधर, लोकसभा चुनाव में ऐसी हार के बाद कांग्रेस ने बड़ा निर्णय कर डाला है कि... उसने अपने प्रवक्ताओं को एक महीने तक टेलीविजन चैनलों पर नहीं भेजने का फैसला किया है! अब ऐसे निर्णय का क्या फायदा? लोकसभा चुनाव के समय करते तो कुछ फायदा भी होता!
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर जानकारी दी कि कांग्रेस ने फैसला किया है कि वह अपने प्रवक्ताओं को एक महीने तक टीवी चैनलों के कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए नहीं भेजेगी!

कांग्रेस के इस निर्णय पर आशुतोष ने ट्वीट किया... सचाई ये है कि टीवी डिबेट्स में ज्यादातर चैनेल, एंकर सिर्फ कांग्रेस, राहुल, विपक्ष का ही मान मर्दन करते हैं. मोदी सरकार के गुणगान का कोई भी मौका नहीं छोड़ा जाता. जब तक लेवल प्लेइंग फिल्ड ना हो कांग्रेस के साथ-साथ विपक्ष को भी टीवी डिबेट में नहीं आना चाहिये!

सम्पत सरल ने व्यंग्यबाण चलाया... कांग्रेस पार्टी ने 1 महीने तक टीवी डिबेट्स में अपने प्रवक्ताओं को नही भेजने का फैसला किया है, यह सुनकर गोदी मीडिया में कोलाहल मचा हुआ है कि अब उनका प्रोपगेंडा कैसे चलेगा?

सियासी सयानों का मानना है कि यदि युग बदल जाए तो भूत को याद करने के बजाए भविष्य को बचाने के वर्तमान प्रयास किए जाने चाहिएं, क्योंकि... सिद्धांत मिथ्या हैं? सत्ता ही सत्य है?

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