सियासत. लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद राजस्थान में सियासी गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं. विभिन्न राजनीतिक बयानों, गतिविधियों आदि के सभी अपने-अपने हिसाब से अर्थ-भावार्थ तलाश रहे हैं और इसीलिए बड़ा सवाल है कि- क्या गुजरते समय के साथ ठंडी पड़ जाएंगी सियासी गतिविधियां या कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएंगी?

लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद सीएम अशोक गहलोत ने ट्वीट किया था- कांग्रेस के लिये देश सर्वोपरि है, जबकि भाजपा के लिये सत्ता महत्वपूर्ण है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह आम चुनाव जनहित एवं विकास के मुद्दों पर लड़ा जबकि नरेन्द्र मोदी ने आचार संहिता की धज्जियां उड़ाते हुए धर्म, जाति, सेना के शौर्य, पराक्रम के नाम पर यह चुनाव लड़ा!

उधर, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने लिखा था- ये नतीजे भारतीय जनता पार्टी व मोदी सरकार पर जनता के अटूट विश्वास का परिणाम हैं.

राजस्थान में हार के बाद से कांग्रेस के अन्दर जो हलचल मची है, कोई उसे गुटबाजी के नजरिए से देख रहा है, तो कोई बदलाव की आहट मान रहा है, जबकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हार के बाद ये सारी रस्मी गतिविधियां हैं, जो गुजरते समय के साथ ठंडी पड़ जाएंगी.

कई बड़े नेता भी बयान दे रहे हैं. गहलोत सरकार के ही मंत्री रमेश मीणा का कहना है कि हार को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिये, तो सहकारिता मंत्री उदयलाल अंजना ने भी चुनाव प्रचार की कमियों को उजागर किया है.

उधर, अपुष्ट खबर है कि कृषि मंत्री लाल चन्द कटारिया राजस्थान मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे रहे हैं. इसकी वजह यह बताई गई है कि- वर्तमान में सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव के अन्तर्गत पार्टी को बहुत कम मत प्राप्त हुए है, इसलिये मंत्री पद पर बने रहना नैतिक रूप से उचित नहीं है.

दिल्ली में राहुल गांधी की ओर से पुत्र-मोह जैसी टिप्पणी पर सीएम अशोक गहलोत ने भी अपनी बात रखी है, उनका कहना था कि- खबरें छपती रहती है और कौनसी बात किस संदर्भ में उन्होंने कही हैं, वे संदर्भ बदल जाते हैं. जब संदर्भ से हटकर बात होती है तब उसके मायने दूसरे हो जाते हैं, उस पर मैं कोई कमेंट नहीं करना चाहता.

लेकिन, कांग्रेस की हार पर उनका कहना था कि- पहले भी ऐसा समय आ चुका है, जिसमें हम कमजोर रहे, लेकिन बाद में पार्टी उबरी और सत्ता में भी आई. हार से हम लोग कोई घबराने वाले नहीं है, हार सकते हैं पर कांग्रेसजनों के अंदर हिम्मत में कोई कमी नहीं आई है. राहुल गांधी ने देश में मुद्दा आधारित राजनीति की है. चाहे वोट हमें मिले हो या नहीं मिले हो पर हर व्यक्ति की जुबान पर है कि यह इंसान दिल से बोलता है. उन्होंने कहा कि झूठ कुछ समय के लिए जीत सकता है पर अंतिम जीत सत्य की होती है.

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अभी भी कांग्रेस के पास राजस्थान की सत्ता है? कांग्रेस चाहे तो अगले पांच सालों में प्रदेश की जनता को कुछ करके दिखा सकती है! यदि कांग्रेस राजस्थान में ऐसा करने में सफल होती है तो आने वाले पंचायत, स्थानीय निकाय आदि चुनावों में फिर से अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन हांसिल कर सकती है?

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