मार्गरेट थ्रेचर एक ब्रिटिश stateswoman थी जो के प्रधानमंत्री के रूप में यूनाइटेड किंगडम के 1979 से 1990 तक सेवा में रही  और कंजरवेटिव पार्टी की नेता के तौर पर 1975 से 1990 तक काम करती रही . वह 20 वीं सदी की सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाली ब्रिटिश प्रधानमंत्री थीं और वह पद संभालने वाली पहली महिला थीं, आयरन लेडी कही जाने वाली इस शख्सियत ने तमाम फौलादी अवरोधों को तोडऩे के लिए संघर्ष किया. आजादी की उनकी अवधारणा के सिर्फ तीन पहलू थे: व्यक्तिगत, राजनैतिक और आर्थिक. जब कभी 10, डाउनिंग स्ट्रीट में 11 साल के उनके राज के दौरान किसी भी तरह की आजादी को कोई चुनौती मिली, उन्होंने कदम पीछे नहीं हटाए.

ग्रैंथम के एक परचून वाले की लड़की जब ब्रिटेन की सबसे ज्यादा साल तक राज करने वाली पहली महिला प्रधानमंत्री बनी, तब देश में राज करने के हालात नहीं थे. राजनीति स्टालिनवादी रुझान के वामपंथियों और यथास्थितिवादी दक्षिणपंथियों के चंगुल में फंसी हुई थी. दोनों सिरों पर पुरुषों का प्रभुत्व था. उन्होंने टोरी अभिजात्य को मात देते हुए पार्टी में जीत हासिल की थी. सत्ता में लेडी थैचर के आक्रामक संरक्षणवाद ने एक ऐसी विचारधारा की तमाम आश्वस्तियों को छिन्न-भिन्न कर डाला जो समाज में पारंपरिक चीजों का उत्सव मनाने की आदी थी और जिसके सर्वोच्च गुरु बेंजामिन डिजरायली हुआ करते थे.

ब्रिटेन में थैचर, अमेरिका में रोनाल्ड रीगन, मॉस्को में गोर्बाचेव और वेटिकन में पोप जॉन पॉल-2 की चौकड़ी के समक्ष शैतानी साम्राज्य के पास खुद को बचाने का कोई मौका नहीं था. बर्लिन की दीवार की ओर इशारा करते हुए पश्चिमी बर्लिन के ब्रैंडेनबर्ग गेट पर खड़े रीगन ने अपने ऐतिहासिक स्वतंत्रता संबोधन में कहा था, ''मिस्टर गोर्बाचेव, इस समझैते को फाड़ दीजिए.” लंदन में पहली बार जब प्रधानमंत्री थैचर की मुलाकात गोर्बाचेव से हुई थी तो उन्होंने छूटते ही कहा था, ''मुझे कम्युनिज्म से नफरत है.” जाहिर है, आजादी की इस देवी ने हमेशा इतिहास के वाम पक्ष से परहेज किया और दूसरे छोर पर खड़े रह कर परिवर्तनकारी विचारों का प्रसार किया.

थैचर आखिरी नेता थीं जो लोकतंत्र में आजादी को सबसे ऊपर रखती थीं, और खुद उन्हीं के शब्दों में एक ऐसी नेता, जिसने हमेशा दिल की आवाज सुनी और आम राय को ठेंगे पर रखा. उनकी कमी न सिर्फ उनके देश के कंजर्वेटिव लोगों को अखरेगी, जो खुद को बचाए रखने का संघर्ष कर रहे हैं, बल्कि यह दुनिया भी उन्हें याद करेगी जहां नेतृत्व और परिवर्तन के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है.

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