खबरंदाजी. लोक सभा 2019 की चुनावी जंग खत्म होने के बाद एग्जिट पोल क्या आया, इन तोता पोल के नतीजों से विपक्षियों के तो तोते ही उड़ गए हैं!

अरे भाई, ये नतीजे चुनाव आयोग के थोड़े हैं, जो इतना परेशान हो रहे हैं? एग्जिट पोल के नतीजे देश में तो क्या, विदेशों में भी कई बार तोता पोल साबित हुए हैं! काहे ट्विटर के कंमेट कमजोर पड़ गए, काहे फेस बुक पर फेस नजर नहीं आ रहे हैं?

वैसे भी इन नतीजों में नया कुछ नहीं है, अलबत्ता इसे पेश करने का अंदाज जरूर नया है, इतना धमाकेदार की विरोधी सहम जाए? इससे पहले कुछ सर्वे में भी तो ऐसे ही नतीजे आए थे जब एनडीए ढाई सौ से ज्यादा सीटें जीतती नजर आ रही थी!

सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि क्या इस बार पीएम मोदी का एकाधिकार बना रहेगा? और इस एकाधिकार के लिए बीजेपी अकेले 272 का आंकड़ा पार कर पाएगी?

दरअसल, एग्जिट पोल के आंकड़ों के दम पर एनडीए में पीएम मोदी के विरोध को दबाने और उनके नेतृत्व को बरकरार रखने की कोशिश नजर आती है? यह तो पहले ही स्पष्ट था कि इस बार बीजेपी 200 पार जा सकती है, एनडीए ढाई सौ पार जा सकती है और पाॅलिटिकल मैनेजमेंट में एक्सपर्ट पीएम मोदी टीम केन्द्र में जोड़तोड़ करके सरकार बना सकती है! लेकिन, महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि देश में बीजेपी को कितने प्रतिशत वोट मिलता है? और, क्या बीजेपी को 272 से कम सीटें मिली तो नैतिकता के आधार पर नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री पद छोड़ सकते हैं? क्या नितिन गड़करी, राजनाथ सिंह जैसे वरिष्ठ नेता को यह अवसर दिया जा सकता है?

यह जरूरी नहीं है कि असली नतीजे वैसे ही हों जैसे एग्जिट पोल में हैं? हो सकता है एनडीए को 400 सीटें मिल जाएं, और यह भी हो सकता है कि एनडीए 272 से नीचे पहुंच जाए! लेकिन, इतना तय है कि यदि एनडीए ढाई सौ तक भी सीटें हांसिल करने में कामयाब रहा तो केन्द्र में एनडीए की सरकार होगी?

एग्जिट पोल ने तो 2004 में भी गैर-भाजपाइयों के तोते उड़ा दिए थे, जब 255 सीटों पर एनडीए जीत रहा था, किन्तु असल में 200 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाया था एनडीए! यूपीए को 183 सीटें मिल रही थी, पर असल में उसे 222 सीटें मिली?

ऐसा ही झटका 2009 में भी लगा था, जब एनडीए को 199 और यूपीए को 197 सीटें दी गई थीं, सियासी धमाका तो तब हुआ जब यूपीए को 262 सीटें मिल गई, जबकि एनडीए 159 सीटों पर आ गया!

वर्ष 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद भी एग्जिट पोल, तोता पोल बन गए जब बीजेपी़ को जेडीयू-आरजेडी गठबंधन से बहुत आगे बताया गया था, परन्तु परिणाम उल्टे पड़ गए? बीजेपी़ को 58, तो जेडीयू-आरजेडी गठबंधन को 178 सीटें मिली!

एग्जिट पोल का झटका अरविंद भाई पहले भी खा चुके हैं? वर्ष 2015 में हुए दिल्ली विधान सभा चुनाव के एग्जिट पोल में आप को 31 से 53 सीटें, तो बीजेपी को 17-35 सीटें मिलने का अनुमान था, लेकिन आप ने सबको धो डाला जब उसे 70 में से 67 सीटें मिलीं! बीजेपी को केवल 3 सीटें मिली और कांग्रेस का स्कोर शून्य रहा?

ताजा मजेदार तोता पोल रहा छत्तीसगढ़ का, जहां 2018 में हुए विधान सभा चुनाव में एग्जिट पोल में बीजेपी को 40 सीटें और कांग्रेस को 46 सीटें मिली थी, जब नतीजे आए, तो बीजेपी केवल 15 सीटों तक ही पहुंच पाई और कांग्रेस ने 68 सीटें ले उड़ी!

इसलिए, जिन्हें एग्जिट पोल में कामयाबी मिली है, वे मिठाई खाएं-खिलाएं और जिनको नाकामयाबी मिली है, वे इसे तोता पोल मान कर भूल जाएं!

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