होम्योपैथी औषधि बहुत धीरे काम करने वाली पद्धति है जो की सिर्फ एक मिथक है. ये रोग की जटिलता पर और चिकित्सक द्वारा दिये गए सही औषधि पर निर्भर करता है. अगर रोग दीर्घकालिक प्रवृति का है तो उसके उपचार में लंबा वक्त लगेगा नहीं तो कम वक्त.

होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में चाय, कॉफी, प्याज़, लहसुन एवं खट्टे खाद्य पदार्थों का सेवन वर्जित होता है ये भी एक मिथक है. ऐसा रोग के लक्षणों के आधार पर ही कहा जाता है नहीं तो आप सभी चीज़ों का सेवन औषधि के साथ भी कर सकते हैं.

एक वक्त में सिर्फ एक ही दवाई ली जा सकती है. ऐसा नहीं है, रोग की तीव्रता की आधार पर एक साथ दो या तीन दवाइयां भी चलायी जा सकती हैं.

एलोपैथी मेडिसिन के साथ होम्योपैथी मेडिसिन नहीं ली जा सकती ये भी एक मिथक है. बल्कि होम्योपैथी की सबसे खास बात है कि आप डॉक्टरी परामर्श से इसका सेवन किसी भी दूसरे मेडिसिन के साथ कर सकते हैं. इससे किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट होने का खतरा नहीं होता.

होम्योपैथी में किसी भी तरह की जांच नहीं की जाती. ये भी गलत है शुरुआत में जांच की ज़रूरत नहीं होती पर रोग की जटिलता को देखते हुये जांच के बाद ही इलाज की जाती है.

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