मुख्य बिन्दु:

क्षेत्रीय अनुकूलतानुसार प्रजाति का चयन कर प्रमाणित एवं शुद्ध बीज का प्रयोग करें .

बेसल ड्रेसिंग फास्फोरसधारी  उर्वरकों का कूड़ो में संस्तुति  अनुसार अवश्य पर्योग करें .

रोगों एवं फलीछेदक कीड़ों की सामयिक जानकरी कर उनका उचित नियंत्रण/उपचार किया जाय .

पाइराइट जिप्सम/ सिंगल सुपर फास्फेट के रूप में सल्फर की प्रतिपूर्ति करें .

बीजशोधन अवश्य करें .

चने में फूल आते समय सिंचाई न करें .

देर से बुवाई हेतु शीघ्र पकने वाली प्रजाति का प्रयोग करें .

काबुली चने में २ प्रतिशत बोरेक्स का छिड़काव करें .

कीट एवं  रोग का समय सड़े नियंत्रण करें

चने की बुवाई उत्तर-दक्षिण दिशा में नहीं  करें .

असिंचित दशा में २% यूरिया या डी. ए. पी. का छिड़काव फूल आते समय करना चाहिए .

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


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