- प्रदीप कुमार द्विवेदी  

* किसी भी व्यक्ति के जीवन में आय उसके ग्यारहवें भाव में उपस्थित ग्रह और आयेश के स्वाभाव पर निर्भर है, इन ग्रहों के कारकत्व और गोचर के सापेक्ष ही व्यक्ति की आय में उतार-चढ़ाव आते हैं.

* मेष लग्र/राशि को शनि आय प्रदान करता है इसलिए इनकी आय न्यायोचित होने के साथ-साथ मेहनत और सहयोगियों के दम पर प्राप्त होती है तथा धीरे-धीरे ताउम्र बढ़ती है, इनका आयचक्र तकरीबन ढाई वर्ष का होता है. सहयोगियों का सद्भाव आयवृद्धि में सहायक है.

* वृषभ लग्र/राशि को गुरु आय प्रदान करता है इसलिए ज्ञान, धार्मिक और सम्मानजनक तरीके से आय होती है, उम्र के साथ-साथ आय बढ़ती है, इनका आयचक्र तकरीबन वार्षिक होता है. बुजुर्गों का आशीर्वाद आय बढ़ाता है.

* मिथुन लग्र/राशि को मंगल आय प्रदान करता है इसलिए ज्यादातर मामलों में कम उम्र में आय शुरू होती है और कई बार अचानक लाभ की स्थितियां बनती हैं, इनका आयचक्र तकरीबन प्रतिमाह का होता है. भाई और रक्त संबंधियों का सहयोग आय बढ़ाता है.

* कर्क लग्र/राशि को शुक्र आय प्रदान करता है इसलिए ज्यादातर मामलों में विवाह के बाद भाग्योदय के साथ आय बढऩा प्रारंभ होती है, इनका भी आयचक्र तकरीबन प्रतिमाह का होता है. पत्नी के सद्भाव से आय बढ़ती है.

* सिंह लग्र/राशि को बुध ग्रह आय प्रदान करता है जो कला-व्यवसाय से आय की राह दिखाता है, इनका भी आयचक्र तकरीबन प्रतिमाह का होता है. आयवृद्धि में बहन-बेटी का प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष सहयोग मिलता है.

* कन्या लग्र/राशि को चन्द्र ग्रह आय प्रदान करता है इसलिए इनकी दैनिक और अस्थिर आय होती है, अकारक गोचर में अक्सर इनको आय संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इनका आयचक्र दैनिक होता है. माता का आशीर्वाद अर्थ संकट से मुक्ति प्रदान करता है.

* तुला लग्र/राशि को सूर्य ग्रह प्रतिष्ठा के साथ आय प्रदान करता है लेकिन निरंतर कार्य में लगे रहना आवश्यक है, इनका आयचक्र छह माह का होता है लेकिन प्रतिमाह सूर्य संक्रांति के सापेक्ष भी आय में परिवर्तन होता रहता है. पिता के सहयोग से आमदानी बढ़ती है.

* वृश्चिक लग्न/राशि को बुध ग्रह आय प्रदान करता है जो कला-व्यवसाय से आय प्रदान करता है, इनका भी आयचक्र तकरीबन प्रतिमाह का होता है. आयवृद्धि में बहन-बेटी का प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष सहयोग मिलता है. 

* धनु लग्र/राशि को शुक्र ग्रह आय प्रदान करता है इसलिए अक्सर विवाह के बाद भाग्योदय होता है और आय बढ़ती है, इनकी आय संतुलित होती है तथा आयचक्र तकरीबन प्रतिमाह का होता है. पत्नी के सद्भाव से आय बढ़ती है.

* मकर लग्र/राशि को मंगल आय प्रदान करता है इसलिए ज्यादातर मामलों में जल्दी ही आय शुरू होती है और अक्सर अचानक लाभ की स्थितियां बनती हैं, इनका आयचक्र तकरीबन प्रतिमाह का होता है. भाई और रक्त संबंधियों का सहयोग आय बढ़ाता है.

* कुंभ लग्र/राशि को गुरु ग्रह आय प्रदान करता है इसलिए ज्ञान, धर्म और सम्मानजनक कर्म से आय होती है, उम्र के साथ-साथ आय बढ़ती है, इनका आयचक्र तकरीबन वार्षिक होता है. बुजुर्गों का आशीर्वाद आय बढ़ाता है.

* मीन लग्र/राशि को शनि आय प्रदान करता है इसलिए इनकी आय न्यायोचित होने के साथ-साथ मेहनत और सहयोगियों के दम पर प्राप्त होती है, नौकरी इन्हें आय प्रदान करती है तथा धीरे-धीरे ताउम्र बढ़ती है, इनका आयचक्र तकरीबन ढाई वर्ष का होता है. सहयोगियों का सद्भाव आयवद्धि में सहायक है.

* इनके अलावा ग्यारहवें भाव में उपस्थित ग्रह और उनके कारकत्व के सापेक्ष आय में कमीवृद्धि संभव है.  

आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम 14:30 तक:

मिथुन, सिंह, तुला, 

वृश्चिक, कुम्भ, मीन

*मकर राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

उसके पश्चात - 

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, कर्क, कन्या, 

वृश्चिक, धनु, मीन

*कुम्भ राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

मंगलवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा        रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- रोग                पहला- काल

दूसरा- उद्वेग              दूसरा- लाभ

तीसरा- चर               तीसरा- उद्वेग

चौथा- लाभ                चौथा- शुभ

पांचवां- अमृत             पांचवां- अमृत

छठा- काल                 छठा- चर

सातवां- शुभ               सातवां- रोग

आठवां- रोग               आठवां- काल

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है

पंचांग

मंगलवार, 14 मई 2019

महावीर स्वामी कैवल्य ज्ञान

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 13:32:37

मास वैशाख

तिथि दशमी - 13:00:34 तक

नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी - 08:53:26 तक

करण गर - 13:00:34 तक, वणिज - 23:48:42 तक

पक्ष शुक्ल

योग हर्शण - 26:15:54 तक

सूर्योदय 05:31:20

सूर्यास्त 19:03:58

चन्द्र राशि सिंह - 14:29:19 तक

चन्द्रोदय 14:24:59

चन्द्रास्त 27:11:59

ऋतु ग्रीष्म

दिशा शूल: उत्तर में

राहु काल वास: पश्चिम में

नक्षत्र शूल: उत्तर में 08:54 से

चन्द्र वास: पूर्व में 14:30 तक, दक्षिण में 14:30 से

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


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