ज्योतिष ज्ञान का अथाह सागर हैं , इसे वेदों का नेत्र कहा गया हैं, इस शास्त्र मे सम्पूर्ण ज्ञान भरा पड़ा हैं,इस शास्त्र मे धर्म औऱ कर्म की व्याख्या भी की गई हैं,इस शास्त्र मे धर्म औऱ कर्म की अलग अलग व्याख्या की गई हैं, शनि महाराज को जहा कर्म का कारक माना गया हैं तो गुरु ग्रह को धर्म का कारक माना गया हैं.

-गुरु औऱ शनि मे अंतर- शनि ग्रह को आकाशमंडल मे दास का पद दिया गया हैं, वही गुरु ग्रह को देवताओ के गुरु का पद दिया गया हैं,सभी प्रकार के कार्य जिसमे मेहनत हिम्मत मशीनी कार्य,निर्माण, मजदूरी से जुड़े कार्य शनि देव के अंर्तगत ही आते हैं, वही अध्यापन सलाहकारिता पूजापाठ मठमंदिर से जुड़े कार्यों, धन, खानपान से जुड़े कार्य गुरु ग्रह के अंतर्गत ही आते हैं.

शनि औऱ गुरु मे अंतर*- शनि ग्रह दास हैं गुरु ग्रह पंडित,विद्वान हैं, व्यक्ति मे ज्ञान अर्थात गुरु ग्रह का प्रभाव जितना कम होगा उसको शनि ग्रह से जुड़े काम अर्थात दूसरो के आदेश पर चलना होगा वही गुरु का प्रभाव जितना शुभ होगा जातक स्वतंत्र रहेगा लोग उसके आदेश के अनुसार ही चलेंगे यानी गुरु औऱ शनि मे मुख्य अंतर ज्ञान का हैं जितना ज्ञान उतना श्रम कम या ज्यादा,गुरु ग्रह ग्रह आपके शारीरिक श्रम को नियंत्रित करता हैं.

धर्म औऱ कर्म- शनिदेव की राशि कुंभ औऱ मकर हैं वही गुरू ग्रह की राशि धनु औऱ मीन हैं, शनि की राशि मकर गुरू की नीच राशि हैं जिसमे युद्ध का देवता मंगल अपनी उच्चता दिखाता हैं,यानी श्रम करने वाले का मंगल (शक्ति)बलवान होना चाहिए भले ही गुरू(ज्ञान)हो न हो याने ज्ञान औऱ बल दो विपरीत ग्रह हैं जैसे मजदूर या सैनिक पंडित के काम नहीँ कर सकता उपदेश नहीँ दे सकता, काम कैसे करना ये गुरू ही बतायेगा.

राशि के अनुसार गुरू औऱ शनि की अनुकूलता- कुछ राशियों मे शनि अनुकुल औऱ कु़छ राशियों मे प्रतिकूल होता हैं ऐसा ही गुरू ग्रह के साथ ही होता हैं जिनका शनि अनुकूल हो उनको मेहनत मशक्कत के काम करना चाहिए औऱ जिनका गुरू अनुकूल हो उन्हे ज्ञान उपदेश शिक्षण आदि का कार्य करना चाहिए.

मेष- इस राशि मे शनि औऱ गुरू दोनो अनुकूल होते हैं.

वृषभ- इस राशि मे शनि पूर्ण रूप से अनुकूल होता हैं, गुरू पुरी तरह से प्रतिकूल होता हैं.

मिथुन- इस राशि मे गुरू औऱ शनि दोनो अनुकूल होते हैं बशर्ते गुरू केंद्र मे न हो.

कर्क- इस राशि के लिये गुरू पूर्णरूप से अनुकूल होता हैं जबकि शनि प्रतिकूल होता हैं.

सिंह- इस राशि मे भी गुरू अनुकूल औऱ शनि प्रतिकूल होता हैं.

कन्या- गुरू केंद्र मे न हो औऱ शनि केंद्र मे हो तो दोनो अनुकुल होते हैं.

तुला- वृषभ राशि की तरह शनि पूर्ण रूप से लाभकारी औऱ गुरू अकारक होता हैं.

वृश्चिक- इस राशि के लिऐ गुरू पुरी तरह से अनुकुल होता हैं वही शनि प्रतिकूल होता हैं.

धनु- इस राशि के लिऐ गुरू अनुकूल औऱ शनि प्रतिकूल होता हैं.

मकर- इस राशि के लिऐ शनि पुरी तरह से अनुकुल औऱ गुरू पुरी तरह से प्रतिकूल होता हैं.

कुंभ- इस राशि के लिऐ शनि पुरी तरह से अनुकुल किन्तु गुरू प्रतिकूल नहीँ होता.

मीन- इस राशि के लिऐ शनि प्रतिकूल आऊं गुरू पुरी तरह से अनुकूल होता हैं.

*जिनकी राशि मे गुरू अनुकुल हो उन्हे शिक्षण धर्म वित्त से जुड़ा कार्य लाभ देता हैं.

*जिन राशियों मे शनि अनुकुल होता हैं उन्हे मशीनी कार्य शारीरिक क्षमता हिम्मत औऱ बहादुरी, विदेश से जुड़े कार्य अच्छे परिणाम देते हैं.

पं.चंद्रशेखर नेमा हिमांशु 9893280184,7000460931

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