स्‍वस्‍थ शरीर के लिए दिल का स्‍वस्‍थ होना बहुत जरूरी है, लेकिन जब दिल सही तरीके से काम नहीं करता या सही तरीके से शरीर में रक्‍त का सचांर नहीं होता है तब एंजियोग्राफी की जाती है. यह एक तरह का टूल है जिससे दिल की नसों के बारे में पता लगाया जाता है. इस तकनीक से मरीज के नसों के अंदर हाथ या फिर जांघ के जरिये एक तार डाला जाता है. इस तार में एक दवाई डाली जाती है, जिसे रेडियो एपेक्‍ड आई बोलते हैं.

यह दवा दिल की नसों में चली जाती है, जहां तक यह दवा आसानी से चली जाती है वह हिस्‍सा सही होता है और जहां ये रुक जाती है वह हिस्‍सा प्रभावित होता है. यानी एंजियोग्राफी से पता चल जाता है कि दिल की तीनों नसों में से कौन सी नसें पूरी तरह सक्रिय हैं और कहां पर रुकावट है. इससे नसों की क्षति का प्रतिशत भी पता चल जाता है. इसके अनुसार चिकित्‍सक उपचार करते हैं,मस्तिष्क और विभिन्न रक्त वाहिकाओं में कीड़े खोजने के लिए इस पद्धति का उपयोग सबसे पहले पुर्तगाली डॉक्टर ईगास मोनिज़ ने किया था . और लिस्बन , में पहली फ़रवरी उन्होंने 1927 में एंजियोपैथी की. सिड कहा riyanardo खुराक था पहला महाधमनी 1929 से हटा दिया गया था. श्रेणी 1953 में सेलडिंगर टेक्निक की मदद से अंगों की एंजियोग्राफी आसान हो जाती है.

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