हिन्दुस्तान की सबसे पवित्र नदी गंगा है. धर्मग्रंथों के अनुसार गंगा सप्तमी को माता गंगा, स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में पहुंची थीं, इसलिए यह गंगा जन्मोत्सव भी है क्योंकि इस दिन माता गंगा का पुनर्जन्म हुआ.

माता गंगा पृथ्वी पर पहली बार गंगा दशहरा को अवतरित हुईं थी लेकिन, जाहनू ऋषि ने गंगा का पूरा जल पी लिया. देवताओं और राजा भागीरथ के निवेदन पर उन्होंने गंगा सप्तमी के दिन गंगा के जल को मुक्त किया, तभी से माता गंगा के पुर्नअवतरण पर गंगा जन्मोत्सव मनाते हैं.

ऋषि जाहनु के मुख से पुनर्जन्म लेने के कारण इस दिन माता गंगा के जाह्नवी स्वरूप की पूजा की जाती है.

गंगा सप्तमी पर गंगा पूजन एवं पवित्र स्नान से यश-धन-सम्मान की प्राप्ति होती है. माता गंगा तीनों लोक में पापमुक्ति प्रदान करती हैं... स्वर्ग में माता गंगा को मंदाकिनी तो पाताल में भागीरथी पुकारते हैं.

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

वृषभ, कर्क, कन्या, 

तुला, मकर, कुम्भ

*धनु राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

*यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

शनिवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा       रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- काल              पहला- लाभ

दूसरा- शुभ              दूसरा- उद्वेग

तीसरा- रोग              तीसरा- शुभ

चौथा- उद्वेग             चौथा- अमृ

पांचवां- चर               पांचवां- चर

छठा- लाभ                छठा- रोग

सातवां- अमृत            सातवां- काल

आठवां- काल             आठवां- लाभ

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है! 

पंचांग

शनिवार, 11 मई 2019

गंगा सप्तमी

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 13:28:52

मास वैशाख

तिथि सप्तमी - 19:45:33 तक

नक्षत्र पुष्य - 13:13:44 तक

करण गर - 08:45:26 तक, वणिज - 19:45:33 तक

पक्ष शुक्ल

योग गण्ड - 13:55:30 तक

सूर्योदय 05:33:16

सूर्यास्त 19:02:08

चन्द्र राशि कर्क

चन्द्रोदय 11:11:59

चन्द्रास्त 25:07:00

ऋतु ग्रीष्म

दिशा शूल: पूर्व में

राहु काल वास: पूर्व में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: उत्तर में

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