चुनाव-चर्चा. यदि इस बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कामयाब हो जाते हैं तो इसका सबसे ज्यादा श्रेय पीएम मोदी को जाएगा? सियासी सागर में धक्के मार-मार कर पीएम मोदी ने राहुल गांधी को सफल राजनीतिक तैराक बना दिया है! वर्ष 2014, जब पीएम मोदी अपने सर्वोच्च पर थे, तब राहुल गांधी जीरो पर थे, बल्कि कहना चाहिए कि सोशल सेना ने उन्हें जीरो से भी नीचे पहुंचा दिया था. तब, पन्द्रह साल तक दिल्ली की सीएम रही वरिष्ठ कांग्रेस नेता शीला दीक्षित ने भी राहुल गांधी की सियासी समझदारी को लेकर टिप्पणी की थी, लेकिन पीएम मोदी टीम की बदौलत राहुल गांधी राजनीति के रंग पहचानते गए और धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए पीएम मोदी की टक्कर में आ कर खड़े हो गए?

यही वजह है कि अब एक इंटरव्यू में जब शीला दीक्षित से पूछा गया कि- गांधी परिवार के आप करीबी रही हैं और राहुल गांधी को राजनीतिक रूप से परिपक्व होते देखा है, आपको क्या लगता है कि वह देश का नेतृत्व अब कर सकते हैं? तो उनका जवाब था कि- आप सब लोग गांधी परिवार की बात करते हैं. मैं आपसे गांधी परिवार की बात कहना चाहती हूं. हां, वो हमारे नेता हैं और हमारे नेता इसलिए भी हैं क्योंकि उन्होंने पिछला चुनाव छोड़कर जो भी चुनाव लीड किया है वो जीते हैं. जब हम उन्हें स्वीकार करते हैं और जनता भी स्वीकार करती है तो इसमें किसी को दिक्कत होनी ही नहीं चाहिए? जाहिर है, पीएम मोदी के राहुल गांधी पर सियासी वार अब बेअसर हो रहे हैं!

राहुल गांधी को सबसे बड़ा सियासी सहारा दिया सोशल सेना ने, जिसने उन्हें अज्ञानी और अपरिपक्व साबित करने के लिए, सच्चे कम और झूठे बहुत ज्यादा, किस्से प्रचारित कर दिए. इस अति के कारण जनता ने समझ लिया कि राहुल गांधी अज्ञानी नहीं हैं, उन्हें अज्ञानी साबित करने का अघोषित अभियान चल रहा है? नतीजा यह रहा कि जनता ने इस अभियान की हवा निकाल दी! सबसे बड़ी गलती पीएम मोदी ने की, जिन्होंने राहुल गांधी को लोगों को भूलने ही नहीं दिया?

वे उन पर लगातार राजनीतिक निशाने साधते रहे और राहुल गांधी उनको जवाब देते रहे! यह सब भी सफल हो जाता, किन्तु पीएम मोदी ने कुछ कर दिखाने का अवसर गंवा दिया, परिणाम यह रहा कि- अच्छे दिन जनता के लिए बुरा ख्वाब बन गए, पंजाब चुनाव से जो कांग्रेस की कामयाबी की कहानी शुरू हुई उसने गुजरात, कर्नाटक में लड़खड़ाते-लड़खड़ाते भी जनता के बीच पकड़ बना ली. उपचुनावों में तो बीजेपी को मात मिली, लेकिन राहुल गांधी विजेता बन कर उभरे एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों के बाद!

इन विधानसभा चुनावों में बीजेपी की हार का महत्वपूर्ण कारण प्रदेश की सरकारें नहीं थी, बल्कि पीएम मोदी की केन्द्र सरकार रही, जिसके विभिन्न निर्णयों की सजा इन तीन प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को मिली? तीन राज्यों में हारने के बाद पीएम मोदी को समझ में आया कि वे गलती कर बैठे हैं, लिहाजा सवर्ण आरक्षण जैसे निर्णय लिए किन्तु इनके नतीजे इतने कम समय में कैसे मिल सकते हैं? राहुल गांधी को राजनीति का कमजोर खिलाड़ी मान कर पीएम मोदी ने जो सियासी दांव खेला है, शायद अब खुद पीएम मोदी को ही भारी पड़ेगा, यदि इस बार 2014 नहीं दोहरा पाए!

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