* आदि गुरू शंकराचार्य का जन्म केरल के कालडी गांव में हुआ था.

* वे ब्राह्मण माता-पिता की एकमात्र सन्तान थे, लेकिन बचपन मे ही उनके पिता का देहांत हो गया.

* उनकी रुचि शुरू से ही संन्यास की ओर थी जिसके कारण कम उम्र मे ही माता से आग्रहपूर्वक सन्यास की अनुमति ली और गुरु की तलाश मे घर छोड़ दिया.

* वेदान्त गुरु गोविन्द पाद से ज्ञान प्राप्त करने के पश्चात संपूर्ण देश का भ्रमण किया. उन्होनें देश मंे व्याप्त धार्मिक कुरीतियों को दूर किया और अद्वैत वेदांत की ज्योति प्रज्ज्वलित कर सनातन धर्म की रक्षा हेतु चारों दिशाओं में चार मठों की स्थापना की.

* वहां शंकराचार्य के पद प्रतिष्ठित करके उस पर अपने चार प्रमुख शिष्यों को पदासीन किया. उत्तर मे ज्योतिर्मठ, दक्षिण मे श्रंगेरी, पूर्व में गोवर्धन और पश्चिम में शारदा मठ की स्थापना की. केवल 32 वर्ष की अल्पायु मे पवित्र केदार नाथ धाम में देह त्याग दी.

* शिव के अवतार शंकराचार्य ससम्मान आदि गुरु कहलाते हैं.

आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, मिथुन, सिंह,

कन्या, धनु, मकर

*वृश्चिक राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

- गुरुवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा   रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- शुभ        पहला- अमृत

दूसरा- रोग        दूसरा- चर

तीसरा- उद्वेग     तीसरा- रोग

चौथा- चर        चौथा- काल

पांचवां- लाभ     पांचवां- लाभ

छठा- अमृत     छठा- उद्वेग

सातवां- काल    सातवां- शुभ

आठवां- शुभ    आठवां- अमृत

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!

पंचांग

गुरुवार, 9 मई 2019

शंकराचार्य जयन्ती

सूरदास जयन्ती

रामानुज जयन्ती

टैगोर जयन्ती

*बंगाल शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 13:26:16

मास वैशाख

तिथि पंचमी - 23:28:01 तक

नक्षत्र आर्द्रा - 15:17:41 तक

करण बव - 12:16:01 तक, बालव - 23:28:01 तक

पक्ष शुक्ल

योग धृति - 19:00:16 तक

सूर्योदय 05:34:39

सूर्यास्त 19:00:56

चन्द्र राशि मिथुन

चन्द्रोदय 09:09:00

चन्द्रास्त 23:22:59

ऋतु ग्रीष्म

दिशा शूल: दक्षिण में

राहु काल वास: दक्षिण में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पश्चिम में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


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