नई दिल्ली. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के मात देने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों में में बने ‘महागठबंधन’ ने पांच चरणों में अपना असर दिखा दिया है. इस बात को भाजपा के वरिष्ठ नेता भी अब मान बैठे हैं. BJP के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने कहा है कि, “इस लोकसभा चुनाव में भाजपा बहुमत से पीछे रह सकती है.” 2014 के चुनाव में पूर्ण बहुमत पाने वाले BJP खेमे में अब बेचैनी साफ़ देखी जा सकती है. भले ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और अरुण जेटली बोल रहे हैं, कि भाजपा इस बार भी अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल करेगी.

वरिष्ठ नेता राम माधव ने ब्लूमबर्ग को दिए इन्टरव्यू में कहा, “BJP को उत्तर भारत के उन राज्यों में संभावित तौर पर नुकसान हो सकता है, जहाँ 2014 में रिकॉर्ड जीत मिली थी. अगर हम अपने दम पर 271 सीटें हासिल कर लेते हैं तो यह बहुत अच्छा होगा. उन्होंने कहा, अगर हम सत्ता में लौटते हैं तो विकासपरक नीतियों को आगे बढ़ाएंगे.” बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने संकेत दिया है कि बीजेपी अकेले दम पर बहुमत हासिल नहीं कर पाएगी. राम माधव ने संकेत दिए हैं कि बीजेपी को नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार बनाने के लिए सहयोगियों की जरूरत पड़ सकती है. राम माधव ने ये बयान एक टीवी चैनल के साथ हुए इंटरव्यू में दिया है.

बता दें कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने सभी चुनावी सभाओं में कहते आए हैं कि बीजेपी केंद्र में अपने दम पर बहुमत हासिल करेगी. इससे पहले बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी कहा था कि अगर बालाकोट में भारत ने एयर स्ट्राइक नहीं किया होता तो बीजेपी को बमुश्किल 160 सीटें मिल पाती. हालांकि इंडिया टुडे के साथ बातचीत में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने स्वामी के इस बयान को उनका निजी आकलन बताया था. सुब्रमण्यम स्वामी के इस बयान के बाद बीजेपी के दूसरे कद्दावर नेता ने पार्टी को पूर्ण बहुमत न मिलने की आशंका जताई है. राम माधव ने कहा, "यदि हम अपने बूते 271 सीटें हासिल करते हैं तो हम बहुत खुश होंगे, अन्यथा एनडीए के घटक दलों के साथ मिल कर हम आराम से सरकार बना लेंगे." राम माधव ने ये बयान पांचवें चरण का चुनाव होने से पहले दिया था.

इंटरव्यू के दौरान राम माधव ने यह भी माना कि अगर देश के उत्तरी राज्यों में बीजेपी को कुछ नुकसान होता है तो पार्टी इसकी भरपाई पूर्वोत्तर और पूर्वी राज्यों, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से कर लेगी. राम माधव ने कहा, "पूर्वी भारत में हम लोगों ने अच्छे तरीके से अपना प्रसार किया था, यदि हम ऐसा ही प्रयास दक्षिण भारत में करते तो शायद हम ज्यादा आरामदायक स्थिति में होते." राम माधव ने मतगणना के बाद की संभावनाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनेता के रूप में हमें ध्यान रखना चाहिए कि एंटी इनकंबेंसी की वजह से जो कामयाबी पिछली बार हमने हासिल की थी, जरूरी नहीं कि हम उसे दोहरा पाएं.

राम माधव बीजेपी के कद्दावर नेता और वार्ताकार हैं और पार्टी में उनकी गिनती रणनीतिकारों में होती है. संघ की पृष्ठभूमि से आए राम माधव जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ बीजेपी की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं. इसके अलावा पूर्वोत्तर में बीजेपी का विस्तार करने में भी उनकी अहम भूमिका रही है. बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उत्तर भारत में अप्रत्याशित सफलता हासिल की थी. बीजेपी ने हिन्दी भाषी राज्य हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ , दिल्ली एनसीआर और चंडीगढ़ में 191 सीटें जीती थीं. इन क्षेत्रों में लोकसभा की 226 सीटें हैं.

एनडीए के सहयोगियों ने यहां 11 सीटें जीती थीं. वहीं पिछले दिनों भाजपा के ही वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ‘हफपोस्ट इंडिया’ को दिए इन्टरव्यू में पुलवामा आतंकी हमले को लेकर बड़ी बात कही थी. स्वामी ने कहा था कि, “अगर बालाकोट नहीं होता तो बीजेपी 160 सीट पर सिमट जाती.” स्वामी ने ये भी स्वीकार किया था कि, मोदी सरकार ने पीएम मोदी पुलवामा हमले का चुनाव में फायदा लेना चाहते हैं. इसीलिए पीएम अपनी हर रैली में बालाकोट का जिक्र करते हैं.

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