खबरंदाजी. जहां 2014 में पक्ष-विपक्ष के बड़े-बड़े नेता पीएम नरेन्द्र मोदी के लिए टिप्पणी करने के बारे में कई बार सोचते थे और जनता ऐसी टिप्पणियों पर खामोश नहीं रहती थी, इन पांच वर्षों में ऐसा क्या हो गया कि पीएम मोदी पर लगातार टिप्पणियां की जा रही हैं?

पूर्व क्रिकेटर, पंजाब सरकार में मंत्री और कांग्रेसी नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने न्यूज चैनल आजतक पर खास बातचीत में जो टिप्पणियां की हैं, क्या ऐसी टिप्पणियां 2014 में करना संभव था?

पीएम मोदी इन वर्षों में अपनी सरकार की उपलब्धियों पर फोकस होने के के बजाय लगातार कांग्रेस के सत्तर सालों का इतिहास ही दोहराते रहे, इसी कारण सिद्धू का कहना था कि- मोदी यह धारणा बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्होंने ही 2014 में देश का निर्माण किया था, इसके पहले यहां सिर्फ एक रेलवे स्टेशन और चाय की दुकान थी. क्या उन्होंने देश को 2014 में खोदकर निकाला है? जबकि उनके सत्ता में आने से पहले देश ने हरित क्रांति देखी, श्वेत क्रांति देखी, देश के पास इसरो, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र स्थापित हो चुका था!

इन पांच वर्षों में पीएम मोदी ने असली मुद्दों को तो किनारे कर दिया और पाकिस्तान, आतंकवाद जैसे मुद्दों पर ही जनता को भाषण देते रहे, यही वजह है कि सिद्धू ने कहा कि बुनियादी मुद्दों, मसलन- नौकरी, किसान के संकट, बैंक लोन आदि से लोगों का ध्यान हटाने के लिए मोदी अन्य मुद्दे उठा रहे हैं? बीजेपी की सरकार में बैंक के लोन का संकट बढ़ा है. यह सरकार सिर्फ धन्ना सेठों की मददगार है, मोदी सरकार सिर्फ अंबानी की मददगार है!

जिस भरोसे के साथ पीएम मोदी ने अच्छे दिनों का वादा किया था वह विश्वास हवा हो गया है और इसीलिए सिद्धू का कहना है कि नरेंद्र मोदी अपने झूठ की लहर में डूब जाएंगे. उन्होंने पिछली बार 342 संकल्प किए थे, जिसमें से एक भी पूरा नहीं हुआ, उनका हर वादा अधूरा और झूठा था! 

उनका कहना था कि मैं मोदी के खिलाफ इसलिए बोलता हूं कि आने वाली पीढ़ियां ये बोलें कि जब देश बर्बाद हो रहा था, तो सिद्धू तमाशा नहीं देख रहा था? उन्होंने कहा कि आपने पांच साल क्या किया, 32 लाख करोड़ का कर्ज चढ़ा दिया!

अपने ही वचन नहीं निभाना मोदी को अब भारी पड़ रहा है, यही वजह है कि सिद्धू बोले कि- मोदी ने गंगा सफाई की बात की थी, 15 लाख लाने की बात की थी. विदेशों से 90 लाख करोड़ लाऊंगा कहा था, लेकिन सब झूठ निकला. हिंदुस्तानी संस्कृति में कहा जाता है कि रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाए, पर वचन न जाई. लेकिन मोदी ने अपना एक भी वचन पूरा नहीं किया. उन्होंने तो सारी सरकारी कंपनियों का हक मारकर निजी पूंजीपतियों, अमीरों की जेब में दौलत डाल दी! 

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को सोशल मीडिया पर अज्ञानी साबित करने की तमाम कोशिशों के बावजूद उनका सियासी कद बढ़ता गया और उल्टे पीएम मोदी विरोधियों के निशाने पर आ गए, क्योंकि वे न अपने वादे पूरे कर सके और न ही इरादे साबित कर सके, तभी तो मोदी के वादों पर सिद्धू ने कहा कि- जहीर खान बाएं हाथ से 120-130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गेंद फेकता था, मोदी उससे भी तेज फेंकते हैं. साथ ही कहा कि मैंने इनसे बड़ा फेंकू प्रधानमंत्री आज तक नहीं देखा? इनके कार्यकाल में सरकारी बैंकों का एनपीए 2 लाख करोड़ से बढ़कर 22 लाख करोड़ हो गया, चार लाख करोड़ रुपया तो इन्होंने सीधे अमीरों का माफ कर दिया? ये कह रहे हैं- फिर एक बार, जबकि आम आदमी कह रहा है- बस कर यार!

राम मंदिर और रोजगार के मुद्दे पर बगैर किसी ठोस नतीजे के पांच साल निकल गए तो सिद्धू ने निशाना साधा- नरेंद्र मोदी ने कहा था कि दो करोड़ रोजगार हर साल दूंगा, नोटबंदी से करोड़ों लोगों की नौकरी चली गई? इन्होंने अंबानी को इतने बड़े ठेके दे दिए, ये अमीर लोग कहां से मैन्युफैक्चरिंग कराते हैं, चीन से कराते हैं! सिद्धू ने व्यंग्यबाण चलाया कि- मोदी की सरकार में... न राम मिला, न रोजगार मिला, हर गली में मोबाइल चलाता हुआ एक बेरोजगार मिला!

यही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी कंपनी बीएसएनएल को आज तक 4जी का ठेका नहीं दिया, प्राइवेट कंपनियों को दे दिया? सरकारी कंपनी एनटीपीसी को न देकर अडाणी को विदेशों में बिजली का ठेका दे दिया? सिद्धू ने कहा कि मोदी बस दो योजनाओं के लिए जाने जाएंगे- नौजवानों के लिए पकौड़ा योजना, अमीरों के लिए भगौड़ा योजना! अब पीएम खुद मुद्दों से भाग रहे हैं?

पीएम मोदी को बीजेपी में वंशवाद नजर नहीं आता है, लेकिन कांग्रेस के वंशवाद पर निशाना साधते रहते हैं? मोदी स्वयं तो 2014 में दो लोकसभा सीटों से चुनाव लड़े थे, किन्तु राहुल गांधी पर व्यंग्यबाण चलाते हैं, इसीलिए सिद्धू ने कहा कि मोदी क्यों दो सीटों से चुनाव लड़े थे? उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार पीएम मोदी को बहस के लिए ललकार रहे हैं, लेकिन मोदी इससे भी भाग रहे हैं! 

विरोधियों के भ्रष्टाचार पर निशाना साधने वाले मोदी का राफेल को लेकर अलग नजरिया है, तभी तो सिद्धू कहते हैं कि मोदी ही कहते थे कि दस रुपये का पेन लो तो पक्का बिल लो, आज हम राफेल का बिल मांगते हैं तो वह क्यों इतना बिलबिला रहे हैं? उन्होंने पीएम मोदी के लिए कहा- आए थे गंगा के लाल बनकर, जाएंगे राफेल के दलाल बनकर!

वर्ष 2014 को याद करते हुए सिद्धू ने मोदी लहर पर कहा कि- पहले मोदी-मोदी की आवाज होती थी, आज बस आप एक बार चौकीदार बोल लो, देख लो लोगों के बीच से कैसी आवाज आती है?

मोदी के सियासी डर को भी सिद्धू ने नकार दिया, मोदी के डर से सभी दलों के एकसाथ आने पर सिद्धू ने कहा कि- मोदी कौन से तांत्या टोपे हैं, जो लोग उनसे डर जाएंगे? मोदी खुद सारे मुद्दों से डरकर भाग रहे हैं! अपने ही वादों का दोबारा जिक्र नहीं कर पा रहे हैं? काबिलियत का आकलन कैसे होता है? आपने अपने वादों को कितना पूरा किया!

जब पीएम मोदी स्वयं अमर्यादित भाषण दे रहे हैं, तो किसी और से यह उम्मीद कैसे रखी जाए कि वह मर्यादित बयान देगा? यही वजह है कि जब पीएम मोदी ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लेकर अमर्यादित बात कही तो, पलटकर उन्होंने भी उसी भाषा में जवाब दे दिया. यही नहीं, सीएम गहलोत ने ट्वीट भी किया कि- अभी मोदीजी जोधपुर आये, मेरे बारे में जो कह के गए आपने पढ़ा होगा, यह प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुकूल नहीं होता है. मुख्यमंत्री किसी भी पार्टी का हो उसकी गरिमा, मान-सम्मान की रक्षा करने का काम प्रधानमंत्री का भी होता है!

इतना ही नहीं, अभी चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को लेकर पीएम मोदी ने जो बयान दिया है, वह किसी भी रूप में प्रधानमंत्री जैसे पद की मर्यादा के अनुकुल नहीं माना जा सकता है?

सीएम गहलोत ने इस पर भी ट्वीट किया कि- मोदी जी के मुंह से कल राजीव जी के बारे में जो शब्द निकले हैं वो बेहद अनफॉर्चुनेट हैं. देश के प्रधानमंत्री अगर इस प्रकार की भाषा काम में लेंगे तो देश के लिए बहुत दुर्भाग्य की बात है! 

वर्ष 2014 जैसी कामयाबी दर्ज करवाने वाले नरेन्द्र मोदी अकेले प्रधानमंत्री नहीं हैं, क्योंकि अपने-अपने समय के सापेक्ष कई प्रधानमंत्री लोकप्रियता की बुलंदियों पर रहे हैं? इसलिए गंभीरता से सोचने की जरूरत है कि- पीएम नरेन्द्र मोदी पर ऐसी टिप्पणियों के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या स्वयं नरेन्द्र मोदी!

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