हर शादी से पहले एक प्री-पार्टी होती है, जिसे संगीत कहा जाता है. हालांकि पहले और अब की संगीत की रस्म में बहुत अंतर आ गया है. पहले जहां औरतें ढोलक लेकर बन्ना-बन्नी गाती थीं, वहीं अब संगीत नाइट में स्टेज परफॉर्मेंस होने लगी हैं. दोनों पक्षों के लोग महिलाएं और पुरूष दोनों ही स्टेज पर प्रस्तुति देते हैं. खासतौर से शादी की इस रस्म को निभाने के लिए कोरियोग्राफर द्वारा डांस ट्रेनिंग भी ली जाने लगी है.

संगीत की रस्म पारंपरिक रूप से दो परिवारों के लिए एक रोमांचक पल होता है. इस रस्म में दो परिरवारों को एकदूजे को जानने और परखने का मौका मिलता है. इसके अलावा संगीत किसी भी शादी समारोह में मजा और रंग जोड़ देता है. पुराने समय में शादी के की तैयारियों के सभी तनावों को दूर करने के लिए संगीत की रस्म आयोजित की जाती थी और आज भी इस रस्म के जरिए घर की महिलाएं खुद को तनावमुक्त रखने का प्रयास करती हैं. इस तरह से यह समारोह साबित करता है कि भारतीयों के जीवन में विवाह जैसा पल कितना महत्वपूर्ण है.

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