जी हाँ, इंसान अगर चाहे तो समस्त विश्व को अपनी इन्द्रियों से जीत सकता है, इंसान के मष्तिष्क में इतनी शक्ति है. इन्ही अद्भुत शक्तियों में से एक है टेलीपेथी. टेलीपैथी को हिन्दी में दूरानुभूति कहते हैं. 'टेली' शब्द से ही टेलीफोन, टेलीविजन आदि शब्द बने हैं. ये सभी दूर के संदेश और चित्र को पकड़ने वाले यंत्र हैं. आदमी के मस्तिष्क में भी इस तरह की क्षमता होती है. कोई व्यक्ति जब किसी के मन की बात जान ले या दूर घट रही घटना को पकड़कर उसका वर्णन कर दे तो उसे पारेंद्रिय ज्ञान से संपन्न व्यक्ति कहा जाता है. महाभारतकाल में संजय के पास यह क्षमता थी. उन्होंने दूर चल रहे युद्ध का वर्णन धृतराष्ट्र को कह सुनाया था.

भविष्य का आभास कर लेना भी टेलीपैथिक विद्या के अंतर्गत ही आता है. किसी को देखकर उसके मन की बात भांप लेने की शक्ति हासिल करना तो बहुत ही आसान है. दरअसल, टेलीपैथी दो व्यक्तियों के बीच विचारों और भावनाओं के आदान-प्रदान को भी कहते हैं. इस विद्या में हमारी 5 ज्ञानेंद्रियों का इस्तेमाल नहीं होता, यानी इसमें देखने, सुनने, सूंघने, छूने और चखने की शक्ति का इस्तेमाल नहीं किया जाता. यह हमारे मन और मस्तिष्क की शक्ति होती है और यह ध्यान तथा योग के अभ्यास से हासिल की जा सकती है.

न की स्थिति में संयम का अर्थ है कि जो भी सोचा या समझा जा रहा है उसमें साक्षी रहने की स्थिति. ध्यान से देखने और सुनने की क्षमता बढ़ाएंगे तो सामने वाले के मन की आवाज भी सुनाई देगी. इसके लिए नियमित अभ्यास की आवश्यकता है. 

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


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