बुवाई की विधियॉं

समतल विधि

इस विधि में 90 से०मी० के अन्तराल पर 7-10 सें०मी० गहरे कुंड डेल्टा हल से बनाकर गन्ना बोया जाता है. वस्तुतः यह विधि साधारण मृदा परिस्थितियों में उन कृषकों के लिये उपयुक्त हैं जिनके पास सिंचाई, खाद तथा श्रम के साधन सामान्य हों. बुवाई के उपरान्त एक भारी पाटा लगाना चाहिये.

नाली विधि

इस विधि में बुवाई के एक या डेढ़ माह पूर्व 90 से०मी० के अन्तराल पर लगभग 20-25 से०मी० गहरी नालियॉं बना ली जाती हैं. इस प्रकार तैयार नाली में गोबर की खाद डालकर सिंचाई व गुडई करके मिट्टी को अच्छी प्रकार तैयार कर लिया जाता है. जमाव के उपरान्त फसल के क्रमिक बढ वार के साथ मेड की मिट्टी नाली में पौधे की जड पर गिराते हैं जिससे अन्ततः नाली के स्थान पर मेड तथा मेड के स्थान पर नाली बन जाती हैं जो सिंचाई नाली के साथ-साथ वर्षाकाल में जल निकास का कार्य करती है. यह विधि दोमट भूमि तथा भरपूर निवेश-उपलब्धता के लिये उपयुक्त है. इस विधि से अपेक्षाकृत उपज होती है, परन्तु श्रम अधिक लगता है.

दोहरी पंक्ति विधि

इस विधि में 90-30-90 से०मी० के अन्तराल पर अच्छी प्रकार तैयार खेत में लगभग 10से०मी० गहरे कूंड बना लिये जाते हैं. यह विधि भरपूर खाद पानी की उपलब्धता में अधिक उपजाऊ भूमि के लिये उपयुक्त है. इस विधि से गन्ने की अधिक उपज प्राप्त होती हैः

गुड़ाई

गन्ने में पौधों की जड़ों को नमी व वायु उपलब्ध कराने तथा खर-पतवार नियंत्रण के दृष्टिकोण से गुड़ाई अति आवश्यक है. सामान्यत: प्रत्येक सिंचाई के पश्चात एक गुड़ाई की जानी चाहिए. गुड़ाई करने से उर्वरक भी मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाता है. गुड़ाई के लिए कस्सी/ फावड़ा/कल्टीवेटर का प्रयोग किया जा सकता है.

सूखी पत्ती बिछाना

ग्रीष्म ऋतु में मृदा नमी के संरक्षण एवं खर-पतवार नियंत्रण के लिए गन्ने की पंक्तियों के मध्य गन्ने की सूखी पत्तियों की 8-10 से.मी. मोटी तह बिछाना लाभदायक होता है. फौजी कीट आदि से बचाव के लिये सूखी पत्ती की तह पर मैलाथियान 5 प्रतिशत या लिण्डेन धूल 1.3 प्रतिशत का 25कि०ग्रा०/हे० या फेनवलरेट 0.4 प्रतिशत धूल को 25 कि०ग्रा० प्रति हेक्टेयर बुरकाव करना चाहिए. वर्षा ऋतु में सूखी पत्ती सड कर कम्पोस्ट खाद का काम भी करती है. सूखी पत्ती बिछाने से अंकुरवेधक का आपतन भी कम होता है.

यांत्रिक मेथड

गन्ने के खेत को कस्सी/कुदाली/फावड /कल्टीवेटर आदि से गुडई करके खरपतवार नियंत्रण किया जा सकता है. बुवाई के एक सप्ताह के अन्दर अंधी गुडई तथा प्रत्येक सिंचाई के बाद एक गुडई ओट आने पर करनी चाहिए श्रमिकों की कमी की स्थिति में गन्ने की बढ वार के प्रारम्भ में दो बैलों अथवा ट्रैक्टर चलित कल्टीवेटर द्वारा अप्रैल जून में गुडई करनी चाहिए.

सूखी पत्ती मेथड

जमाव पूरा हो जाने के उपरान्त मैदानी क्षेत्रों में गन्ने की दो पंक्तियों के मध्य 8-12 से०मी० सूखी पत्तियों की तह तथा तरायी क्षेत्रों 10-15 से०मी० मोटी तह बिछानी चाहिए. ध्यान रहे कि कीट एवं प्रभावित खेत से सूखी पत्ती नहीं लेना चाहिए. सावधानी के तौर 25 कि०ग्रा० मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल या लिण्डेन 1.3प्रतिशत धूल या फेनवलरेट 0.4 प्रतिशत धूल का प्रतिहेक्टेयर की दर से सूखी पत्तियो पर धूसरण करना चाहिए.

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