चुनाव-चर्चा. यूपी की वाराणसी लोकसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ने को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने स्वयं ही यह साफ कर दिया है कि वे क्यों चुनाव नहीं लड़ रहीं हैं? 

खबर है कि... प्रियंका गांधी ने कहा कि मेरे कंधों पर पूरे यूपी में प्रचार की जिम्मेदारी है, एक नहीं, 41 सीटों पर पार्टी को जिताने का जिम्मा है और एक स्थान पर रहकर ऐसा संभव नहीं था. मतलब... इस वजह से वे वाराणसी से चुनाव नहीं लड़ रही हैं, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे एक वजह मान रहे हैं, जबकि कुछ और भी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष कारण हैं, जो प्रियंका गांधी ने नरेन्द्र मोदी को चुनौती देने का मन बदल लिया!

सबसे बड़ा कारण है, विपक्ष का एकजुट नहीं होना! खबरें हैं कि बतौर संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार प्रियंका गांधी के लिए मायावती सहमत नहीं थी, जिसके कारण सपा ने वाराणसी से अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी? शायद, मुलायम सिंह भी प्रियंका गांधी की उम्मीदवारी के लिए राजी नहीं होंगे? विपक्ष के वोट बिखरने के कारण ही पिछली बार अरविंद केजरीवाल, नरेन्द्र मोदी को कड़ी टक्कर नहीं दे पाए थे!

प्रियंका गांधी के लिए यह पहला चुनाव है और इसलिए बजाय वाराणसी में सम्मानजनक हार के, अमेठी में सुरक्षित जीत पर कांग्रेस ज्यादा फोकस है?

राहुल गांधी दो जगह से चुनाव लड़ रहे हैं और वे दोनों जगह से चुनाव जीतते हैं तो एक सीट खाली करनी होगी, जाहिर है- ऐसी सुरक्षित सीट प्रियंका गांधी को लोकसभा में सुरक्षित प्रवेश दिला सकती है!

याद रहे, कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने भी प्रियंका गांधी के वाराणसी से पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ने का कारण बताया था कि- वाराणसी से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला खुद प्रियंका गांधी का था. प्रियंका गांधी के चुनाव नहीं लड़ने के निर्णय के संबंध में जब प्रेस ने उनसे पूछा था तो पित्रोदा ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष (राहुल गांधी) ने चुनाव लड़ने का अंतिम फैसला उनके (प्रियंका गांधी) के ऊपर छोड़ दिया था.

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यदि प्रियंका गांधी चुनाव लड़ती तो कड़ी टक्कर भले ही दे पातीं, लेकिन जीत की राह आसान नहीं थी, क्योंकि पिछले चुनाव में नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से 3 लाख 71 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी. इसके अलावा सपा-बसपा का संयुक्त उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में है, इसलिए गैर-भाजपाई वोट बिखरना तय है.

देश की राजनीति में प्रियंका गांधी की एक अलग पहचान बन चुकी है, इसलिए पहली ही हार के साथ राजनीतिक करियर शुरू करना नुकसान दे सकता था, मतलब- प्रियंका यदि यहां से हार जातीं तो उनके राजनीतिक करियर पर प्रश्नचिन्ह लग जाता? यही नहीं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उनके पाॅलिटिकल क्रेज पर भी सवालिया निशान लग जाता?

सियासी सयानों का मानना है कि प्रियंका गांधी ने चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लेकर गांधी परिवार कोे सारे सियासी पत्ते दाव पर लगाने से बचा लिया है!

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


1. RBI के खिलाफ आजादी के बाद पहली बार सरकार ने किया विशेष शक्ति का इस्तेमाल

2. CM योगी का राम मंदिर पर बड़ा बयान- धैर्य रखें, दिवाली पर खुशखबरी दूंगा

3. मध्यप्रदेश स्थापना दिवस विशेष...देखें हैं रंग हजार

4. न्यूनतम वेतन पर 'आप' की जीत, दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर SC ने लगाई रोक

5. सार्वजनिक वाहनों में अब जरूरी होगा लोकेशन ट्रेकिंग एवं आपात बटन

6. 50 पैसे का ये दुर्लभ सिक्का आपको दिला सकता है 51 हजार 500 रुपए, जानें कैसे

7. ईज ऑफ डुइंग बिजनेस: भारत 23 पायदान की छलांग लगा 100 से पहुंचा 77 वें स्थान पर

8. दिवाली पर घर जाने के लिए ऐसे कराएं कन्फर्म तत्काल टिकट

9. MeToo:HC ने खारिज की छानबीन के लिए निर्देश की मांग वाली याचिका

10. भारत में आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने एक दशक में 10 करोड़ नए रोजगार की जरूरत

11. मंगलनाथ की भात पूजा सहित इन उपायों से कर्ज संकट कम होता

************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।