कलाकार- मानव कौल,नंदिता दास,सौरभ शुक्ला

निर्देशक- सौमित्र रनाडे

मूवी टाइप- ड्रामा

अवधि- 1 घंटा 34 मिनट

अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है यह नाम सुनते ही सबसे पहले हमें याद आते हैं नसरुद्दीन शाह! निर्देशक शहीद मिर्जा की 1980 में बनी यह फिल्म आम आदमी का सिस्टम के प्रति प्रति गुस्सा सामने लाने की कहानी है. इस बेहतरीन फिल्म के नाम से ही अब साल 2019 में आई है निर्देशक सौमित्र रानाडे की यह फिल्म!  इन दोनों ही फिल्मों में एक ही चीज कॉमन है कि जब कोई अपने फायदे के लिए एक आम आदमी का इस्तेमाल करता है तो वह अपने आप को हताश और बेबस ही पाता है. वह कितना ही गुस्सा कर ले उसके हाथ में कुछ भी नहीं! जाहिर तौर पर 2019 के मुताबिक फिल्म के ट्रीटमेंट में आज के हिसाब से बदलाव है, मगर मूल भावना वही है!

कहानी: स्टोरी अल्बर्ट पिंटो (मानव कौल) की है जो स्टेला (नंदिता दास) को प्यार करता है. पिंटो की लाइफ में टर्निंग पॉइंट उस वक्त आता है जब एक सरकारी आफिस में उच्च पद पर बैठे अल्बर्ट पिंटो का पिता को अपने ही विभाग में भ्रष्टाचार के झूठे आरोप में सस्पेंड कर दिया जाता है. पिंटो के पिता यह बर्दाश्त नहीं कर पाते और इस सदमे के चलते खुदकुशी कर लेते है. पिंटो इस हादसे के बाद बुरी तरह नर्वस हो जाता है, वह बहकी बहकी बातें करने लगता है और एक दिन वह अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए निकल पड़ता है. पिंटो के इस बदले के सफर में में उसका एक साथी (सौरभ शुक्ला) भी है. आगे क्या होता है जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

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