भोपाल. लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की पांचवीं सूची में ग्वालियर, भिंड और धार के प्रत्याशियों की घोषणा कर दी. अब केवल इंदौर के प्रत्याशी पर फैसला होना बाकी है. भिंड और धार में बिल्कुल नए चेहरे दिए गए हैं तो ग्वालियर में पिछले दो लोकसभा चुनाव में हारे प्रत्याशी अशोक सिंह को टिकट दिया गया है. इधर, इंदौर में प्रत्याशी चयन को लेकर कांग्रेस अभी भाजपा के फैसले का इंतजार कर रही है.

मध्य प्रदेश में 12 मई को होने वाले तीसरे चरण के मतदान वाले ग्वालियर और भिंड और 19 मई को चौथे चरण के मतदान वाले धार लोकसभा क्षेत्र के लिए कांग्रेस ने शनिवार को प्रत्याशियों का एलान कर दिया. ग्वालियर में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी राजे को प्रत्याशी बनाए जाने के आग्रह को सिंधिया द्वारा इनकार कर दिए जाने के बाद तेजी से अशोक सिंह के नाम पर नेताओं ने दबाव बनाया था.

सिंधिया उनके नाम पर लंबे समय तक तैयार नहीं थे और उन्होंने अपने कुछ अन्य समर्थकों के नाम को आगे बढ़ाया था. अशोक सिंह पिछले दो लोकसभा चुनाव हार चुके हैं. 2009 वे यशोधरा राजे सिंधिया से 27 हजार से भी कम वोट से हारे थे तो 2014 में मोदी लहर में भी नरेंद्र सिंह तोमर से 29 हजार वोट से पीछे रह गए थे.

भिंड व धार में नए चेहरे

वहीं, भिंड और धार में कांग्रेस ने नए चेहरे दिए हैं. भिंड में दिल्ली विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई करने वाले देवाशीष जरारिया को टिकट दिया है. जरारिया दिल्ली विवि के अच्छे वक्ता होने के कारण टीवी चैनलों में बसपा विचारधारा समर्थक के रूप में जाते थे. विधानसभा चुनाव 2018 के पहले दिग्विजय सिंह ने उन्हें कांग्रेस ज्वाइन करवाई थी. भिंड सीट से भाजपा के पूर्व सांसद अशोक अर्गल का कांग्रेस से टिकट के लिए नाम चला था, लेकिन उनका कांग्रेस में प्रवेश नहीं हुआ तो देवाशीष का नाम चर्चा में आया.

सिंधिया इस नाम पर सहमत नहीं थे, जबकि दिग्विजय सिंह और भिंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. गोविंद सिंह, जरारिया को टिकट दिलाने के लिए कोशिश कर रहे थे. सिंधिया ने पूर्व सांसद बारेलाल जाटव का नाम आगे बढ़ाया. आखिरकार हाईकमान ने शनिवार को जरारिया का टिकट फाइनल किया.

इधर, धार में पूर्व जिला पंचायत सदस्य दिनेश गिरवाल को कांग्रेस ने टिकट दिया है. दिनेश की पत्नी अभी जिला पंचायत सदस्य हैं. वे एनएसयूआई और युवा कांग्रेस की जिला इकाइयों में विभिन्न् पदों पर रहे हैं. गिरवाल विधायक राजवर्धन सिंह दत्तीगांव के समर्थक हैं. उनके टिकट को फाइनल करवाने में उनकी महती भूमिका है. राजवर्धन सिंह सांसद सिंधिया के समर्थक माने जाते हैं. इस सीट पर जयस (जय आदिवासी युवा संगठन) ने अपने किसी नेता को टिकट देने का दबाव बनाया था, जिसे कांग्रेस हाईकमान ने नकार कर दिया.

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