* जो लोग अंक ज्योतिष में विश्वास रखते हैं, वे हर शुक्ल पक्ष में अपनी जन्मतिथि के सापेक्ष देवी के उस स्वरूप की पूजा और उस दिन का व्रत रख सकते हैं.

* पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इनका प्रथम स्वरूप- शेैलपुत्री है. इनकी पूजा नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा को होती है. जिन श्रद्धालुओं की जन्म दिनांक किसी भी महीने की- 1, 10, 19, 28 तारीख है या तिथि- एकम और दशमी है, वे देवी की इस स्वरूप की पूजा-अर्चना करें, पद-प्रतिष्ठा प्राप्त होगी!

* सच्चिदानन्द ब्रह्यस्वरूप की प्राप्ति कराने की प्रकृति होने के कारण देवी का द्वितीय स्वरूप- ब्रह्मचारिणी है. इस स्वरूप की पूजा द्वितीया तिथि को होती है. जिन श्रद्धालुओं की जन्म दिनांक किसी भी महीने की- 2, 11, 20, 29 तारीख है या तिथि- द्वितीया और एकादशी है, वे देवी की इस स्वरूप की पूजा-अर्चना करें, मानसिक शांति मिलेगी!

* देवी का तीसरा स्वरूप- चन्द्रघण्टा है. इस स्वरूप की पूजा तृतीया तिथि को होती है. जिन श्रद्धालुओं की जन्म दिनांक किसी भी महीने की- 3, 12, 30 तारीख है या तिथि- तृतीया, द्वादशी और अमावस्या है, वे देवी की इस स्वरूप की पूजा-अर्चना करें, सुख-समृद्धि मिलेगी!

* देवी का चौथा स्वरूप- कूष्माण्डा है. इस स्वरूप की पूजा चतुर्थी तिथि को की जाती है. जिन श्रद्धालुओं की जन्म दिनांक किसी भी महीने की- 4, 13, 22, 31 तारीख है या तिथि- चतुर्थी और त्रयोदशी है, वे देवी की इस स्वरूप की पूजा-अर्चना करें, जीवन में सफलता मिलेगी!

* देवी का पांचवां स्वरूप- स्कन्दमाता है. नवरात्रि के पांचवें दिन इस स्वरूप की पूजा-अर्चना होती है. जिन श्रद्धालुओं की जन्म दिनांक किसी भी महीने की- 5, 14, 23 तारीख है या तिथि- पंचमी और चतुर्दशी है, वे देवी की इस स्वरूप की पूजा-अर्चना करें, संतान-सुख मिलेगा!

* देवताओं की कार्य सिद्धि हेतु महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट होने के कारण देवी का छठा स्वरूप- कात्यायनी है. षष्ठी तिथि में इनकी पूजा की जाती है. जिन श्रद्धालुओं की जन्म दिनांक किसी भी महीने की- 6, 15, 24 तारीख है या तिथि- षष्ठी और पूर्णिमा है, वे देवी की इस स्वरूप की पूजा-अर्चना करें, भौतिक सुख मिलेगा!

* देवी का सातवां स्वरूप है- कालरात्रि. सप्तमी तिथि को इनकी पूजा की जाती है. जिन श्रद्धालुओं की जन्म दिनांक किसी भी महीने की- 7, 16, 25 तारीख है या तिथि- सप्तमी है, वे देवी की इस स्वरूप की पूजा-अर्चना करें, सौभाग्य की प्राप्ति होगी!

* देवी का आठवां स्वरूप है- महागौरी. नवरात्रि की अष्टमी तिथि को इस स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है. जिन श्रद्धालुओं की जन्म दिनांक किसी भी महीने की- 8, 17, 26 तारीख है या तिथि- अष्टमी है, वे देवी की इस स्वरूप की पूजा-अर्चना करें, कष्टों से मुक्ति मिलेगी!

* देवी का नौवां स्वरूप है- सिद्धिदात्री. नवमी तिथि पर इनकी पूजा-अर्चना की जाती है. जिन श्रद्धालुओं की जन्म दिनांक किसी भी महीने की- 9, 18, 27 तारीख है या तिथि- नवमी है, वे सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा-अर्चना करें, सिद्धि मिलेगी, पराक्रम बढ़ेगा!

* नवरात्रि के शुभ अवसर पर देवी के किसी भी स्वरूप की पूजा करें- शांत मन से, शुद्ध तन से और संयमित जीवन से देवी आराधना करें, जीवन में सुख-समृद्धि-सफलता के नए आयाम स्थापित होंगे!

आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम 30:00 तक:

वृषभ, कर्क, कन्या, 

तुला, मकर, कुम्भ

*धनु राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

उसके पश्चात - 

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मिथुन, सिंह, तुला, 

वृश्चिक, कुम्भ, मीन

*मकर राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित हैव्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्यग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव हैइसलिए अच्छे समयका सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

  - रविवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा             रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- उद्वेग                पहला- शुभ

दूसरा- चर                       दूसरा- अमृत

तीसरा- लाभ                 तीसरा- चर

चौथा- अमृत                  चौथा- रोग

पांचवां- काल               पांचवां- काल

छठा- शुभ                        छठा- लाभ

सातवां- रोग               सातवां- उद्वेग

आठवां- उद्वेग                 आठवां- शुभ

चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिएकिया जाता है.  

दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

अमृतशुभलाभ और चरइन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेषतीन चौघडिय़ाओंरोगकाल और उद्वेगको उपयुक्त नहीं माना जाता है.

यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैंस्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद्के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ  गंवाएं क्योंकिज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है

पंचांग  

रविवार, 14 अप्रैल 2019

राम नवमी *वैष्णव

सोलर नववर्ष

मेष संक्रान्ति

बैसाखी

पुथन्डू

अम्बेडकर जयन्ती

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5120

दिन काल 12:48:41

मास चैत्र

तिथि नवमी - 09:36:46 तक

नक्षत्र पुष्य - 07:40:18 तक

करण कौलव - 09:36:46 तक, तैतिल - 20:25:34 तक

पक्ष शुक्ल

योग धृति - 08:05:04 तक, शूल - 28:59:08 तक

सूर्योदय 05:57:28

सूर्यास्त 18:46:10

चन्द्र राशि कर्क

चन्द्रोदय 13:20:00

चन्द्रास्त 27:08:59

ऋतु वसंत

दिशा शूल: पश्चिम में

राहु काल वास: उत्तर में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: उत्तर में 30:00 तक,पूर्व में 30:00 से

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


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