पलपल संवाददाता, जबलपुर. यदि कर्मबन्ध से मुक्ति चाहिए तो वीतराग का भाव कीजिए. इसके लिए बिम्ब का दर्शन भी लाभदायक है. इस आशय के उद्गार शुक्रवार को दयोदय तीर्थ में आचार्य विद्यासागर महाराज ने अभिव्यक्त किए.

उन्होंने हीरे का उदाहरण देते हुए कहा कि हीरा लोहे की मार से भी मिटता नहीं बल्कि दूर पड़ा मुस्कुराता है. सिर्फ अग्नि का ताप उसे भस्म बना सकता है. हीरे की वह भस्म औषधि के रूप में सेवन करके रोग दूर किए जा सकते हैं. इसी तरह वीतराग के भाव से शरीर तो बचा रहता है, पर कर्मक्षय हो जाता है, जो मोक्ष के लिए अनिवार्य है.

इन्हें मिला आहार चर्या का सौभाग्य

शुक्रवार को आचार्य श्री की आहार चर्या का सौभाग्य सुषमा जैन, सौरभ, गौरव मंटी, अंकित अरिहंत कलेक्शन को मिला.

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