मकैनिकल इंजीनियर रामवीर तंवर ने अपनी नौकरी को बाय-बाय कह दिया. रामवीर मकैनिकल इंजीनियर में बीटेक हैं और एक एमएनसी में काम करते थे. ग्रेटर नोएडा में रहने वाले रामवीर ने कहा, 'जल संरक्षण के काम में करियर मेरे लिए एसी ऑफिस में बैठने से ज्यादा अहमियत रखता है.' पिछले 5 सालों में रामवीर 10 तालाबों को जिंदा कर चुके हैं.

ग्रेटर नोएडा गौतम बुद्ध नगर जिले का हिस्सा है और यहां सैकड़ों छोटे-छोटे तालाब हैं, जिनकी देखरेख नहीं हो पा रही थी. अब रामवीर ने यह बीड़ा उठाया है. रामवीर ग्रेटर नोएडा के ही एक किसान के बेटे हैं. 60 एकड़ में फैले सूरजपुर वेटलैंड जैसे बड़े जलाशयों को तो वन संरक्षण नियमों के मुताबिक संरक्षण मिला हुआ है लेकिन डाढा गांव में आए दिन पानी की दिक्कत पेश आती थी. यहीं पले-बढ़े रामवीर देखते थे कि किस तरह छोटे-छोटे जलाशय सूख रहे हैं और उनका इस्तेमाल कूड़ा फेंकने के लिए होना लगा, जबकि इन्हीं जलाशयों पर यहां रहने वाले कई परिवारों की पानी की जरूरत निर्भर करती है. वह बताते हैं, 'मैं जलाशयों के साथ होते इस गलत व्यवहार को देखते-देखते हुए बड़ा हुआ हूं.'

21 साल की उम्र में जब रामवीर कॉलेज स्टूडेंट थे, उन्होंने जलाशयों की सफाई के लिए गांववालों की जल चौपाल लगाई. नौकरी छोड़ने के बाद रामवीर पूरी तरह इसी काम में लग गए.

धीरे-धीरे इस काम के लिए वॉलंटियरों की टीमें बनाई गईं. रामवीर ने बताया, जल्द जल चौपाल एक ऐसा प्लैटफॉर्म बन गई, जो एक गांव से दूसरे गांव जाकर लोगों को जल संरक्षण के बारे में बताते हैं. वे बताते हैं कि जलाशयों में कूड़ा फेंकना बंद करने की जरूरत है. वॉलंटियरों ने सबसे पहले 2014 में डाबरा गांव में जलाशय की सफाई का काम किया. रामवीर बताते हैं कि उस जलाशय में बहुत कूड़ा था. उस साफ करने में महीनों लग गए. इसके बाद एक फिल्टर सिस्सटम बनाकर हमने पानी की सफाई की, उसे सिंचाई के लिए किसानों के उपयोग लायक बनाया. जलाशय को साफ बनाए रखने के लिए उसने मछलीपालन को प्रोत्साहित किया गया.

जलाशयों को जिंदा करने के लिए और लोगों की जरूरत थी, इसके लिए रामवीर ने सोशल मीडिया का सहारा लिया. वह बताते हैं, हमारे फेसबुक पेज 'बूंद-बूंद पानी' के अब एक लाख से ज्यादा सदस्य हैं. जब भी हमें वॉलंटिअर्स की जरूरत हुई, हम पेज पर अनाउंस कर देते और हर बार करीब 100 लोग संरक्षण के इस काम लिए पहुंच जाते, फिर चाहे इलाका दूरदराज का ही क्यों न हो.

रामवीर ने अपना जॉब छोड़ा और शाम के समय ट्यूशन देकर घर का खर्च चलाते हैं. उनके काम ने लोगों का ध्यान तब खींचा, जब पिछले साल उन्होंने #सेल्फीविदपॉन्ड के के साथ गांववालों को अपने इलाके के जलाशयों की तस्वीरें भेजने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया. इसके बा से स्पॉन्सरशिप के मौके आए. रामवीर ने बताया, 'काफी मेहनत के बाद हमें साल 2018 में 2.5 लाख की सीएसआर फंडिंग मिली.' उन्होंने पूरे पैसे को जलाशयों को जीवंत करने के काम पर लगा दिए.

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