नयी दिल्ली. आम चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा के पांच दिन बाद बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि राजनीतिक क्षेत्र की उस सरकारी नौकरी से कतई तुलना नहीं की जा सकती जिसमें निश्चित उम्र पूरी करने पर हर कर्मचारी को रिटायर होना ही पड़ता है. 'ताई' के नाम से मशहूर भाजपा की वरिष्ठ नेता महाजन का यह अहम बयान ऐसे वक्त सामने आया है, जब पार्टी द्वारा 75 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को लोकसभा चुनाव नहीं लड़ाने के फॉर्मूले पर सियासी गलियारों में चर्चा जारी है.

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, "राजनीति से सरकारी नौकरी की बिल्कुल भी तुलना नहीं की जा सकती. सरकारी नौकरी में सेवानिवृत्ति की उम्र पहले से तय होती है. लेकिन राजनीति में ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि आम जनता के दुःख-सुख से सीधे जुड़े राजनेता न तो घड़ी देखकर काम करते हैं, न ही वे बंधा-बंधाया जीवन जीते हैं." उन्होंने याद दिलाया, "मोरारजी देसाई अपनी उम्र के 81वें साल में देश के प्रधानमंत्री बने थे."

इंदौर से वर्ष 1989 से लगातार आठ बार चुनाव जीतने वाली महाजन को मध्यप्रदेश की इस सीट से भाजपा के टिकट का शीर्ष दावेदार माना जा रहा था. इस बीच, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि यह उनकी पार्टी का फैसला है कि 75 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को लोकसभा चुनावों का टिकट नहीं दिया जायेगा. शाह ने इस साक्षात्कार में हालांकि महाजन का नाम नहीं लिया था. लेकिन 12 अप्रैल को 76 वर्ष की होने जा रहीं महाजन ने पांच अप्रैल को खुद घोषणा कर दी थी कि वह लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी.

शाह के इस बयान के बारे में पूछे जाने पर महाजन ने कहा, "लोकसभा अध्यक्ष के पद पर आसीन होने की मर्यादा के कारण मैं पिछले पांच साल के दौरान केंद्रीय भाजपा संगठन की बैठकों में शामिल नहीं हुई हूं. फिलहाल मुझे इसकी प्रामाणिक जानकारी नहीं है कि उम्रसीमा की नीति पार्टी की किस बैठक में तय की गयी है? इस बारे में खुद शाह ही कुछ कह सकते हैं." भाजपा की वरिष्ठम नेताओं में शुमार महाजन ने हालांकि कहा, "अगर उम्र को लेकर भाजपा संगठन में वाकई कोई नीति तय की गयी है, तो सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को इसका पालन करना ही है."

महाजन ने एक सवाल पर कहा, "अभी मेरी इतनी उम्र भी नहीं हुई है कि मुझे राजनीति से संन्यास लेना पड़े. मैं भाजपा के लिये आज भी काम कर रही हूं और आगे भी करती रहूंगी." उन्होंने विपक्षी दलों के "महागठबंधन" पर निशाना साधते हुए कहा, "केंद्र में सरकार बनाने के लिये किसी भी सियासी खेमे के पास कम से कम 272 लोकसभा सीटें होनी चाहिये. लेकिन तथाकथित महागठबंधन में शामिल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इतनी सीटों पर मिलकर चुनाव तक नहीं लड़ रहे हैं. इस गठजोड़ के दल अलग-अलग राज्यों में बंटे हैं और प्रधानमंत्री पद की दावेदारी के संबंध में किसी एक विपक्षी नेता के नाम पर सहमत भी नहीं हैं."

महाजन ने कटाक्ष किया, "मुझे तो लगता है कि चुनावी महागठबंधन में शामिल विपक्षी दलों का मकसद सरकार बनाना है ही नहीं. इनका असल लक्ष्य है कि इस बार उनका कोई नेता कम से कम लोकसभा में विपक्ष के नेता की कुर्सी किसी तरह हासिल कर ले." वरिष्ठ भाजपा नेता ने न्यूनतम आय योजना (न्याय) के तहत गरीब परिवारों को हर महीने 6,000 रुपये देने को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की महत्वाकांक्षी चुनावी घोषणा पर भी सवाल उठाये. उन्होंने कहा, "गरीबी हटाओ का नारा देने वाली कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों में गरीबों ने हमेशा ठोकरें ही खायी हैं और अन्याय झेला है. राहुल जरा हिसाब तो लगायें कि क्या कोई सरकार इतने धन का इंतजाम कर सकती है कि वह हर साल देश भर के गरीबों के खातों में 72,000-72,000 रुपये डाल सके?" उन्होंने मराठी भाषा की एक कहावत का हवाला देते हुए कहा, "मनुष्य हर बात का स्वांग रच सकता है. लेकिन वह किसी को धन देने का स्वांग नहीं रच सकता. लिहाजा "न्याय" के चुनावी वादे को लेकर कोई भी गरीब कांग्रेस पर भरोसा नहीं करेगा."

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