- प्रदीप कुमार द्विवेदी-

* देवी दुर्गा का चौथा स्वरूप कूष्मांडा है. 

* देवी कूष्मांडा, सिंह पर सवार हैं और सूर्यलोक में निवास करती हैं, जो क्षमता किसी भी अन्य देवी देवता में नहीं है, इसलिए जब कोई कारक ग्रह अस्त हो जाए तो देवी कूष्मांडा की आराधना करनी चाहिए.

* देवी कूष्मांडा अष्टभुजा धारी हैं और अस्त्र-शस्त्र के साथ माता के एक हाथ में अमृत कलश भी है.

* देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है.  

* देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना से सूर्य ग्रह की अनुकुलता प्राप्त होती है इसलिए सिंह राशिवालों को देवी की आराधना से संपूर्ण सुख की प्राप्ति होती है.

* जिन श्रद्धालुओं की सूर्य की दशा-अन्तरदशा चल रही हो उन्हें भी देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. 

* पद, प्रतिष्ठा आदि की कामना रखनेवाले श्रद्धालुओं को देवी कूष्मांडा की आराधना करनी चाहिए.

* जिन श्रद्धालुओं के पिता से मतभेद हों वे संकल्प लेकर देवी कूष्मांडा की आराधना करें, विवाद से राहत मिलेगी.

* देवी की इस मंत्र से पूजा-अर्चना करें...  देवी कूष्माण्डायै नम:॥

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

वृषभ, कर्क, सिंह, 

वृश्चिक, धनु, मीन

*तुला राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

मंगलवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा           रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- रोग                   पहला- काल

दूसरा- उद्वेग                 दूसरा- लाभ

तीसरा- चर                  तीसरा- उद्वेग

चौथा- लाभ                   चौथा- शुभ

पांचवां- अमृत                पांचवां- अमृत

छठा- काल                    छठा- चर

सातवां- शुभ                  सातवां- रोग

आठवां- रोग                  आठवां- काल

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.

* दिन का चौघडिय़ाअपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ाअपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है

पंचांग

मंगलवार, 9 अप्रैल 2019

विनायक चतुर्थी

लक्ष्मी पञ्चमी

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5120

दिन काल 12:40:24

मास चैत्र

तिथि चतुर्थी - 16:08:39 तक

नक्षत्र कृत्तिका - 10:19:59 तक

करण विष्टि - 16:08:39 तक, बव - 27:55:50 तक

पक्ष शुक्ल

योग आयुष्मान - 18:55:53 तक

सूर्योदय 06:02:55

सूर्यास्त 18:43:21

चन्द्र राशि वृषभ

चन्द्रोदय 08:41:59

चन्द्रास्त 22:30:59

ऋतु वसंत

दिशा शूल: उत्तर में

राहु काल वास: पश्चिम में

नक्षत्र शूल: पश्चिम में 10:20 से

चन्द्र वास: दक्षिण में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


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