नई दिल्ली. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने दो महीनों में दूसरी बार रेपो रेट में कटौती की है. नए वित्त वर्ष 2019-20 में मौद्रिक समीक्षा नीति बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर दी है. आरबीआई ने रेपो रेट 6.25 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दी है. इससे पहले सात फरवरी 2019 को आरबीआई ने रेपो रेट को 0.25 बेसिर प्वाइंट घटाकर 6.50 से 6.25 फीसदी की थी. रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिये 7.20 प्रतिशत की दर से जीडीपी वृद्धि का पूर्वानुमान लगाया है.

रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति का संशोधित अनुमान घटाकर 2.40 प्रतिशत कर दिया है. वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही के लिये 2.90 से तीन प्रतिशत और वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी छमाही के लिये 3.50 से 3.80 प्रतिशत कर दिया है.

मौद्रिक नीति समिति के छह में से चार सदस्यों ने नीतिगत दर में कटौती का पक्ष लिया जबकि दो सदस्यों ने रेपो दर स्थिर रखने का समर्थन किया. ऐसा माना जा रहा था कि वैश्विक नरमी से घरेलू आर्थिक वृद्धि संभावनाओं पर असर पड़ने की आशंकाओं के बीच आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये रिजर्व बैंक प्रमुख नीतिगत दरों में कटौती कर सकता है.

रेपो रेट के कम होने से बैंकों की रिजर्व बैंक से धन लेने की लागत कम होती है. ऐसा माना जाता है कि बैंक इस सस्ती लागत का लाभ आगे अपने ग्राहकों तक भी पहुंचायेंगे. इससे बैंकों को घर, दुकान, पर्सनल और कार के लिये लोन कम दरों पर देने का मौका मिलता है. ग्राहकों के चल रहे लोन पर ईएमआई का बोझ भी कम होता है.

इससे पहले रिजर्व बैंक ने 18 महीने के अंतराल के बाद फरवरी 2019 में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी. ब्याज दर में एक के बाद एक कटौती से मौजूदा चुनावी मौसम में कर्ज लेने वालों को राहत मिल सकती है. आम लोगों को आने वाले महीनों में कर्ज के बोझ से थोड़ी राहत मिल सकती है. उनको होम लोन की ईएमआई थोड़ी कम हो सकती है.

यह वित्त वर्ष 2019-20 की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक थी. 6 सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास कर रहे थे.

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास इससे उद्योग संगठनों, जमाकर्ताओं के संगठन, एमएसएमई के प्रतिनिधियों तथा बैंक अधिकारियों समेत विभिन्न पक्षों के साथ बैठक कर चुके थे. मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक के चार प्रतिशत के दायरे में बनी हुई है इससे उद्योग जगत एक बार और रेपो रेट कम करने की वकालत कर रहे थे.

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्रमुख (पीसीजी एवं पूंजी बाजार रणनीति) वी.के.शर्मा ने कहा कि बाजार रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती तथा परिदृश्य बदलकर सामान्य करने के अनुकूल थी. तरलता में अनुमानित सुधार तथा ब्याज दर में कटौती बाजार के लिये अच्छी होगी.

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