मुद्दा. कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी हो चुका है और इस वक्त 22 लाख नौकरियों का दावा खासा चर्चा में है कि- इतनी नौकरियां हैं कहां? हर वर्ष दो करोड़ नौकरियां देने का वादा करने वाले भी अब इस पर सवाल खड़ा कर रहे हैं कि- इतनी नौकरियां कैसे देंगे?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कहना था कि- अगर उनकी सरकार बनी तो 31 मार्च 2020 तक सभी रिक्त पदों को भरेंगे! लेकिन, क्या वास्तव में इतने रिक्त पद हैं?

खबर है कि... अप्रैल 2020 तक केंद्र सरकार करीब चार लाख नौकरियां दे सकती है और इसके साथ राज्यों का रोजगार जोड़ दिया जाए तो 22 लाख का आंकड़ा हो सकता है, परन्तु आंकड़ों में यह गणित जितनी आसान नजर आती है, उतनी आसान है नहीं!

हालांकि, कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र के अनुसार- स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में आवंटन बढ़ाया जाएगा और राज्य सरकारों से करीब 20 लाख लोगों को नौकरियां मिलेगी, किन्तु कितनी राज्य सरकारें इसमें केन्द्र सरकार का साथ देंगी, यह बड़ा सवाल है?

जाहिर है, एकसाथ लाखों नौकरियों के लिए कुछ और भी कदम उठाने होंगे! 

*इस संबंध में 9 दिसंबर 2018 की पलपल इंडिया की रिपोर्ट- भाई साहब के रोजगार माॅडल से मिलेगी बेरोजगारी से मुक्ति! बड़ी संख्या में रोजगार सृजन के लिए सफल और प्रायोगिक मानी जा सकती है...

भाई साहब पं लक्ष्मीनारायण द्विवेदी न तो रोजगार देने वाले सक्षम अधिकारी थे और न ही बड़े उद्योगपति, लेकिन अपनी समर्पित सेवाओं की बदौलत वे राजस्थान के वागड़ क्षेत्र में रोजगार क्रांति के दूत बने.

राजस्थान ब्राह्मण महासभा के बांसवाड़ा अध्यक्ष चन्दूलाल उपाध्याय का कहना है कि- आज भाई साहब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन बगैर किसी स्वार्थ के समाज के सभी वर्गो के बेरोजगारों को रोजगार प्राप्त करने में प्रत्यक्ष-परोक्ष सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान करके उन्होंने लोगों के दिलों में अपनी अलग जगह बनाई है. उनकी सेवाएं हमेशा याद रखी जाएंगी.

अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी सयुक्त महासंघ व राजस्थान राज्य कर्मचारी संध के प्रदेश अध्यक्ष रहे भाई साहब ने न केवल बेरोजगारों को रोजगार प्राप्त करने में सहयोग प्रदान किया बल्कि बेहतर रोजगार के लिए प्रमोशन, स्थानान्तरण आदि के लिए भी उन्होंने लोगों को पूरा सहयोग प्रदान किया.

इस वक्त देश में बेरोजगारी की समस्या बढ़ती जा रही है, लेकिन यदि भाई साहब के रोजगार माॅडल पर कार्य किया जाए तो बेरोजगारी की समस्या लगभग समाप्त हो सकती है.

एक्कीसवीं सदी में जीवन 24 घंटे का हो गया है, परन्तु सरकारी सेवाएं दस से पांच के बीच ही अटकी हुई हैं. विभिन्न सरकारी सेवाओं को 24 घंटों के लिए दो शिफ्ट में कर दिया जाए तो जहां बेरोजगारों को रोजगार मिल जाएगा, वहीं जनता को भी बहुत राहत मिलेगी. इन सेवाओं में दिन की सेवाएं निशुल्क तथा रात्रि सेवाएं सशुल्क होने पर सरकार पर आर्थिक भार भी नहीं बढ़ेगा. पं. द्विवेदी का मानना था कि सेवाओं का समय बढाना समय की आवश्यकता हैं और भविष्य के लिये यह उपयोगी भी होगा.

राजस्थान ब्राम्हण महासभा के जिला महामंत्री महेश पण्डया ने बताया कि उनके रोजगार माॅडल की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जो सक्षम मंत्रियों, अधिकारियों को प्रेषित की जाएगी ताकि उसको लागू करके बेरोजगारों को रोजगार नहीं मिलने की परेशानी से मुक्ति मिल सके.

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