यूं तो घर में बैठने का स्थान, रसोईघर, बेडरूम व शौचालय सभी होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तु के हिसाब से घर के यह सारे कोने कैसे और कहां बनाने चाहिए ताकि आपकी ज़िंदगी खुशी-खुशी व्यतीत हो…

बता दें कि बाथरूम यानि कि शौचालय घर का एक जरूरी हिस्सा माना जाता है. आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन सत्य यही है कि इस स्थान को बहुत खास माना जाता है और इसका संबंध आपके धन लाभ से भी बहुत होता है.

नीले रंग की बाल्टी का वास्तू से क्या है कनेक्शन 

वास्तुशास्त्र के अनुसार बाथरूम में नीले रंग की बाल्टी रखना बहुत लाभकारी मानी जाती है. वहीं, इसे रखने से घर में सुख, शांति और समृद्धि हमेशा बनी रहती है. ध्यान रहें कि बाल्टी को कभी खाली नहीं छोड़ना चाहिए और उसमें हमेशा थोड़ा पानी भरकर ही रखना चाहिए. जान लें कि ऐसा करने से आपके घर धन का आगमन भी बना रहेगा.

नीले रंग की बाल्टी कैसे है लाभकारी, यहां जानें 

स्नानघर में नीले रंग की बाल्टी रखना बहुत लाभकारी होता है. ऐसी मान्यता है कि नीले बाल्टी को रखने से सुख-शांति और समृद्धि में वृद्धि होती है. इस बात का खास ध्यान रखें कि बाल्टी कभी खाली ना छोड़ें, इसे थोड़ा भरा ही रहने दें.

यूं तो घर का बाथरूम दिखने में बहुत साधारण लगता है, लेकिन इसमें भी कई दोष उत्पन्न होते हैं, जो जीवन पर शुभ व अशुभ प्रभाव डालते रहते हैं. अगर इस ओर ध्यान ना दिया जाए, तो आपके जीवन में परेशानियां आती रहेंगी.

बाथरूम से जुड़ी 3 खास वास्तु टिप्स

• ध्यान दें कि स्नानघर के दरवाजे के ठीक सामने कोई आईना या फिर दर्पण नहीं लगा होना चाहिए क्योंकि यह अशुभ प्रभाव को बढ़ाता है. जब भी कभी आप स्नानघर का दरवाजा खोलते हैं, तो घर की नकारात्मक ऊर्जा दर्पण से ही टकराकर दोबारा घर में चली जाती है.

• वहीं, हम अकसर स्नानघर का प्रयोग करने के बाद उसका दरवाजा खुला ही छोड़ देते हैं. जान लें कि खुले दरवाजे को शुभ नहीं माना जाता है क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को खींचने का काम करता है. अगर आपके बेडरूम में स्नानघर या फिर शौचालय है, तो उसका दरवाजा हमेशा बंद ही रखें.

• वास्तु की मानें तो बेडरूम और बाथरूम में दो अलग-अलग तरह की ऊर्जाएं होती हैं और इनका आपस में टकराना अशुभ माना जाता व इसका स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है.

घर के शौचालय से जुड़ी 4 अहम बातें 

• आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्नानघर या फिर शौचालय में अगर पानी की बर्बादी होती है, तो यह भी कई तरह के वास्तुदोष को जन्म देता है जिससे आपको धन और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं. इस वास्तु दोष से बचने के लिए नल को हमेशा कस के बंद रखें.

• वहीं, अगर आपके स्नानघर के नल का पानी टपकता रहता है, तो जान लें कि घर की शांति और धन दोनों ही टपकते हुए पानी के साथ बहते चले जाएंगे. याद रखें कि अगर आप बहते पानी को बचाते हैं, तो आपका चंद्रमा बलवान होगा और आपको शुभ परिणाम भी मिलेंगे.

• इन दिनों लेटेस्ट ट्रेंड चला हुआ है कि स्नानघर और शौचालय एक साथ बनवाने का चलन हो गया है. कुछ लोग तो इसे आधुनिक जीवनशैली से भी जोड़कर देखते हैं और सही भी मानते हैं. बता दें कि वास्तुशास्त्र में स्नानघर और शौचालय का एक साथ होना सही नहीं माना गया है क्योंकि इससे परिवार के सदस्यों में मनमुटाव, वाद-विवाद, रोग, आर्थिक समस्या बनी रहती है.

• वास्तु के मुताबिक, स्नानघर चंद्रमा का निवास होता है और शौचालय राहु का. चंद्रमा मन और जल है, तो राहु काली छाया और विषय है. दोनों एक साथ होंगे, तो चंद्र और राहु का ग्रहण दोष बन जाएगा. राहु के प्रभाव से स्नानघर का जल विष हो जाएगा और इससे नहाने से स्वास्थ्य संबंधी समस्या उत्पन्न होंगी.

शौचालय व स्नानघर से जुड़ी सही दिशा 

क्या आप आर्थिक समस्याओं से घिरे हुए हैं और इससे बचना चाहते हैं, तो इस बात का खास ध्यान रखें कि शौचालय का द्वार उस दिशा में भूलकर भी ना हो, जो घर के मंदिर या फिर किचन के सामने खुलता हो.

स्नानघर उत्तर एवं पूर्व दिशा में और शौचालय दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण और नैत्रत्य के बीच में बनाया जाना शुभ माना जाता है और अगर आप दोनों को एक साथ संयुक्त रूप से बनाने की सोचते हैं, तो उन्हें पश्चिमी और उत्तरी वायव्य कोण में बनाना श्रेष्ठ है. यही नहीं, बाथरूम में फर्श की ढाल, पानी का बहाव उत्तर एवं पूर्व दिशा की ओर ही होनी चाहिए.

वहीं, शौचालय में बैठने की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि शौच करते समय आपका चेहरा दक्षिण या फिर पश्चिम दिशा की ओर हो. याद रहे कि पूर्व में कभी भी नहीं हो, क्योंकि पूर्व सूर्य देव की दिशा होती है और मान्यता है कि उस तरफ मुंह करके शौच करते हुए उनका अपमान होता है. कहते हैं कि इससे जातक को कानूनी अड़चनों एवं अपयश का सामना भी करना पड़ सकता है.

संयुक्त रूप से बने शौचालय और स्नानघर बनाने या केवल अलग ही स्नानघर पर इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि उसमें पानी के नल, नहाने का शावर, उत्तर एवं पूर्व दिशा में ही लगाए जाएं और नहाते समय आपका मुंह उत्तर अथवा पूर्व की तरफ होने पर ही आपको शुभ फल प्राप्त होगा.

साभार: वेद संसार डॉट कॉम 

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