खबरंदाजी. वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी ने स्वयं को विनम्र दर्शाने के लिए खुद को प्रधान सेवक से लेकर चौकीदार तक भले ही घोषित कर दिया हो, लेकिन अब वे अपने ही शब्दजाल में उलझते जा रहे हैं. हालांकि, पीएम मोदी के चौकीदार लगाने के बाद वसुंधरा राजे, शिवराजसिंह चौहान, अमित शाह सहित अनेक बीजेपी नेताओं ने अपने नाम के आगे चौकीदार लगा लिया है, लेकिन चलेगा कब तक? यह अभी साफ नहीं है! प्रधान सेवक पर तो सियासी हमले शुरू हो ही गए थे, इसके बाद चौकीदार भी निशाने पर आ गया, पहले- चौकीदार वीक है, फिर- चौकीदार भागीदार है, और अंत में- चौकीदार ही चोर है!

राहुल गांधी के इस राजनीतिक आक्रमण का जवाब पहले तो- उल्टा चोर चौकीदार को डांटे, कह कर दिया गया, लेकिन बात में वजन नहीं आया, तब नया जवाब आया- मैं भी चौकीदार? मैं भी चौकीदार पर विरोधियों को तो सियासी हमला करना ही था, लेकिन कई अपनों ने भी हमला कर दिया! भाजपा के ही राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि- मैं ब्राह्मण हूं, मैं चौकीदार नहीं हो सकता? बीजेपी के पूर्व प्रवक्ता आईपी सिंह ने तो अपने नाम के आगे चौकीदार के बजाय उसूलदार लगा लिया. उनका कहना था कि- हमने प्रधानमंत्री चुना था या प्रचारमंत्री? इसके अलावा भी उन्होंने बहुत कुछ अमर्यादित और आपत्तिजनक कहा, तो बीजेपी ने उन्हें छह वर्षों के लिये पार्टी से ही बाहर कर दिया! लेकिन, खबर है कि उनका कहना था कि- पार्टी, जिसे मैंने अपने जीवन के तीन दशक दिये, एक धरतीपकड़ कार्यकर्ता की तरह जन सरोकार की राजनीति की, ढह चुके आंतरिक लोकतंत्र के बीच सच बोलना जुर्म हो चुका है.

उन्होंने कहा कि- माफ कीजियेगा नरेंद्र मोदी जी, अपनी आंख पर पट्टी बांध कर आपके लिये चौकीदारी नहीं कर सकता? दिलचस्प खबर यह है कि यूपी के हरदोई से बीजेपी सांसद अंशुल वर्मा टिकट काटे जाने के बाद समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए, परन्तु इससे पहले अंशुल वर्मा प्रदेश बीजेपी कार्यालय पहुंचे और गेट पर उपस्थित चौकीदार को अपना इस्तीफा सौंप दिया. यही नहीं, मैं भी चौकीदार कैंपेन पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि- आजकल हर बड़े फैसले चौकीदार ही ले रहे हैं, इसलिए उन्होंने चौकीदार को अपना इस्तीफा सौंपा है! उधर, एमपी से भी एक मजेदार खबर है कि- भाजपा विधायक राम डांगोर के खिलाफ खंडवा पुलिस द्वारा कार पर चौकीदार लिखवाने के लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 51 के उल्लंघन के लिए चालान जारी किया गया.

एक और चौंकाने वाली खबर यह भी है कि- मैं भी चौकीदार को लेकर चुनाव आयोग ने भारतीय जनता पार्टी को नोटिस जारी किया है. चुनाव आयोग ने बीजेपी के नीरज कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है. उन्होंने ही सोशल मीडिया पर इस वीडियो को प्रमोट किया था. चुनाव आयोग ने उन्हें यह नोटिस मैं भी चौकीदार कैंपेन का वीडियो बिना इजाजत के सोशल मीडिया पर शेयर करने पर भेजा है, जिसमें कहा गया कि- मैं भी चौकीदार कैंपेन में इस्तेमाल वीडियो में आर्मी के जवान मौजूद हैं, जो चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश के खिलाफ है और चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करता है!

दरअसल, मैं भी चौकीदार अभियान शुरू करना जितना उत्साहित करने वाला रहा, उतनी ही उसकी उम्र कम नजर आ रही है, क्योंकि, अपने नाम के साथ विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं की पहचान वाले उपनाम लगाने के अनेक संगठनों ने प्रयोग किए, परन्तु सारे ही प्रयोग गुजरते समय के साथ ढेर हो गए! आखिर, चौकीदार को भी बड़े-बड़े राजनेता कब तक अपने नाम के साथ बनाए रखेंगे?

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