- प्रदीप कुमार द्विवेदी  

*जिस दिन भगवान शिव भैरव के रूप में प्रकट हुए थे, उसे कालभैरव जयन्ती कहा जाता है. कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान इसे मनाया जाता है. इसीलिए हर कृष्ण पक्ष की अष्टमी, कालाष्टमी कहलाती है. 

*इस दिन कालभैरव का दर्शन-पूजन सर्वमनोकामनाएं पूर्ण करता है. इस दिन प्रातः पवित्र नदी-सरोवर में स्नान के बाद  पितरों का श्राद्ध-तर्पण करके भैरव पूजा-व्रत करने से तमाम विघ्न समाप्त हो जाते हैं, दीर्घायु प्राप्त होती है.

*देवी भक्त कालाष्टमी के दिन काल भैरव के साथ-साथ देवी कालिका की पूजा-अर्चना-व्रत भी करते हैं. भैरव पूजा-आराधना करने से परिवार में सुख-समृद्धि के साथ-साथ स्वास्थ्य रक्षा और अकाल मौत से सुरक्षा भी होती है. 

*कालभैरव अष्टमी पर भैरव के दर्शन-पूजा मात्र से अशुभ कर्मों से मुक्ति  मिलती है, क्रूर ग्रहों के कुप्रभाव से छुटकारा मिलता है. 

*भोलेनाथ के भैरव स्वरूप की पूजा, उपासना करनेवाले शिवभक्तो को भैरवनाथ की पूजा करके अध्र्य देना चाहिए. 

*रात्रि जागरण करके शिव-पार्वती की कथा और भजन-कीर्तन करना चाहिए. भैरव कथा का श्रवण और आरती करनी चाहिए. 

*भगवान भैरवनाथ की प्रसन्नता के लिए उनके वाहन श्वान- कुत्ते को भोजन कराना चाहिए. 

*इस दिन प्रातः पवित्र नदी-सरोवर में स्नान करके  पितरों का श्राद्ध-तर्पण करके भैरव-पूजा-व्रत करने से सारे विघ्न समाप्त हो जाते हैं. 

*अकाल मृत्यु से रक्षा होकर दीर्घायु प्राप्त होती है.

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मिथुन, कर्क, तुला, 

धनु, कुम्भ, मीन

*वृषभ राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

गुरुवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा       रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- शुभ              पहला- अमृत

दूसरा- रोग                दूसरा- चर

तीसरा- उद्वेग            तीसरा- रोग

चौथा- चर                चौथा- काल

पांचवां- लाभ             पांचवां- लाभ

छठा- अमृत              छठा- उद्वेग

सातवां- काल             सातवां- शुभ

आठवां- शुभ             आठवां- अमृत

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है! 

पंचांग

गुरुवार, 28 मार्च 2019

कालाष्टमी

बसोड़ा

वर्षी तप आरम्भ

शक सम्वत 1940 विलम्बी

विक्रम सम्वत 2075

काली सम्वत 5120

दिन काल 12:20:04

मास चैत्र

तिथि अष्टमी - 22:35:59 तक

नक्षत्र मूल - 10:11:09 तक

करण बालव - 09:41:25 तक, कौलव - 22:35:59 तक

पक्ष कृष्ण

योग वरियान - 16:41:12 तक

सूर्योदय 06:16:36

सूर्यास्त 18:36:41

चन्द्र राशि धनु

चन्द्रोदय 25:53:59

चन्द्रास्त 11:43:00

ऋतु वसंत

दिशा शूल: दक्षिण में

राहु काल वास: दक्षिण में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पूर्व में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


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