चुनावार्थ. राजस्थान में भारत वाहिनी पार्टी के प्रमुख घनश्याम तिवाड़ी कांग्रेस में शामिल हो गए हैं, शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी आदि का लोस टिकट कट गया है, ये सारे संकेत हैं कि आठवें दशक में अटल-आडवाणी के नेतृत्व में बनी बीजेपी, अब मोदी-शाह की बीजेपी हो गई है? उधर, गुजरात में कभी पीएम मोदी के प्रमुख मित्र रहे प्रवीण तोगड़िया, बीजेपी के खिलाफ न केवल झंडा लहरा रहे हैं, बल्कि लोस चुनाव में वाराणसी में पीएम मोदी को चुनौती भी देने की तैयारी कर रहे हैं! ये सारे बदलाव बताते हैं कि पीएम मोदी के लिए 2019 की राह आसान नहीं है.

वर्ष 2014 में पीएम मोदी के पास भ्रष्टाचार के विरूद्ध सियासी तलवार और अच्छे दिनों की ढाल थी, सामने थी कमजोर कांग्रेस? चुनावी चमत्कार हुआ और बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करवाई, लेकिन इसके साथ ही भाजपा के भीतर भी एकाधिकार की जंग शुरू हो गई. गुजरते समय के साथ मोदी-शाह ने बीजेपी में एकाधिकार तो कायम कर लिया, परन्तु एकतरफा अनुशासन खत्म हो गया. शत्रुघ्न सिन्हा, यशवंत सिन्हा जैसे नेता लंबे समय तक खामोश नहीं रहे, इधर, बगावत के स्वर बुलंद होने लगे, तो उधर, जनहित के मोर्चे पर केन्द्र की पीएम मोदी सरकार पर से जनता का भरोसा भी लड़खड़ाने लगा!

वैसे तो मोदी-शाह, कांग्रेस मुक्त भारत का अभियान लेकर चले थे और शुरूआत में कामयाबी भी मिली थी, लेकिन गुजरात विस चुनाव से सियासी समय बदलने लगा, नतीजा- ताजा विधानसभा चुनाव में एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़, तीनों राज्य भाजपा मुक्त हो गए? और अब जिस तरह की आयाराम-गयाराम का सियासी सिद्धान्त प्रभावी हो रहा है, कांग्रेस युक्त भाजपा होती जा रही है? वर्ष 2014 में एक ओर खड़ी कांग्रेस अब आक्रामक रूख के साथ मुख्य मुकाबले में आ गई है, जबकि बीजेपी के पास दिखाने के लिए आंकड़ों के अलावा कोई खास उपलब्धियां नहीं हैं! मतलब... राफेल की चर्चाओं के चलते अब पीएम मोदी के पास न तो भ्रष्टाचार के विरूद्ध सियासी तलवार है और न ही अपने बचाव के लिए अच्छे दिनों की ढाल है, कैसे जीतेंगे 2019 की सियासी जंग, यह बड़ा सवाल है? राहुल गांधी तो 2014 में सियासी मैदान से लगभग बाहर ही हो गए थे.

उन्हें मुख्य मुकाबले में लाने में जितना योगदान कांग्रेस समर्थकों का नहीं है, उससे कई ज्यादा मोदी-शाह टीम का है? उन्होंने जनता को कभी राहुल बाबा को भूलने ही नहीं दिया! पीएम मोदी की ओवर ब्रांडिंग बीजेपी को भारी पड़ गई, तो राहुल गांधी को अज्ञानी साबित करने की अति के चलते जनता ने ध्यान देना ही बंद कर दिया? अब, मोदी-शाह टीम के पास बचे हैं केवल भावनात्मक मुद्दे और सोशल मीडिया पर सक्रिय समर्थक! इनके दम पर तो पीएम मोदी 2014 नहीं दोहरा सकते हैं, किन्तु यदि संघ का सक्रिय समर्थन मिल गया, तो कुछ बेहतर स्थिति में जरूर आ सकते हैं?

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


1. RBI के खिलाफ आजादी के बाद पहली बार सरकार ने किया विशेष शक्ति का इस्तेमाल

2. CM योगी का राम मंदिर पर बड़ा बयान- धैर्य रखें, दिवाली पर खुशखबरी दूंगा

3. मध्यप्रदेश स्थापना दिवस विशेष...देखें हैं रंग हजार

4. न्यूनतम वेतन पर 'आप' की जीत, दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर SC ने लगाई रोक

5. सार्वजनिक वाहनों में अब जरूरी होगा लोकेशन ट्रेकिंग एवं आपात बटन

6. 50 पैसे का ये दुर्लभ सिक्का आपको दिला सकता है 51 हजार 500 रुपए, जानें कैसे

7. ईज ऑफ डुइंग बिजनेस: भारत 23 पायदान की छलांग लगा 100 से पहुंचा 77 वें स्थान पर

8. दिवाली पर घर जाने के लिए ऐसे कराएं कन्फर्म तत्काल टिकट

9. MeToo:HC ने खारिज की छानबीन के लिए निर्देश की मांग वाली याचिका

10. भारत में आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने एक दशक में 10 करोड़ नए रोजगार की जरूरत

11. मंगलनाथ की भात पूजा सहित इन उपायों से कर्ज संकट कम होता

************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।