चुनावार्थ. वर्ष 2014 में मोदी मैजिक के चलते गुजरात में 26 में से 26 सीटें, तो राजस्थान में 25 में से 25 सीटें बीजेपी ने जीत लीं, लेकिन गुना और छिंदवाड़ा के कारण एमपी में 29 में से 27 सीटें ही भाजपा को मिलीं, अब सवाल यह है कि- क्या एमपी में ये 27 सीटें भी बचा पाएगी बीजेपी? एमपी में भोपाल, जबलपुर, इंदौर, विदिशा, सागर, खजुराहो, सतना जैसी एक दर्जन से ज्यादा ऐसी सीटें हैं, जहां करीब डेढ़ दशक से कांग्रेस को जीत का इंतजार है? लेकिन, अब कांग्रेस इन सीटों पर भी फोकस है और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भोपाल से चुनाव लड़वाने का मकसद भी यही है कि इन सीटों से हार का ठप्पा हटाया जाए.

गुना सीट पर कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया वर्ष 2002 से लगातार जीत रहे हैं, तो छिंदवाड़ा सीट से एमपी के सीएम कमलनाथ वर्ष 1998 से लगातार सांसद बनते रहे हैं. ग्वालियर, झाबुआ, होशंगाबाद, राजगढ़, देवास, उज्जैन, मंदसौर, धार, खंडवा सहित एक दर्जन से ज्यादा ऐसी सीटें हैं, जहां कभी कांग्रेस को कामयाबी मिली तो कभी बीजेपी ने जीत का परचम लहराया. इस बार इन सीटों को बचाना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है. सियासी संकेत यही हैं कि बदली राजनीतिक तस्वीर के मद्देनजर एमपी में यदि बीजेपी के लिए 2014 दोहराना मुश्किल है, तो कांग्रेस के लिए भी बड़ी कामयाबी दर्ज कराना आसान नहीं है. देखना दिलचस्प होगा कि विस चुनाव में वोटों में जीती, पर सीटों में हारी बीजेपी, लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से ज्यादा सीटें ला पाती है या नहीं?

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