- प्रदीप कुमार द्विवेदी   

* प्रात:काल उठ कर हथेलियों के दर्शन करने के लिए कहा जाता है और जो दर्शन-प्रार्थना है उसमें स्पष्ट किया गया है कि हथेली के आगे के भाग अंगुलियों में देवी लक्ष्मी का निवास मान कर दर्शन करें, हथेली के मध्य में देवी सरस्वती का निवास मान कर दर्शन करें और हथेली के आधार में पालन करने वाले अपने ईष्ट देव... श्रीगणेश, गोविंद, ब्रह्मा... के दर्शन करें!

* यह तो इस दर्शन-प्रार्थना का अर्थ है लेकिन इसका भावार्थ है सफल मानव जीवन के लिए सबसे पहले कर्म करें जो हमारी अंगुलियां करती हैं और जिससे धन प्राप्त होता है, उसके बाद ज्ञान प्राप्त करें जो हमें सद्बुद्धि प्रदान करता है कि इस धन का कैसे उपयोग करना है तथा इसके बाद जगत का पालन करनेवाले गोविंद, ब्रह्मा, श्रीगणेश आदि देव हमें धन और ज्ञान के संयुक्त उपयोग से जीवन को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग दिखाते हैं.

* प्रात:काल हथेली के दर्शन करके प्रार्थना करने की सार्थकता तभी है, प्राण प्रतिष्ठा तभी होगी जब इसका प्रायोगिक सद्उपयोग हो, अन्यथा यह प्रार्थना मात्र औपचारिकता रह जाएगी!

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, वृषभ, सिंह, 

कन्या, धनु, कुम्भ

*कर्क राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

- मंगलवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा          रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- रोग                  पहला- काल

दूसरा- उद्वेग                दूसरा- लाभ

तीसरा- चर                 तीसरा- उद्वेग

चौथा- लाभ                  चौथा- शुभ

पांचवां- अमृत               पांचवां- अमृत

छठा- काल                   छठा- चर

सातवां- शुभ                 सातवां- रोग

आठवां- रोग                 आठवां- काल

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है

पंचांग

मंगलवार, 5 मार्च 2019

शक सम्वत 1940 विलम्बी

विक्रम सम्वत 2075

काली सम्वत 5120

दिन काल 11:40:35

मास फाल्गुन

तिथि चतुर्दशी - 19:08:36 तक

नक्षत्र धनिष्ठा - 15:17:04 तक

करण शकुन - 19:08:36 तक

पक्ष कृष्ण

योग शिव - 14:31:09 तक

सूर्योदय 06:42:45

सूर्यास्त 18:23:20

चन्द्र राशि कुम्भ

चन्द्रोदय 30:37:59

चन्द्रास्त 17:18:00

ऋतु वसंत

दिशा शूल: उत्तर में

राहु काल वास: पश्चिम में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पश्चिम में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


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